ऑनलाइन बेटिंग ऐप और वेबसाइट के जरिए लोगों को बनाया जा रहा था शिकार, 2.4 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन के सुराग मिले; 26 मोबाइल, 3 लैपटॉप और 20 सिम कार्ड बरामद
डिजिटल दुनिया में तेजी से बढ़ते ऑनलाइन बेटिंग और निवेश के नाम पर ठगी के मामलों के बीच गौतमबुद्धनगर पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। थाना सेक्टर-113 पुलिस ने ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइट और मोबाइल एप के जरिए लोगों को ठगी का शिकार बनाने वाले एक संगठित गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की शुरुआती जांच में करीब 2.4 करोड़ रुपये के संदिग्ध ऑनलाइन लेन-देन के सुराग मिले हैं, जिससे यह मामला केवल ऑनलाइन सट्टेबाजी तक सीमित नहीं बल्कि बड़े साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है।
पुलिस के अनुसार 4 जून 2026 को मैनुअल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूचना के आधार पर सेक्टर-79 क्षेत्र में कार्रवाई की गई। इस दौरान ऑनलाइन बेटिंग ऐप और वेबसाइट के माध्यम से लोगों को फंसाने वाले गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान साई कुमार पुत्र राजेश, पंडाला सतीश पुत्र पंडाला सत्यनारायण, पांडुरंगा पुत्र कोण्डाराव तथा उदयकुमार पुत्र सुब्रमण्यम के रूप में हुई है। चारों आरोपी मूल रूप से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं तथा वर्तमान में नोएडा के सेक्टर-79 क्षेत्र में रह रहे थे।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 3 लैपटॉप, 26 मोबाइल फोन, 20 सिम कार्ड, 3 वाई-फाई राउटर, 5 एटीएम कार्ड, 2 पैन कार्ड तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। बरामद डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है।
जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के लैपटॉप और मोबाइल फोन में बड़ी मात्रा में डिजिटल डेटा मिला है। इसके अलावा "लक्ष्मी ट्रेडर्स" नाम से संचालित एक बैंक खाते के माध्यम से लगभग 2.4 करोड़ रुपये के संदिग्ध ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के साक्ष्य भी सामने आए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस रकम का स्रोत क्या था और कितने लोगों को इस नेटवर्क के माध्यम से ठगी का शिकार बनाया गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करके लोगों को अपने जाल में फंसाता था। फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और अन्य डिजिटल माध्यमों पर आकर्षक विज्ञापन प्रसारित किए जाते थे। इन विज्ञापनों में कम समय में पैसे दोगुने करने, भारी मुनाफा कमाने और आसान कमाई के दावे किए जाते थे।
इसके बाद लोगों को एक ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइट और मोबाइल एप से जोड़ा जाता था। वेबसाइट पर निवेश और सट्टेबाजी के नाम पर लोगों से पैसे जमा कराए जाते थे। शुरुआती चरण में कुछ लोगों को मामूली लाभ दिखाकर भरोसा जीतने की कोशिश की जाती थी, जबकि बाद में बड़ी रकम जमा कराने के बाद संपर्क तोड़ दिया जाता था या खातों को ब्लॉक कर दिया जाता था।
पुलिस को संदेह है कि गिरोह कई राज्यों में सक्रिय था और ऑनलाइन माध्यम से देशभर के लोगों को निशाना बना रहा था। बरामद सिम कार्ड, मोबाइल फोन और बैंकिंग दस्तावेज इस बात की ओर संकेत करते हैं कि नेटवर्क का संचालन काफी संगठित तरीके से किया जा रहा था।

गिरफ्तार आरोपी साई कुमार (25 वर्ष) हैदराबाद के मियापुर क्षेत्र का निवासी है। पंडाला सतीश (31 वर्ष) आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी जिले का रहने वाला है। पांडुरंगा (22 वर्ष) और उदयकुमार (19 वर्ष) भी आंध्र प्रदेश क्षेत्र से संबंध रखते हैं। पुलिस अब इनके आपराधिक इतिहास और अन्य राज्यों में दर्ज मामलों की जानकारी जुटा रही है।
इस मामले में थाना सेक्टर-113 में मुकदमा संख्या 206/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 111, 318(4) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66-डी के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन बेटिंग और जल्दी पैसे कमाने के नाम पर चलने वाले ऐसे प्लेटफॉर्म अक्सर साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार बनते जा रहे हैं। लोग लालच या जानकारी के अभाव में अपनी मेहनत की कमाई गंवा देते हैं। ऐसे मामलों में किसी भी अनजान वेबसाइट, ऐप या सोशल मीडिया विज्ञापन पर भरोसा करने से पहले उसकी वैधता की जांच करना बेहद जरूरी है।
गौतमबुद्धनगर पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन निवेश, बेटिंग या पैसे दोगुने करने के दावे पर बिना जांच के भरोसा न करें। यदि कोई संदिग्ध लिंक, वेबसाइट या मोबाइल एप दिखाई दे तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी की जा सकती है। डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच और बैंकिंग लेन-देन की पड़ताल के बाद कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
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