लखनऊ में DPIIT और इन्वेस्ट यूपी की कार्यशाला में उद्योग संगठनों के साथ हुआ मंथन, जन विश्वास सुधार, FTA, निर्यात वृद्धि और निवेश आकर्षित करने पर बनी रणनीति
लखनऊ में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यशाला में भारत सरकार के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) तथा उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में निवेश, निर्यात और औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में व्यापक मंथन किया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत डीपीआईआईटी ने इन्वेस्ट यूपी के सहयोग से इस जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें देश के प्रमुख उद्योग संगठनों, निवेशकों और हितधारकों ने भाग लिया।
कार्यशाला का उद्देश्य केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी देना नहीं था, बल्कि उद्योग जगत और सरकार के बीच एक मजबूत संवाद स्थापित करना भी था, ताकि निवेश, व्यापार और औद्योगिक विकास से जुड़े मुद्दों का व्यावहारिक समाधान निकाला जा सके। कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि भारत और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश और निर्यात के मानचित्र पर और अधिक मजबूत स्थिति में कैसे पहुंचाया जाए।
उद्योग जगत और सरकार के बीच संवाद का बड़ा मंच
कार्यशाला की अध्यक्षता डीपीआईआईटी के संयुक्त सचिव डॉ. जय प्रकाश शिवहरे ने की। इस दौरान इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरन आनंद सहित देश के प्रमुख उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इनमें एसोचैम, फिक्की, पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI), डिक्की (DICCI), लघु उद्योग भारती, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (IIA) और कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) जैसे प्रतिष्ठित संगठन शामिल थे।
कार्यक्रम में उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों के अलावा मीडिया और अन्य हितधारकों ने भी भाग लिया। इस दौरान उद्योगों से जुड़े विभिन्न मुद्दों, चुनौतियों और संभावनाओं पर खुलकर चर्चा की गई।

जन विश्वास सुधारों से बदल रही कारोबारी तस्वीर
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ. जय प्रकाश शिवहरे ने कहा कि केंद्र सरकार कारोबारी माहौल को सरल, पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल बनाने के लिए लगातार सुधार कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘जन विश्वास अधिनियम’ के तहत अनेक पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त किया गया है।
उनके अनुसार इन सुधारों से उद्योगों पर अनुपालन संबंधी बोझ (Compliance Burden) काफी कम हुआ है। इससे उद्यमियों को व्यवसाय शुरू करने और विस्तार करने में आसानी मिली है। उन्होंने कहा कि ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बेहतर बनाने के लिए सरकार लगातार नियमों को सरल और डिजिटल बना रही है।
वैश्विक चुनौतियों के बीच निर्यात बढ़ाने पर फोकस
डॉ. शिवहरे ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व व्यापार कई भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव और कई प्रमुख निर्यात बाजारों में शुल्क संबंधी बाधाओं का असर वैश्विक व्यापार पर पड़ रहा है।
ऐसे माहौल में भारत सरकार नए वैश्विक व्यापारिक साझेदारों के साथ संबंध मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि निर्यात किसी भी अर्थव्यवस्था की मजबूती का महत्वपूर्ण आधार होता है। इसलिए भारतीय उद्योगों को उच्च गुणवत्ता वाले, मूल्यवर्धित और वैश्विक बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने पर विशेष ध्यान देना होगा।
39 देशों तक पहुंचाने वाले मुक्त व्यापार समझौते
कार्यशाला के दौरान सबसे महत्वपूर्ण चर्चा भारत द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) को लेकर हुई। डॉ. शिवहरे ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में भारत ने नौ से अधिक मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, जो लगभग 39 देशों को कवर करते हैं।
इनमें यूरोपीय संघ के 27 देशों तक पहुंच बनाने वाले समझौते भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन समझौतों के माध्यम से भारतीय उद्योगों और निर्यातकों के लिए नए बाजार खुल रहे हैं। इससे भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ‘पारस्परिक प्रमाणन’ (Reciprocal Certification) व्यवस्था को बढ़ावा दे रही है। इससे भारतीय उत्पादों को विदेशी बाजारों में प्रवेश के दौरान कम बाधाओं का सामना करना पड़ेगा और निर्यात प्रक्रिया अधिक आसान होगी।
उद्योग जगत ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
कार्यशाला के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों ने कई महत्वपूर्ण सुझाव भी रखे। उन्होंने सरकारी योजनाओं की जानकारी को जमीनी स्तर तक पहुंचाने, आवेदन प्रक्रियाओं को और अधिक सरल बनाने तथा जागरूकता अभियानों का विस्तार करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उद्योग संगठनों ने व्यापार मेलों और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भागीदारी के लिए अधिक सरकारी सहयोग की मांग की। इसके साथ ही स्टार्टअप्स को कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराने तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं और नीतियों की जानकारी के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने का सुझाव भी दिया गया।
निवेश मित्र 3.0 से मजबूत होगा कारोबारी माहौल
इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरन आनंद ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार निवेशकों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए लगातार सुधार कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘निवेश मित्र 3.0’ के माध्यम से राज्य में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को और मजबूत बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस और नियामकीय सरलीकरण के जरिए निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाया जा रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को देश का सबसे आकर्षक निवेश गंतव्य बनाना है।
विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने की तैयारी
विजय किरन आनंद ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने विदेशी निवेशकों की सुविधा के लिए विशेष विदेशी निवेश प्रकोष्ठ (Foreign Investor Facilitation Mechanism) स्थापित किए हैं।

राज्य सरकार अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश मंचों पर सक्रिय भागीदारी कर रही है ताकि वैश्विक निवेशकों को उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए आकर्षित किया जा सके। इसके साथ ही औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 तथा एफडीआई/एफसीआई, फॉर्च्यून ग्लोबल 500 और फॉर्च्यून इंडिया 500 कंपनियों के लिए बनाई गई निवेश प्रोत्साहन नीति-2023 का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे सुधारों का लाभ उद्योग जगत तक प्रभावी ढंग से पहुंचता है तो उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में निवेश, उत्पादन और निर्यात का बड़ा केंद्र बन सकता है।
लखनऊ में आयोजित यह कार्यशाला केवल एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि यह उस व्यापक रणनीति का हिस्सा थी जिसके जरिए उत्तर प्रदेश को विकसित भारत के आर्थिक इंजन के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। निवेश, निर्यात और औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए सरकार और उद्योग जगत के बीच बढ़ता यह संवाद आने वाले समय में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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