उत्तर प्रदेश सरकार ने निराश्रित गोवंशों के संरक्षण और भरण-पोषण को लेकर बड़ा अभियान शुरू किया है। पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि प्रदेशभर में 60.99 लाख कुंतल भूसा संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। अभियान के तहत भूसा बैंक बनाए गए हैं और किसानों से गोबर की खाद के बदले भूसा लेने की व्यवस्था भी लागू की गई है।
उत्तर प्रदेश में बढ़ती गर्मी के बीच निराश्रित गोवंशों के संरक्षण और उनके बेहतर भरण-पोषण को लेकर राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर “भूसा संग्रहण अभियान” शुरू किया है। 15 अप्रैल से 31 मई तक चलने वाले इस विशेष अभियान के जरिए प्रदेशभर के गौ आश्रय स्थलों में गोवंशों के लिए पर्याप्त मात्रा में भूसा, हरा चारा और अन्य जरूरी संसाधनों की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने इस अभियान को गोवंश संरक्षण की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार निराश्रित गोवंशों के संरक्षण और संवर्धन के लिए पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी गौ आश्रय स्थलों पर गर्मी से बचाव, पेयजल, विद्युत, औषधियां और चारे जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
12 लाख से ज्यादा गोवंश आश्रय स्थलों में संरक्षित
पशुधन मंत्री ने जानकारी दी कि प्रदेश में इस समय 7,430 स्थायी और अस्थायी गौ आश्रय स्थल संचालित हैं, जिनमें करीब 12.34 लाख निराश्रित गोवंश संरक्षित किए गए हैं। इन गोवंशों के भरण-पोषण और देखभाल के लिए भारी मात्रा में भूसे और हरे चारे की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि गेहूं की कटाई के दौरान ग्रामीण इलाकों में बड़ी मात्रा में भूसा उपलब्ध रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 15 अप्रैल से 31 मई तक विशेष भूसा संग्रहण अभियान चलाने का फैसला लिया है, ताकि आने वाले महीनों में गोवंशों को चारे की कमी का सामना न करना पड़े।
लाखों क्विंटल भूसा जमा करने का लक्ष्य
सरकार ने इस अभियान के तहत प्रदेशभर में कुल 60.99 लाख कुंतल भूसा संग्रहित करने का लक्ष्य तय किया है। पशुधन मंत्री के मुताबिक अब तक 41.53 लाख कुंतल भूसा संग्रहित भी किया जा चुका है।
इसके लिए प्रदेश में बड़े पैमाने पर भूसा बैंक बनाए गए हैं। आंकड़ों के अनुसार 1,905 अस्थायी भूसा बैंक यानी खोप और कूप स्थापित किए गए हैं, जबकि 7,285 स्थायी भूसा बैंक पहले से संचालित हैं।
इन भूसा बैंकों में संग्रहित चारे को जरूरत पड़ने पर विभिन्न गौ आश्रय स्थलों तक पहुंचाया जाएगा।
किसानों और दानदाताओं का मिल रहा सहयोग
धर्मपाल सिंह ने बताया कि इस अभियान में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों का सहयोग काफी सराहनीय रहा है। कई लोग स्वेच्छा से भूसा दान कर रहे हैं, जिसे व्यवस्थित रूप से संग्रहित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि बड़े दानदाताओं को संबंधित जिलों के जिलाधिकारी द्वारा सम्मानित भी किया जा रहा है, ताकि अन्य लोग भी इस अभियान से प्रेरित होकर जुड़ सकें।
गोबर की खाद के बदले भूसा
सरकार ने इस अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए एक अनूठी व्यवस्था भी लागू की है। गौ आश्रय स्थलों में तैयार गोबर की खाद किसानों को दी जा रही है और बदले में उनसे भूसा लिया जा रहा है।
पशुधन मंत्री ने कहा कि यह व्यवस्था किसानों और गौ आश्रय स्थलों—दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। इससे किसानों को जैविक खाद मिल रही है और गोवंशों के लिए पर्याप्त चारा भी उपलब्ध हो पा रहा है।
NGO और समितियों को सौंपी जिम्मेदारी
प्रदेश सरकार ने कई गौ आश्रय स्थलों के संचालन में स्वयंसेवी संस्थाओं को भी शामिल किया है। मंत्री ने बताया कि 707 गौ आश्रय स्थलों के प्रबंधन की जिम्मेदारी NGO, FPO और स्वयंसेवी समितियों को दी गई है।
सरकार का मानना है कि इससे व्यवस्थाओं में सुधार होगा और गोवंशों की बेहतर देखभाल सुनिश्चित की जा सकेगी।
धर्मपाल सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार गोवंश संरक्षण को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और आने वाले समय में भी इस दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठाए जाते रहेंगे।
COMMENTS