नई दिल्ली में आयोजित INDIA गठबंधन की अहम बैठक में 25 विपक्षी दलों ने साझा रणनीति पर मंथन किया। बैठक के दौरान TMC सांसद सुखेंदु शेखर राय के इस्तीफे और ममता बनर्जी पर लगाए गए गंभीर आरोपों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया।
नई दिल्ली में सोमवार को विपक्षी दलों के साझा मंच INDIA गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। लगभग दो वर्षों के अंतराल के बाद हुई इस बैठक को विपक्षी राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था। आगामी विधानसभा चुनावों और वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए आयोजित इस बैठक में देश के प्रमुख विपक्षी दलों ने एक मंच पर आकर अपनी रणनीति पर चर्चा की। हालांकि विपक्षी एकता का यह प्रदर्शन उस समय राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया जब बैठक के दौरान ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय के इस्तीफे की खबर सामने आ गई।
नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टीट्यूशनल क्लब में आयोजित इस बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे सहित कई प्रमुख विपक्षी नेता शामिल हुए।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश के अनुसार, बैठक में शामिल होने के लिए 23 विपक्षी दलों ने अपनी सहमति दी थी, जबकि बाद में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि बैठक में कुल 25 राजनीतिक दलों ने भागीदारी की। बैठक का मुख्य उद्देश्य विपक्षी दलों के बीच समन्वय को मजबूत करना, राष्ट्रीय मुद्दों पर साझा रणनीति बनाना और आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए संयुक्त तैयारी करना था।

बैठक में अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) को लेकर भी चर्चा होने की संभावना जताई गई। सूत्रों के अनुसार, गठबंधन भविष्य में दक्षिण भारत में अपने विस्तार की रणनीति के तहत नए सहयोगियों को जोड़ने पर विचार कर सकता है।
हालांकि विपक्षी एकता के इस बड़े आयोजन के बीच कुछ प्रमुख दलों की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय रही। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस बैठक से दूरी बनाए रखी। पिछले एक वर्ष के दौरान पार्टी लगातार INDIA गठबंधन से अलग रुख अपनाती दिखाई दी है। वहीं द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने भी बैठक में भाग नहीं लिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु में कांग्रेस और डीएमके के बीच बढ़ती असहजता इसके पीछे एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती है।
बैठक के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि गठबंधन ने पांच महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनाई है। उन्होंने बताया कि वोट चोरी और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजने का निर्णय लिया गया है। इसके अतिरिक्त बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याएं और देश की आर्थिक स्थिति जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार से तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग भी की गई है।
खड़गे ने यह भी कहा कि सभी विपक्षी दल हर दो महीने में नियमित बैठक करेंगे, जबकि संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के नेता के कार्यालय में प्रतिदिन सुबह समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी ताकि संसद के भीतर विपक्ष की रणनीति एकजुट बनी रहे।

बैठक में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि नीट परीक्षा में देश के युवाओं के साथ अन्याय हुआ है और इस मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा मांगा गया।
इस बीच बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी विपक्षी एकता पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि गठबंधन के सभी दल एकजुट हैं और पांच महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी है। उन्होंने चुनाव प्रणाली को लेकर भी बयान देते हुए कहा कि यदि चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं तो भाजपा को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
हालांकि बैठक का सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम पश्चिम बंगाल से जुड़ा रहा। TMC के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने राज्यसभा की सदस्यता और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दोनों से इस्तीफा दे दिया। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया।

इस्तीफे के बाद सुखेंदु शेखर राय ने तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पार्टी सत्ता के अहंकार में जमीनी हकीकत से कट चुकी है। उनके अनुसार पिछले 15 वर्षों में मंत्री, पंचायत प्रतिनिधि, पार्षद और मेयर आम कार्यकर्ताओं की पहुंच से बाहर हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन्होंने वर्षों तक संघर्ष कर पार्टी को मजबूत किया, उन्हें संगठन में हाशिए पर धकेल दिया गया जबकि विवादित और आपराधिक छवि वाले लोगों को आगे बढ़ाया गया।
राय ने पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए करोड़ों रुपये की कथित लूट का भी उल्लेख किया। उन्होंने चर्चित आरजी कर अस्पताल मामले का हवाला देते हुए कहा कि अब कई सच्चाइयां सामने आ रही हैं।
राजनीतिक हलकों में उनके इस्तीफे को ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। खास बात यह रही कि इस्तीफे के बाद सुखेंदु शेखर राय ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर जाकर मुलाकात की, जहां कथित रूप से कुछ अन्य TMC नेताओं की मौजूदगी की भी चर्चा रही। इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।
एक ओर INDIA गठबंधन विपक्षी एकता और साझा रणनीति का संदेश देने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर गठबंधन के भीतर मौजूद मतभेद और सहयोगी दलों की आंतरिक चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्षी दल इन चुनौतियों का सामना कैसे करते हैं और क्या वे 2029 के चुनाव से पहले एक मजबूत और विश्वसनीय विकल्प के रूप में खुद को स्थापित कर पाते हैं।
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