ग्रेटर नोएडा के शारदा विश्वविद्यालय में योग निद्रा के न्यूरोकॉग्निटिव प्रभावों पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन, fMRI स्कैन के जरिए होगा वैज्ञानिक अध्ययन।
ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा विश्वविद्यालय एक बार फिर शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में नई पहल के साथ चर्चा में है। यहां योग और आधुनिक विज्ञान के संगम को साकार करते हुए “fMRI आधारित योग निद्रा के न्यूरोकॉग्निटिव प्रभावों के अध्ययन” के तहत दो दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक भारतीय योग पद्धतियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना और उनके प्रभावों का प्रमाणिक अध्ययन करना है। यह कार्यक्रम “सेंटर फॉर एआई इन मेडिसिन, इमेजिंग एंड फॉरेंसिक्स” (CAIMIF) के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय संस्कृति वैश्विक केंद्र, शारदा स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज, श्रीमठ योग और Gi4QC Forum का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
कार्यक्रम में कुल 60 स्वयंसेवकों ने भाग लेने के लिए पंजीकरण कराया, जो इस विषय में बढ़ती रुचि को दर्शाता है। इनमें से 35 प्रतिभागियों का चयन एक विशेष प्रक्रिया के तहत किया गया, जिसमें मनोवैज्ञानिक परीक्षण और प्री-ट्रेनिंग fMRI स्कैन शामिल थे। यह चयन प्रक्रिया इस अध्ययन को और अधिक वैज्ञानिक और विश्वसनीय बनाती है।

चयनित प्रतिभागी 19 मार्च से 8 अप्रैल 2026 तक चलने वाले 21 दिवसीय योग निद्रा प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं। इस दौरान उन्हें योग निद्रा की तकनीकों का गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद सभी प्रतिभागियों का पोस्ट-ट्रेनिंग fMRI स्कैन किया जाएगा, जिससे उनके मस्तिष्क में आए बदलावों का तुलनात्मक अध्ययन किया जा सके।
इस शोध का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि योग निद्रा जैसी पारंपरिक विधि मानसिक स्वास्थ्य पर किस प्रकार सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। विशेष रूप से तनाव में कमी, बेहतर नींद, भावनात्मक संतुलन और मानसिक क्षमता में सुधार जैसे पहलुओं का वैज्ञानिक प्रमाण जुटाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
इस महत्वपूर्ण अध्ययन का नेतृत्व प्रो. अशोक कुमार कर रहे हैं, जिनके साथ विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की एक टीम भी जुड़ी हुई है। प्रो. अशोक कुमार ने कहा, “यह आयोजन पारंपरिक भारतीय योग पद्धतियों को वैज्ञानिक रूप से समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हमें विश्वास है कि इस अध्ययन के परिणाम मानसिक स्वास्थ्य और न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोलेंगे।”
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे। इनमें वाइस चांसलर प्रो. डॉ. सिबाराम खारा, डीन रिसर्च डॉ. भुमनेश, डॉ. पारुल खरे, डॉ. संजय, न्यूरो सर्जन डॉ. रवींद्र श्रीवास्तव, डॉ. खेमिंद्र, डॉ. श्रीकांत सहित विभिन्न स्कूलों के फैकल्टी मेंबर्स, डॉक्टर और छात्र शामिल रहे।
इस तरह के अनुसंधान न केवल भारतीय परंपराओं को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाते हैं, बल्कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के लिए भी नई दिशाएं खोलते हैं। शारदा विश्वविद्यालय का यह प्रयास योग और विज्ञान के बीच की दूरी को कम करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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