दिल्ली में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रांत मंत्री सुरेंद्र गुप्ता ने कॉरपोरेट कंपनियों पर ‘लव जिहाद’ और धर्मांतरण को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कड़ी चेतावनी दी।
राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल द्वारा आयोजित व्यापक विरोध प्रदर्शन ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। दिल्ली के आठ प्रमुख विभागों—यमुना विहार, पूर्वी, दक्षिणी, रामकृष्ण पुरम, पश्चिमी, केशवपुरम और उत्तरी क्षेत्र—में हुए इन प्रदर्शनों में कॉरपोरेट जगत पर गंभीर आरोप लगाए गए।
प्रदर्शन के दौरान प्रांत मंत्री सुरेंद्र गुप्ता ने तीखा और विवादित बयान देते हुए कई बड़ी कंपनियों को चेतावनी दी, जिससे मामला और गरमा गया।
कॉरपोरेट सेक्टर पर गंभीर आरोप
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि कॉरपोरेट जगत में “लव जिहाद” और धर्म परिवर्तन जैसी गतिविधियां बढ़ रही हैं।
प्रांत मंत्री सुरेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह केवल सामाजिक नहीं, बल्कि संगठित रूप से चल रही गतिविधियां हैं, जो समाज की संरचना को प्रभावित कर रही हैं।
उन्होंने इसे “कॉरपोरेट जिहाद” का नाम देते हुए कहा कि यह एक नया और खतरनाक रूप है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

बड़े कॉरपोरेट्स को सीधी चेतावनी
अपने संबोधन में सुरेंद्र गुप्ता ने TCS, Lenskart और महिंद्रा जैसी कंपनियों का नाम लेते हुए कड़ी चेतावनी दी।
उन्होंने कहा,
“या तो सुधर जाओ या फिर अपने शोरूम और ऑफिसों के शीशे मोटे करवा लो।”
यह बयान आते ही राजनीतिक माहौल में तनाव और चर्चा तेज हो गई।
“हिंदू हित की बात करेगा, वही राज करेगा”
सुरेंद्र गुप्ता ने अपने भाषण में कहा कि अब केवल विकास की बात नहीं, बल्कि हिंदू समाज की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
उन्होंने कहा,
“जो हिंदू हित की बात करेगा, वही दोबारा राज करेगा।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन और शोभायात्राओं को रोकने के लिए आयोजकों पर दबाव बनाया जाता है और कार्यक्रमों को छोटा करने के लिए फोन तक किए जाते हैं।
युवाओं और परिवारों को संदेश
प्रांत मंत्री ने हिंदू समाज से अपील करते हुए कहा कि अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दें, लेकिन नौकरी के लिए जिस कंपनी का चयन किया जाए, उसकी HR नीतियों की जांच जरूर करें।
उन्होंने दावा किया कि ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सतर्कता जरूरी है और परिवारों को इस दिशा में जागरूक होना होगा।
धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर बयान
अपने भाषण में सुरेंद्र गुप्ता ने धार्मिक संस्थाओं—हिंदू मंदिर, आर्य समाज और जैन समाज—का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज को एकजुट रहना होगा।
उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि यदि समय रहते सतर्कता नहीं बरती गई, तो भविष्य में गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
सरकार पर भी निशाना
सुरेंद्र गुप्ता ने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि एक ओर धार्मिक आयोजनों पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं, जबकि दूसरी ओर “विघटनकारी तत्वों” के प्रति नरमी बरती जाती है।
उनके अनुसार,
“अगर समाज सुरक्षित नहीं है, तो विकास केवल दिखावा है।”

महिलाओं की सुरक्षा पर चिंता
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक असंतुलन को लेकर भी चिंता जताई गई।
गुप्ता ने कहा कि बढ़ती घटनाएं केवल चेतावनी नहीं, बल्कि एक गंभीर संकट का संकेत हैं और इन्हें अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
“चुप्पी अब विकल्प नहीं”
अपने भाषण के अंत में उन्होंने कहा कि अब समाज को जागरूक और सक्रिय होना होगा।
“चुप्पी अब विकल्प नहीं है—सम्मान मिलेगा तो समर्थन मिलेगा, अन्यथा बहिष्कार भी एक विकल्प है।”
उन्होंने इसे “निर्णायक समय” बताते हुए कहा कि अब किसी भी प्रकार का तुष्टिकरण या दोहरापन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
राजनीतिक और सामाजिक असर
इस प्रदर्शन और बयानबाजी के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है।
एक ओर समर्थक इसे समाज के मुद्दों को उठाने का प्रयास बता रहे हैं,
वहीं दूसरी ओर आलोचक इसे भड़काऊ बयान करार दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान कॉरपोरेट जगत और सामाजिक सौहार्द पर व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं।दिल्ली में हुए इस विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर यह दिखाया है कि सामाजिक और राजनीतिक मुद्दे किस तरह तेजी से उभरते हैं और बहस का केंद्र बन जाते हैं।
सुरेंद्र गुप्ता के बयान ने जहां एक ओर समर्थकों को सक्रिय किया है, वहीं दूसरी ओर विवाद को भी जन्म दिया है।
अब देखना यह होगा कि इस मामले पर सरकार, कॉरपोरेट जगत और समाज की प्रतिक्रिया क्या रहती है।
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