यूपी और जापान के बीच पर्यटन, संस्कृति, बौद्ध विरासत, वेलनेस टूरिज्म और व्यंजन आधारित अनुभव को बढ़ावा देने पर उच्चस्तरीय विचार-विमर्श हुआ।
उत्तर प्रदेश और जापान के बीच पर्यटन एवं संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग को नया आयाम देने पर बुधवार को उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने की। इसमें जापानी प्रतिनिधिमंडल और उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।
बैठक में चर्चा का मुख्य फोकस वेलनेस टूरिज्म, गोल्फ और खेल पर्यटन, व्यंजन और खानपान, बौद्ध पर्यटन, सांस्कृतिक यात्रा और साहित्यिक-ज्ञान आधारित पर्यटन पर रहा। जयवीर सिंह ने कहा कि भारत और जापान के बीच संस्कृति एक सशक्त सेतु है, जो दोनों देशों को जोड़ता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की बौद्ध विरासत विश्व स्तर पर अद्वितीय है, जहां सारनाथ, कुशीनगर और कपिलवस्तु जैसे प्रमुख स्थल स्थित हैं।

बैठक में पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने जापानी जीवन-दर्शन की अवधारणाओं ‘इकिगाई’, ‘वाबी-साबी’ और ‘ज़ेन’ का परिचय देते हुए कहा कि पर्यटन और संस्कृति में आपसी आदान-प्रदान दोनों देशों के लिए समृद्ध अनुभव लाएगा।
जापानी प्रतिनिधिमंडल के उप-राज्यपाल जुनिची इशिडेरा ने बताया कि दिसंबर 2024 के एमओयू के बाद संवाद लगातार बढ़ा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की प्रस्तावित जापान यात्रा और अगस्त में 200 सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल के आगमन का उल्लेख किया, जिससे व्यापार, वाणिज्य और सांस्कृतिक सहयोग और मजबूत होगा।

बैठक में विशेष सचिव पर्यटन ईशा प्रिया और संस्कृति विभाग की डॉ. सृष्टि धवन ने पर्यटन एवं सांस्कृतिक सहयोग की संभावनाओं पर प्रस्तुतीकरण किया। इसके अलावा टूर ऑपरेटर्स को जापानी पर्यटकों के लिए विशेष क्यूरेटेड टूर पैकेज तैयार करने की अपील की गई।
जयवीर सिंह ने कहा कि यह साझेदारी न केवल रोजगार और निवेश बढ़ाएगी, बल्कि सांस्कृतिक, बौद्ध और वेलनेस पर्यटन को भी नई दिशा देगी।
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