उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल ने वित्त वर्ष 2025-26 में पार्सल राजस्व के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है। 469.83 करोड़ रुपये की कमाई के साथ यह भारतीय रेलवे में सबसे आगे रहा।
उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान पार्सल बुकिंग और उससे होने वाली आय में शानदार प्रदर्शन करते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। मंडल ने इस अवधि में 469.83 करोड़ रुपये का पार्सल राजस्व अर्जित किया, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 457.46 करोड़ रुपये के मुकाबले 2.70 प्रतिशत अधिक है।
यह उपलब्धि न केवल दिल्ली मंडल के लिए बल्कि पूरे भारतीय रेलवे के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह देश के सभी मंडलों में सबसे अधिक पार्सल राजस्व है।
देश में नंबर-1 बना दिल्ली मंडल
दिल्ली मंडल का 469.83 करोड़ रुपये का पार्सल राजस्व भारतीय रेलवे के कुल 2210.33 करोड़ रुपये के पार्सल राजस्व का 21.26 प्रतिशत है। वहीं, उत्तर रेलवे के कुल 598.79 करोड़ रुपये के पार्सल राजस्व में दिल्ली मंडल की हिस्सेदारी 78.46 प्रतिशत है (फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार)।
तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो मध्य रेलवे ज़ोन का पार्सल राजस्व 252.52 करोड़ रुपये रहा, जो दिल्ली मंडल से काफी कम है।
मार्च 2026 में रिकॉर्ड SLR लीजिंग
दिल्ली मंडल ने मार्च 2026 में अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाते हुए 195 SLR (स्लग्गेज एंड लगेज रेक) लीज पर दिए। यह किसी एक महीने में SLR लीजिंग का अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है, जो मंडल की कार्यक्षमता और मांग को दर्शाता है।

नई तकनीक और कॉन्ट्रैक्ट से मिला बढ़ावा
पार्सल सेवाओं को आधुनिक और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए दिल्ली मंडल ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
- नई दिल्ली, आनंद विहार टर्मिनल और दिल्ली जंक्शन के पार्सल ऑफिसों में पार्सल स्कैनर के लिए 3 कॉन्ट्रैक्ट दिए गए हैं
- इन कॉन्ट्रैक्ट की कुल कीमत 4.26 करोड़ रुपये है और इनकी अवधि 5 साल है
इसके अलावा, मंडल ने क्लोकरूम सेवाओं के संचालन और प्रबंधन के लिए भी बड़े स्तर पर कदम उठाए हैं:
- नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (पहाड़गंज और अजमेरी गेट साइड) और आनंद विहार टर्मिनल पर 3 कॉन्ट्रैक्ट दिए गए
- इनकी कुल कीमत 6.32 करोड़ रुपये है
पार्किंग और लॉजिस्टिक्स प्रबंधन में सुधार
लॉजिस्टिक्स को और बेहतर बनाने के लिए दिल्ली मंडल ने:
- नई दिल्ली (NE-1, अजमेरी गेट साइड)
- हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन (VP साइडिंग)
- दिल्ली जंक्शन
पर ट्रक, टेम्पो और कार्गो वाहनों की पार्किंग-सह-प्रबंधन और पार्सल स्टैकिंग के लिए 3 कॉन्ट्रैक्ट दिए हैं। इनकी कुल कीमत 8.95 करोड़ रुपये है।
पहली बार ‘सेल्फ-लॉकिंग सील टैग’ का उपयोग
दिल्ली मंडल ने पार्सल सुरक्षा में सुधार के लिए एक अभिनव पहल करते हुए SLR और VP के लिए ‘सेल्फ-लॉकिंग सील टैग’ का उपयोग शुरू किया है। इससे पारंपरिक मोम सील की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी और पार्सल की सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ेगी।
विशेष बॉक्स का सफल ट्रायल
11 मार्च 2026 को ट्रेन संख्या 12230 (नई दिल्ली से लखनऊ जंक्शन) में बिजली के सामान के लिए विशेष बॉक्स का सफल परीक्षण किया गया।

इन बॉक्स की विशेषताएं:
- झटकों, दबाव और कंपन से सुरक्षा
- आसान लोडिंग और अनलोडिंग
- सामान की आसान छंटाई
यह पहल विशेष रूप से इलेक्ट्रिकल सामान के सुरक्षित परिवहन में मददगार साबित होगी।
नई JPP-RCS सेवा की शुरुआत
दिल्ली मंडल ने ‘संयुक्त पार्सल उत्पाद’ (JPP-RCS) के तहत एक नई सेवा भी शुरू की है।
- आदर्श नगर से बडगाम (जम्मू-कश्मीर) तक सेवा शुरू
- ट्रेन संख्या 00461 के माध्यम से 13 सितंबर 2025 को शुरुआत
- मार्च 2026 तक 1.34 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित
यह सेवा दूरदराज के क्षेत्रों तक पार्सल पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
डिजिटल भुगतान की ओर बड़ा कदम
पारदर्शिता और सुविधा को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली मंडल तेजी से डिजिटल भुगतान को अपना रहा है।
- मार्च 2026 तक 100% डिजिटल भुगतान का लक्ष्य
- वर्तमान में 96% भुगतान ऑनलाइन माध्यम से हो रहा है
यह पहल न केवल ग्राहकों के लिए सुविधाजनक है बल्कि सिस्टम में पारदर्शिता भी बढ़ा रही है।
नई सुविधाएं और राजस्व के नए स्रोत
दिल्ली मंडल ने ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पलवल गुड्स शेड को पार्सल स्थान के रूप में अधिसूचित किया है।
इसके अलावा:
- One Demand PCET पहले ही लोड किया जा चुका है
- इससे 18 लाख रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ है
निष्कर्ष: नई ऊंचाइयों की ओर दिल्ली मंडल
दिल्ली मंडल का यह प्रदर्शन दर्शाता है कि आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन और ग्राहक-केंद्रित सेवाओं के माध्यम से रेलवे अपने राजस्व और सेवाओं दोनों को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।
पार्सल सेवाओं में यह वृद्धि आने वाले समय में रेलवे के लिए एक मजबूत आर्थिक आधार साबित हो सकती है।
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