Tuesday, April 28, 2026

बंगाल चुनाव में ‘शांत पहली बाजी’ के बाद सख्ती का दूसरा दौर! 2.32 लाख जवानों के साये में वोटिंग, शेषन-राव मॉडल की वापसी?

पहले चरण में बिना पुनर्मतदान के शांतिपूर्ण मतदान, अब दूसरे चरण में अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम—चुनाव आयोग की तैयारी चरम पर

New Delhi , Latest Updated On - Apr 28 2026 | 12:34:00 PM
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पश्चिम बंगाल में पहले चरण की शांतिपूर्ण वोटिंग के बाद दूसरे चरण के लिए चुनाव आयोग ने 2.32 लाख केंद्रीय बलों के साथ कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं।

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग छिटपुट घटनाओं के बीच शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने के बाद अब दूसरे चरण को लेकर सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां अपने चरम पर हैं। खास बात यह रही कि पहले चरण में किसी भी बूथ पर पुनर्मतदान की नौबत नहीं आई, जिसे चुनाव प्रबंधन की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

इस उपलब्धि के केंद्र में चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका की चर्चा जोरों पर है। गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) को लेकर पहले से चर्चा में रहे ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग ने जिस सख्ती से तैयारियां कीं, उसके परिणाम पहले चरण में साफ दिखाई दिए।

दूसरे और अंतिम चरण के तहत 29 अप्रैल को 142 सीटों पर मतदान होना है। इसके लिए चुनाव आयोग ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की कुल 2,321 कंपनियां तैनात की गई हैं, जिनमें CRPF, BSF, CISF, ITBP और SSB शामिल हैं।


करीब 2.32 लाख केंद्रीय बलों के जवान मतदान को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए तैनात किए गए हैं।

सुरक्षा व्यवस्था का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि केवल कोलकाता पुलिस क्षेत्र में ही 273 कंपनियां (लगभग 27,300 जवान) तैनात हैं।

इसी तरह पूर्वी बर्दवान में 260 कंपनियां और हुगली ग्रामीण क्षेत्र में 234 कंपनियां तैनात की गई हैं। हावड़ा, हुगली, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों में भी भारी संख्या में केंद्रीय बलों की मौजूदगी सुनिश्चित की गई है।

सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए 160 मोटरसाइकिलों पर दो-दो जवान लगातार पेट्रोलिंग करेंगे। इसके अलावा ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए संवेदनशील इलाकों पर कड़ी नजर रखी जाएगी।

राज्य पुलिस के भी 38,297 जवान चुनाव ड्यूटी में लगाए गए हैं, जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी।

चुनाव आयोग ने निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल भी किए हैं। दूसरे चरण से पहले 173 पुलिस स्टेशनों के इंचार्ज, अधिकारियों और इंस्पेक्टरों का तबादला किया गया।

केवल कोलकाता में ही 31 थानों के प्रभारी बदल दिए गए। इसके अलावा 106 ऑब्जर्वर तैनात किए गए हैं, जिनमें 95 पुलिस ऑब्जर्वर और 11 अतिरिक्त पुलिस ऑब्जर्वर शामिल हैं।


मतदान खत्म होने के बाद भी सुरक्षा में कोई ढील नहीं दी जाएगी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 500 कंपनियां तैनात रहेंगी, जबकि 200 कंपनियां ईवीएम और स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा में लगाई जाएंगी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संकेत दिया है कि चुनाव के बाद भी 60 दिनों तक केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रह सकती है, ताकि किसी भी संभावित हिंसा को रोका जा सके।

पहले चरण के शांतिपूर्ण मतदान के बाद चुनाव सुधारों के लिए प्रसिद्ध टी एन शेषण और के जे राव की कार्यशैली की चर्चा फिर से होने लगी है।

टी.एन. शेषन ने भारत में चुनाव सुधारों की नींव रखी थी, जबकि के.जे. राव ने 2005 के बिहार विधानसभा चुनाव में बूथ कैप्चरिंग और हिंसा जैसी समस्याओं पर काबू पाया था।

2005 से पहले बिहार बूथ लूट और चुनावी हिंसा के लिए बदनाम था। लेकिन केजे राव के विशेष पर्यवेक्षक बनने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई।

उन्होंने बाहुबली नेताओं जैसे मोहम्मद शहाबुद्दीन और सद्दू यादव पर सख्त कार्रवाई की, केंद्रीय बलों की तैनाती बढ़ाई और मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का सख्ती से पालन कराया। परिणामस्वरूप 2005 का चुनाव बिहार के सबसे निष्पक्ष चुनावों में गिना गया।

बंगाल में गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आया। ममता बनर्जी ने इसका विरोध किया और इसे साजिश करार दिया, जबकि अन्य राज्यों में इसे लेकर ज्यादा विवाद नहीं हुआ।

हालांकि, आम जनता की ओर से बड़े पैमाने पर विरोध देखने को नहीं मिला।

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