कानपुर पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई में 600 किलो से अधिक गांजा बरामद कर अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी नेटवर्क का खुलासा किया है। 15 किलोमीटर तक पीछा करने के बाद पकड़े गए ट्रक से करीब 10 करोड़ रुपये की खेप बरामद हुई। पुलिस अब दिल्ली, मुंबई और अन्य महानगरों तक फैले नेटवर्क की जांच में जुटी है।
कानपुर में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। क्राइम ब्रांच और रावतपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने एक ऐसे ट्रक को पकड़ने में कामयाबी हासिल की है, जिसमें 600 किलो से अधिक गांजा छिपाकर ले जाया जा रहा था। पुलिस के अनुसार बरामद गांजे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 10 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस कार्रवाई को हाल के वर्षों में कानपुर में नशे के कारोबार के खिलाफ सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।
इस पूरे ऑपरेशन की शुरुआत एक गुप्त सूचना से हुई। पुलिस को जानकारी मिली थी कि एक ट्रक भारी मात्रा में मादक पदार्थ लेकर कानपुर से गुजरने वाला है। सूचना मिलते ही एडीसीपी सुमित रामटेक के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच और रावतपुर पुलिस की टीम सक्रिय हो गई। संभावित मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी गई और संदिग्ध वाहनों पर नजर रखी जाने लगी।
कुछ ही समय बाद पुलिस को एक संदिग्ध ट्रक दिखाई दिया। जैसे ही टीम ने वाहन को रोकने का प्रयास किया, चालक ने ट्रक की रफ्तार बढ़ा दी। इसके बाद पुलिस और ट्रक के बीच पीछा शुरू हो गया। लगभग 15 किलोमीटर तक चले इस हाई-वोल्टेज ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने लगातार ट्रक का पीछा किया और अंततः उसे रोकने में सफलता हासिल कर ली।
ट्रक की तलाशी के दौरान पुलिस के सामने जो दृश्य आया, उसने सभी को हैरान कर दिया। वाहन के भीतर बड़ी मात्रा में गांजा छिपाकर रखा गया था। बरामद खेप का कुल वजन 600 किलो से अधिक बताया गया है। अधिकारियों के अनुसार इतनी बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों की बरामदगी इस बात की ओर संकेत करती है कि इसके पीछे कोई संगठित और व्यापक नेटवर्क काम कर रहा है।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से हरियाणा निवासी लियाकत अली को गिरफ्तार किया। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने कई अहम जानकारियां साझा की हैं। उसने अपने साथियों के रूप में जमशेद, जावेद और जुनैद के नाम बताए हैं। पुलिस अब इन सभी की तलाश में जुट गई है और उनके संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई जा रही है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि गांजे की यह खेप उड़ीसा से लाई जा रही थी। पुलिस का मानना है कि तस्कर इसे आगरा के रास्ते दिल्ली, मुंबई और देश के अन्य बड़े महानगरों तक पहुंचाने की योजना बना रहे थे। इससे यह मामला केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि एक अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी नेटवर्क की ओर इशारा करता है।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपी के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), डिजिटल संचार और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि मोबाइल डेटा और संपर्कों की पड़ताल से इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि मादक पदार्थों की यह खेप किन-किन स्थानों तक पहुंचाई जानी थी और इसके पीछे कौन लोग सक्रिय हैं।
रावतपुर थाना क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां पूरे नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। बरामद सामग्री को परीक्षण के लिए भेजा गया है और मामले से जुड़े अन्य तकनीकी एवं फॉरेंसिक पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मादक पदार्थों की तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौती भी है। ऐसे नेटवर्क युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेलते हैं और समाज पर व्यापक नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। यही कारण है कि इस प्रकार की कार्रवाई को केवल एक पुलिस ऑपरेशन नहीं बल्कि समाज को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है और पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए विभिन्न एजेंसियों का सहयोग लिया जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
फिलहाल कानपुर पुलिस की इस कार्रवाई ने नशे के कारोबार में शामिल लोगों के बीच हड़कंप मचा दिया है। 600 किलो से अधिक गांजे की बरामदगी और 10 करोड़ रुपये मूल्य की खेप पकड़े जाने से यह साफ संकेत मिला है कि उत्तर प्रदेश पुलिस मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ सख्त अभियान चला रही है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पूछताछ और जांच में आगे कौन-कौन से बड़े नाम सामने आते हैं और इस नेटवर्क की जड़ें आखिर कितनी गहरी हैं।
COMMENTS