SIR प्रक्रिया को असंवैधानिक बताते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा—यह बंगाल को निशाना बनाकर नाम हटाने की योजना है।
पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर सियासी और संवैधानिक टकराव अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल करते हुए इस प्रक्रिया को लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों के खिलाफ बताया है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है।
सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भावुक अंदाज में कहा, “जब हमें न्याय नहीं मिलता, तब न्याय बंद दरवाजों के पीछे रो रहा होता है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी व्यक्तिगत या पार्टी हित के लिए नहीं, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत आई हैं। ममता ने कहा, “मैं कोई बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति नहीं हूं, मैं अपनी पार्टी के लिए नहीं लड़ रही।”

सीएम ममता ने SIR प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यह केवल मतदाता सूची से नाम हटाने की कवायद बन गई है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि शादी के बाद महिलाओं द्वारा सरनेम बदलने या गरीब लोगों के पलायन को विसंगति मानकर उनके नाम हटाए जा रहे हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले केवल पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया गया, जबकि चार राज्यों में चुनाव हो रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि “24 साल बाद, सिर्फ तीन महीनों में इतनी जल्दबाजी क्यों?” ममता ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान 100 से अधिक लोगों की मौत हुई, बीएलओ की जान गई और कई लोग अस्पताल में भर्ती हैं, फिर भी असम जैसे राज्यों में ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
ममता बनर्जी ने अदालत के उस आदेश का स्वागत किया, जिसमें आधार कार्ड को वैध दस्तावेज माना गया है। उन्होंने इसे बंगाल के लोगों के लिए राहत भरा कदम बताया। यह मामला अब देशभर में चुनावी प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों पर बड़ी बहस का केंद्र बन गया है।
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