अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के बीच हिंद महासागर में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी हमले में ईरानी युद्धपोत IRIS Dena के डूबने के बाद भारत ने तकनीकी समस्या से जूझ रहे दूसरे ईरानी जहाज IRIS Lavan को मानवीय आधार पर कोच्चि बंदरगाह में शरण दी।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब पश्चिम एशिया से निकलकर हिंद महासागर और भारतीय उपमहाद्वीप तक पहुंच गया है। हाल ही में श्रीलंका के तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी के हमले में ईरानी युद्धपोत IRIS Dena के डूबने की खबर ने क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
इस घटनाक्रम के बीच भारत ने मानवीय आधार पर एक अहम कदम उठाते हुए तकनीकी समस्या में फंसे ईरानी युद्धपोत IRIS Lavan को अपने बंदरगाह में शरण देने की अनुमति दी है। यह जानकारी भारत के विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar ने साझा की।
अमेरिका के हमले से बढ़ा समुद्री तनाव
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के तट के पास ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को निशाना बनाया, जिसके बाद जहाज डूब गया। इस घटना ने हिंद महासागर क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
बताया जा रहा है कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के दौरान ईरान के तीन युद्धपोत इस क्षेत्र में मौजूद थे। इनमें से एक जहाज IRIS Lavan तकनीकी समस्या के कारण भारतीय जलक्षेत्र के पास पहुंच गया था।
भारत ने मानवीय आधार पर दी अनुमति
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि ईरान की ओर से भारत को संदेश मिला था कि उनका एक जहाज तकनीकी खराबी से जूझ रहा है और वह भारतीय बंदरगाह में प्रवेश की अनुमति चाहता है।
उन्होंने कहा कि यह संदेश फरवरी के अंत में मिला था और भारत सरकार ने 1 मार्च को मानवीय आधार पर जहाज को भारतीय बंदरगाह में आने की अनुमति दे दी। इसके बाद यह जहाज Kochi Port पहुंच गया, जहां वह फिलहाल सुरक्षित खड़ा है।
कैडेटों की भी बची जान
जयशंकर के अनुसार, इस युद्धपोत पर कई युवा ईरानी कैडेट भी सवार थे। भारत ने उन्हें सुरक्षित उतारकर पास के सुरक्षित स्थान पर ठहराने की व्यवस्था की है।
भारत के इस कदम से न केवल जहाज संभावित हमले से बच गया बल्कि उस पर सवार दर्जनों कैडेटों की जान भी सुरक्षित हो गई।

फ्लीट रिव्यू में शामिल होने आए थे जहाज
विदेश मंत्री ने बताया कि ये ईरानी जहाज पहले एक अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेने के लिए आए थे। हालांकि क्षेत्रीय परिस्थितियों में अचानक बदलाव के कारण ये जहाज कठिन स्थिति में फंस गए।
उन्होंने बताया कि तीन जहाजों में से एक श्रीलंका के Trincomalee Port पहुंच गया, जबकि दुर्भाग्यवश तीसरा जहाज IRIS Dena रास्ते में ही डूब गया।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा बड़ी चिंता
जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया और समुद्री क्षेत्रों में बढ़ते तनाव के कारण भारतीय नाविकों और मर्चेंट शिपिंग की सुरक्षा भारत के लिए बड़ी चिंता बन गई है।
उन्होंने बताया कि दुनिया भर में चलने वाले कई व्यापारिक जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं। हाल ही में जिन टैंकरों पर हमले हुए हैं, उनमें से दो जहाजों पर भारतीय नागरिकों की मौत भी हुई है।
खाड़ी देशों में बड़ी भारतीय आबादी
विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि खाड़ी देशों में करीब 90 लाख से 1 करोड़ भारतीय नागरिक रहते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और हितों की रक्षा भारत की विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इसी कारण भारत ने पिछले दो वर्षों में समुद्री सुरक्षा मजबूत करने के लिए उत्तरी अरब सागर में अपनी नौसेना की तैनाती भी बढ़ाई है।
वैश्विक समुद्री व्यापार की सुरक्षा पर जोर
जयशंकर ने कहा कि भारत अमेरिका के नेतृत्व वाले ऑपरेशन Operation Prosperity Guardian का हिस्सा नहीं है, लेकिन इसके बावजूद अमेरिका, यूरोप और क्षेत्रीय देशों की नौसेनाओं के साथ समन्वय बनाकर समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास जारी हैं।
उन्होंने कहा कि वैश्विक समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा भारत की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
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