राजस्थान के सीकर में भारतीय युवा कांग्रेस ने राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में ‘युवा आक्रोश मशाल जुलूस’ निकाला। इस दौरान पेपर लीक की घटनाओं, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए गए। युवा कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की बर्खास्तगी की मांग करते हुए आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया।
देशभर में भर्ती परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच राजस्थान के सीकर में भारतीय युवा कांग्रेस ने बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। युवा कांग्रेस ने राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में ‘युवा आक्रोश मशाल जुलूस’ का आयोजन करते हुए केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों और परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
मशाल जुलूस में बड़ी संख्या में युवा, छात्र और कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने पेपर लीक की घटनाओं, भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। युवा कांग्रेस का आरोप है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक और परीक्षा घोटालों ने लाखों छात्रों के सपनों को प्रभावित किया है।
युवाओं के गढ़ सीकर से उठी आवाज
राजस्थान का सीकर जिला लंबे समय से शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां देश के विभिन्न राज्यों से हजारों छात्र सरकारी नौकरियों और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने आते हैं।
इसी वजह से युवा कांग्रेस ने अपने विरोध प्रदर्शन के लिए सीकर को चुना। संगठन का कहना है कि यह आंदोलन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं की आवाज है जो वर्षों की मेहनत के बाद भी पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
मशाल जुलूस के दौरान युवाओं ने हाथों में मशाल लेकर शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की।
उदय भानु चिब ने केंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हो रही है और इसके लिए केंद्र सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं। उनके अनुसार बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने छात्रों का भरोसा तोड़ा है और लाखों युवाओं के भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया है।
उदय भानु चिब ने कहा कि यह लड़ाई केवल किसी एक परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया की नहीं है, बल्कि उन करोड़ों युवाओं के सपनों की है जो वर्षों तक मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में छात्रों के हितों की अनदेखी की जा रही है और युवाओं को बार-बार निराशा का सामना करना पड़ रहा है।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की बर्खास्तगी की मांग
युवा कांग्रेस ने इस आंदोलन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की बर्खास्तगी की भी मांग उठाई।
उदय भानु चिब ने कहा कि जब तक शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं होता और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण नहीं लगाया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि युवाओं का विश्वास बहाल करने के लिए सरकार को जवाबदेही तय करनी होगी और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाना होगा।
युवा कांग्रेस का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में देशभर में युवाओं का आक्रोश और बढ़ सकता है।
पेपर लीक बना राष्ट्रीय बहस का विषय
पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राज्यों और राष्ट्रीय स्तर की कई परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोप सामने आए हैं। कई मामलों में परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं, जबकि कुछ मामलों में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई भी की।
इन घटनाओं के कारण लाखों अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा देने की स्थिति का सामना करना पड़ा। इससे छात्रों के समय, मेहनत और आर्थिक संसाधनों पर भी प्रभाव पड़ा।
यही कारण है कि पेपर लीक का मुद्दा अब केवल परीक्षा से जुड़ा प्रशासनिक विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीतिक और सामाजिक बहस का हिस्सा बन चुका है।
युवाओं के भविष्य पर राजनीति तेज
लोकसभा चुनावों और विभिन्न राज्यों के चुनावों के बाद युवाओं, रोजगार और शिक्षा से जुड़े मुद्दे राजनीतिक दलों के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल हो रहे हैं।
एक ओर सरकार शिक्षा सुधार, नई शिक्षा नीति और डिजिटल परीक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने की बात कर रही है, वहीं विपक्ष लगातार पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के मुद्दे को उठाकर सरकार को घेर रहा है।
सीकर में आयोजित युवा कांग्रेस का यह मशाल जुलूस भी इसी राजनीतिक और सामाजिक बहस का हिस्सा माना जा रहा है।
क्या कहते हैं छात्र?
प्रदर्शन में शामिल कई छात्रों का कहना था कि वे वर्षों तक मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन जब परीक्षा से जुड़े विवाद सामने आते हैं तो उनका मनोबल टूट जाता है।
छात्रों ने मांग की कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाया जाए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और भर्ती प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
आगे क्या?
युवा कांग्रेस ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यह आंदोलन केवल सीकर तक सीमित नहीं रहेगा। संगठन का कहना है कि यदि सरकार ने युवाओं की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
फिलहाल सीकर में निकला ‘युवा आक्रोश मशाल जुलूस’ शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य को लेकर एक नई राजनीतिक बहस को जन्म देता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति और शिक्षा सुधार की चर्चाओं में प्रमुख स्थान बनाए रख सकता है।
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