Wednesday, June 10, 2026

अब दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाएगी गौतमबुद्धनगर पुलिस, हर 15 दिन होगी निगरानी

1645 स्पेशल नीड बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और अधिकारों की रक्षा के लिए कमिश्नरेट पुलिस का बड़ा अभियान शुरू, महिला बीट अधिकारी करेंगी नियमित संपर्क और निगरानी

Bahrampur , Latest Updated On - Jun 09 2026 | 16:30:00 PM
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गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने दिव्यांग एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और अधिकारों की रक्षा के लिए "ऑपरेशन अपराजेय" की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत 1645 बच्चों को चिन्हित किया गया है। महिला बीट अधिकारी हर 15 दिन में बच्चों और उनके अभिभावकों से संपर्क करेंगी, जबकि हेल्पलाइन, चिकित्सा सहायता और केयर टेकर सत्यापन जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की जाएंगी।

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अक्सर समाज में ऐसे बच्चे सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जाते हैं जो किसी शारीरिक या मानसिक चुनौती के साथ जीवन जी रहे होते हैं। उनकी सुरक्षा, देखभाल और अधिकारों की रक्षा केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज और प्रशासन की भी जिम्मेदारी होती है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने एक अनूठी और संवेदनशील पहल शुरू की है।

पुलिस कमिश्नर गौतमबुद्धनगर डॉ. लक्ष्मी सिंह के निर्देशन तथा अपर पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) डॉ. राजीव नारायण मिश्र के पर्यवेक्षण में दिव्यांग एवं विशेष आवश्यकता (Special Need) वाले बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए "ऑपरेशन अपराजेय" नामक विशेष कार्ययोजना प्रारंभ की गई है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह अभियान केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं होगा, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, स्वास्थ्य, सम्मान और सामाजिक संरक्षण को सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

1645 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान

अभियान के प्रारंभिक चरण में कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर क्षेत्र के कुल 1645 स्पेशल नीड बच्चों को चिन्हित किया गया है। इन बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, देखभाल और संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष निगरानी तंत्र विकसित किया जा रहा है।

पुलिस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी दिव्यांग बच्चा उपेक्षा, शोषण, हिंसा या किसी प्रकार की असुरक्षा का शिकार न हो।

हर थाना स्तर पर तैयार होगा गोपनीय रिकॉर्ड

ऑपरेशन अपराजेय के तहत कमिश्नरेट के प्रत्येक थाने में स्थापित मिशन शक्ति केंद्रों के माध्यम से दिव्यांग बच्चों का विस्तृत विवरण तैयार किया जाएगा।

इस रिकॉर्ड में बच्चों का नाम, पता, अभिभावकों की जानकारी और आवश्यक पारिवारिक विवरण शामिल रहेगा। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह पूरा रिकॉर्ड पूर्ण गोपनीयता के साथ सुरक्षित रखा जाएगा ताकि बच्चों और परिवारों की निजता प्रभावित न हो।

हर 15 दिन में होगी कुशलक्षेम की जानकारी

अभियान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू महिला बीट अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी है।

महिला बीट अधिकारियों की जिम्मेदारियों में विशेष रूप से यह कार्य जोड़ा गया है कि वे प्रत्येक 15 दिन में संबंधित बच्चों, उनके माता-पिता और देखभाल करने वाले व्यक्तियों से संपर्क करेंगी।

इस दौरान बच्चों की स्थिति, सुरक्षा, स्वास्थ्य और किसी प्रकार की समस्या की जानकारी ली जाएगी। यदि कोई समस्या सामने आती है तो तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

जरूरत पड़ने पर मिलेगी चिकित्सीय सहायता

कई बार विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को नियमित चिकित्सा देखभाल की जरूरत होती है। इसे ध्यान में रखते हुए ऑपरेशन अपराजेय में स्वास्थ्य सहायता को भी शामिल किया गया है।

यदि किसी बच्चे को चिकित्सीय सहायता की आवश्यकता होगी तो उसे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से प्रशिक्षित और विशेषज्ञ अस्पतालों तक पहुंचाया जाएगा। इससे बच्चों को समय पर उपचार और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

बच्चों को सिखाए जाएंगे सुरक्षा के उपाय

अभियान के अंतर्गत सभी बच्चों को उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति के अनुरूप आपातकालीन सेवाओं की जानकारी भी दी जाएगी।

उन्हें डायल-112 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के बारे में जागरूक किया जाएगा ताकि किसी भी संकट की स्थिति में वे या उनके परिजन तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें।

केयर टेकरों पर भी रहेगी निगरानी

कई विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की देखभाल के लिए केयर टेकर नियुक्त किए जाते हैं। ऐसे में पुलिस ने उनकी निगरानी की भी विशेष व्यवस्था की है।

मिशन शक्ति केंद्र के माध्यम से प्रत्येक केयर टेकर का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। साथ ही यह भी दर्ज किया जाएगा कि वह किन बच्चों की देखभाल कर रहा है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केयर टेकरों का नियमित चरित्र सत्यापन भी कराया जाएगा। प्रत्येक 15 दिन में उनके सत्यापन और गतिविधियों की समीक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

सुरक्षा और गरिमा पर विशेष फोकस

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ उनकी गरिमा और सम्मान की रक्षा भी अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।

किसी भी संभावित शोषण, उत्पीड़न, हिंसा या अन्य संवेदनशील घटनाओं की नियमित निगरानी की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल हस्तक्षेप किया जाएगा।

बनाया जाएगा नेबरहुड सिक्योरिटी प्लान

ऑपरेशन अपराजेय के तहत केवल पुलिस ही नहीं बल्कि विभिन्न विभागों को भी जोड़ा जाएगा।

दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा और सहायता के लिए अंतर-विभागीय समन्वय स्थापित किया जाएगा। इसके तहत एक Neighbourhood Security Plan तैयार किया जाएगा, जिससे स्थानीय समुदाय भी बच्चों की सुरक्षा में भागीदार बन सके।

सहायता और शिकायत के लिए विशेष हेल्पलाइन

पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर ने दिव्यांग बच्चों और उनके अभिभावकों की सहायता के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर 8595902539 जारी किया है।

इस नंबर पर संपर्क कर कोई भी व्यक्ति शिकायत, सहायता या परामर्श प्राप्त कर सकता है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि प्राप्त शिकायतों पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मैक्स हॉस्पिटल और एमिटी यूनिवर्सिटी देंगे प्रशिक्षण

अभियान को प्रभावी बनाने के लिए महिला बीट अधिकारियों और अन्य पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस प्रशिक्षण में मैक्स हॉस्पिटल नोएडा तथा एमिटी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ शामिल होंगे। विशेषज्ञ पुलिसकर्मियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण और सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग प्रदान करेंगे ताकि वे विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के साथ संवेदनशील और प्रभावी तरीके से संवाद कर सकें।

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद अभियान को व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा।

महिला सुरक्षा डीसीपी को बनाया गया नोडल अधिकारी

इस पूरे अभियान के सफल संचालन और निगरानी के लिए पुलिस उपायुक्त (महिला सुरक्षा) को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।

वे अभियान की प्रगति, निगरानी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करेंगी।

सुरक्षा से आगे बढ़कर संवेदनशील समाज की दिशा में कदम

ऑपरेशन अपराजेय केवल एक पुलिस अभियान नहीं बल्कि समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग के बच्चों के लिए सुरक्षा कवच तैयार करने की पहल है।

नियमित निगरानी, स्वास्थ्य सहायता, केयर टेकर सत्यापन, हेल्पलाइन सुविधा, सामुदायिक सहभागिता और विभागीय समन्वय जैसे कदम यह संकेत देते हैं कि गौतमबुद्धनगर पुलिस दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर गंभीर और संवेदनशील दृष्टिकोण अपना रही है।

यदि यह मॉडल सफल होता है तो यह देश के अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है, जहां सुरक्षा और संवेदनशीलता को एक साथ जोड़कर बच्चों के बेहतर भविष्य की दिशा में काम किया जा सके।

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