Wednesday, April 01, 2026

2 अप्रैल से शुरू होगी MSP पर बड़ी खरीद: क्या किसानों को मिलेगा पूरा फायदा या फिर रह जाएगी कागजी योजना?

चना, मसूर, सरसों और तूर की खरीद के लिए सरकार ने तय किए लक्ष्य, डिजिटल भुगतान और पारदर्शिता पर जोर

New Delhi , Latest Updated On - Mar 31 2026 | 18:08:00 PM
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रबी सीजन 2026-27 के लिए 2 अप्रैल से MSP पर दलहन-तिलहन खरीद शुरू होगी। सरकार ने बड़े लक्ष्य तय किए हैं और DBT के जरिए सीधे किसानों के खाते में भुगतान की व्यवस्था की है।

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लखनऊ में मंगलवार को हुई एक अहम प्रेसवार्ता में प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने रबी सीजन 2026-27 के लिए दलहन और तिलहन फसलों की खरीद को लेकर सरकार की व्यापक रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि इस बार किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर प्रभावी और पारदर्शी खरीद व्यवस्था लागू की जा रही है।

कब से शुरू होगी खरीद?

कृषि मंत्री के अनुसार, भारत सरकार की अनुमति के बाद प्रदेश में चना, मसूर, सरसों और तूर (अरहर) की खरीद 2 अप्रैल से शुरू होकर 30 जून 2026 तक चलेगी। इस दौरान फसलों के MSP इस प्रकार निर्धारित किए गए हैं—

  • चना: 5875 रुपये प्रति क्विंटल
  • मसूर: 7000 रुपये प्रति क्विंटल
  • सरसों: 6200 रुपये प्रति क्विंटल
  • तूर (अरहर): 8000 रुपये प्रति क्विंटल

खरीद के लक्ष्य भी तय

सरकार ने इस बार खरीद के लिए बड़े लक्ष्य तय किए हैं—

  • चना: 2.24 लाख मीट्रिक टन
  • मसूर: 6.77 लाख मीट्रिक टन
  • सरसों: 5.30 लाख मीट्रिक टन
  • तूर: 1.14 लाख मीट्रिक टन

इन लक्ष्यों के जरिए सरकार का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा किसानों को MSP का लाभ पहुंचाना है।

डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था

कृषि मंत्री ने बताया कि इस बार खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने पर खास ध्यान दिया गया है। सभी क्रय केंद्रों पर आधार-सक्षम पीओएस मशीनें लगाई गई हैं, जिससे किसानों की पहचान सुनिश्चित होगी और भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से किया जाएगा।

प्रदेश में 190 से अधिक क्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जबकि राज्य एजेंसियां अपने स्तर पर अतिरिक्त केंद्र भी संचालित करेंगी।


कृषि क्षेत्र में रिकॉर्ड खर्च

सरकार ने दावा किया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में कृषि विभाग ने 5700 करोड़ रुपये से अधिक की राशि विभिन्न योजनाओं पर खर्च की, जो एक रिकॉर्ड उपलब्धि है। इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार के चलते राज्य को 303 करोड़ रुपये की बचत भी हुई है।

बीज और जायद फसलों पर फोकस

किसानों को मजबूत बनाने के लिए बीज वितरण योजनाओं पर भी जोर दिया गया है।

  • 11.25 लाख किसानों को 50% अनुदान पर बीज मिला
  • 12.73 लाख किसानों को 54,847 क्विंटल बीज मुफ्त वितरित किए गए

जायद फसलों को बढ़ावा देने के लिए 31,950 क्विंटल बीज उपलब्ध कराया गया, जिसमें मूंगफली, उड़द और मूंग शामिल हैं।

उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता

सरकार के अनुसार, प्रदेश में फिलहाल 25.41 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है, जिससे किसानों को किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी। उर्वरकों का वितरण भी पीओएस मशीनों के जरिए किया जा रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी बनी हुई है।

सीड पार्क से आत्मनिर्भरता की ओर कदम

कृषि मंत्री ने “भारत रत्न चौधरी चरण सिंह सीड पार्क” की स्थापना की जानकारी भी दी। इसके लिए 50.84 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की जा चुकी है। यह परियोजना प्रदेश को बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

सरकार का दावा और सवाल

योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार का कहना है कि किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें योजनाओं का लाभ समय पर देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

हालांकि, हर साल की तरह इस बार भी असली चुनौती यही होगी कि क्या ये योजनाएं जमीनी स्तर पर पूरी तरह लागू हो पाएंगी या नहीं।

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COMMENTS
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