दिल्ली साइबर पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गैंग फर्जी APK के जरिए मोबाइल फोन में घुसपैठ कर बैंक खातों से पैसे उड़ाता था। पुलिस ने मास्टरमाइंड को उत्तर प्रदेश के देवरिया से गिरफ्तार किया है।
दिल्ली में साइबर फ्रॉड का बड़ा खुलासा, फर्जी APK से ठगी करने वाला गैंग ध्वस्त
दिल्ली के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन (PS Cyber Central) ने एक बड़े और खतरनाक साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जो देशभर में लोगों को फर्जी मोबाइल एप्लिकेशन (APK) के जरिए निशाना बना रहा था। इस कार्रवाई में दो साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि गैंग के मास्टरमाइंड को उत्तर प्रदेश के देवरिया से पकड़ा गया है।
पुलिस ने इस कार्रवाई में 11 मोबाइल फोन, कई डेबिट कार्ड, सिम कार्ड और एक क्रिप्टो हार्डवेयर वॉलेट बरामद किया है। जांच में सामने आया है कि यह गैंग “FUD (Fully Undetected) APK” नामक खतरनाक तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों के मोबाइल में घुसपैठ करता था।
कैसे हुआ पूरा साइबर फ्रॉड?
मामला FIR नंबर 58/25, दिनांक 29 जुलाई 2025 से जुड़ा है, जिसमें एक शिकायतकर्ता ने बताया कि उसके साथ ₹1,20,999 की ऑनलाइन ठगी हुई है। पीड़ित को एक अनजान कॉल आया, जिसमें कहा गया कि उसका बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा अगर तुरंत भुगतान नहीं किया गया।
इसी डर का फायदा उठाकर साइबर अपराधियों ने उसे WhatsApp पर “Customer Support APK” नामक एक फर्जी ऐप भेजा और इंस्टॉल करने के लिए मजबूर किया। जैसे ही पीड़ित ने ऐप इंस्टॉल किया, उसका मोबाइल पूरी तरह हैक हो गया और अपराधियों ने रिमोट एक्सेस लेकर उसके बैंक अकाउंट से कई ट्रांजेक्शन के जरिए पैसे ट्रांसफर कर लिए।

टेक्नोलॉजी का खतरनाक इस्तेमाल
पुलिस जांच में सामने आया कि यह APK बेहद खतरनाक था और इसे खास तौर पर एंटी-वायरस सिस्टम को बायपास करने के लिए तैयार किया गया था। इसे FUD (Fully Undetected) तकनीक से बनाया गया था, जिससे यह किसी भी मोबाइल सिक्योरिटी सिस्टम को पहचान में नहीं आता था।
गैंग के सदस्य इसी APK का इस्तेमाल कर लोगों के फोन का पूरा कंट्रोल हासिल कर लेते थे और फिर बैंकिंग ऐप्स, OTP और डिजिटल वॉलेट के जरिए पैसे निकाल लेते थे।
मास्टरमाइंड तक कैसे पहुंची पुलिस?
जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए दो Telegram IDs की पहचान की, जिनसे यह मालवेयर APK सप्लाई किया जा रहा था।
लगातार सर्विलांस और डेटा एनालिसिस के बाद मास्टरमाइंड की पहचान अभय साहनी (25 वर्ष), निवासी देवरिया, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई। पुलिस ने एक विशेष टीम बनाकर 14 मई 2026 को देवरिया में छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
इससे पहले पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े उमेश कुमार राजक (25 वर्ष), निवासी गोरखपुर को भी गिरफ्तार किया था, जो इन APK फाइलों को खरीदकर आगे इस्तेमाल करता था।
पूछताछ में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
पूछताछ में आरोपी अभय साहनी ने कबूल किया कि उसने केवल 8वीं कक्षा तक पढ़ाई की है, लेकिन उसने YouTube, Telegram और सोशल मीडिया के जरिए साइबर फ्रॉड और APK डेवलपमेंट की तकनीक सीखी।
उसने बताया कि वह हर फर्जी APK को लगभग ₹4,000 में साइबर अपराधियों को बेचता था। अब तक वह 40 से 50 ऐसे APK फाइलें बेच चुका था और करीब 20–25 लोगों के साथ ठगी में खुद भी शामिल रहा है।
आरोपी ने यह भी बताया कि उसने APK को इस तरह डिजाइन किया था कि वह किसी भी सिक्योरिटी सिस्टम से पकड़ में न आए और आसानी से मोबाइल का पूरा कंट्रोल हासिल कर सके।

बरामद हुआ भारी डिजिटल सबूत
पुलिस ने आरोपी के पास से कई महत्वपूर्ण चीजें बरामद की हैं, जिनमें शामिल हैं—
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11 मोबाइल फोन (5 iPhone, 3 Google Pixel, 3 Android फोन)
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11 डेबिट कार्ड (Jio Payment Bank और NSDL कार्ड)
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1 Ledger Nano S Plus क्रिप्टो हार्डवेयर वॉलेट
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8 सिम कार्ड
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एक कार, जो आरोपी के भाई के नाम पर रजिस्टर्ड है
पुलिस को शक है कि यह गैंग क्रिप्टोकरेंसी के जरिए भी पैसे को छिपाने का काम करता था।
पुलिस और साइबर टीम की संयुक्त कार्रवाई
इस पूरी कार्रवाई को ACP ऑपरेशंस पदम सिंह राणा के निर्देशन में और इंस्पेक्टर योगराज दलाल की देखरेख में अंजाम दिया गया। जांच टीम का नेतृत्व SI रणविजय सिंह ने किया, जिसमें HC संदीप और HC परमवीर भी शामिल थे।
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेन-देन और अन्य राज्यों में फैले लिंक की जांच कर रही है।
साइबर अपराध का बढ़ता खतरा
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि साइबर अपराधी अब बेहद तकनीकी और संगठित तरीके से काम कर रहे हैं। एक साधारण कॉल या APK इंस्टॉल कराकर भी वे लोगों के बैंक अकाउंट तक पहुंच बना लेते हैं।
पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक या APK फाइल को इंस्टॉल न करें और किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज पर तुरंत सतर्क हो जाएं।
आगे की जांच जारी
फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों और उनके अंतरराज्यीय कनेक्शन की जांच कर रही है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस साइबर गैंग से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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