Friday, June 26, 2026

दिल्ली में 11 साल की बच्ची से रेप और मर्डर, एनकाउंटर में आरोपी कैब ड्राइवर के पैर में लगी गोली

फुटपाथ से उठाई गई 11 साल की मासूम, जंगल में मिली लाश! दिल्ली को दहला देने वाले रेप-मर्डर केस में आरोपी को लगी गोली सब-टाइटल

noida , Latest Updated On - Jun 24 2026 | 13:43:00 PM
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दिल्ली के महरौली इलाके में 11 वर्षीय बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। फुटपाथ पर सो रही बच्ची को एक कैब ड्राइवर कथित रूप से उठाकर ले गया, उसके साथ दुष्कर्म किया और फिर हत्या कर शव जंगल में फेंक दिया। पुलिस ने कुछ ही घंटों में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। मंगलवार रात घटनास्थल पर सीन रीक्रिएशन के दौरान भागने की कोशिश करने पर आरोपी को पैर में गोली मारनी पड़ी।

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नींद में उठाई गई 11 साल की बच्ची की चीखें महरौली के जंगलों में दफन हो गईं, पर चंद घंटों बाद ही आरोपी का हुआ वो हश्र कि अस्पताल में कराह उठा दरिंदा।

दिल्ली की वो सुबह रोज जैसी ही थी। फुटपाथ पर थका-हारा एक परिवार गहरी नींद में सोया था। उन्हें क्या मालूम था कि अंधेरे का फायदा उठाकर एक ऐसा भेड़िया उनकी तरफ बढ़ रहा है, जो उनकी खुशियां हमेशा के लिए निगल जाएगा। यह कहानी दिल्ली के महरौली इलाके की है, जहां एक 11 साल की मासूम के साथ न सिर्फ हैवानियत की गई, बल्कि उसकी जान भी ले ली गई। लेकिन इंसाफ का पहिया इतनी तेजी से घूमा कि महज कुछ ही घंटों के भीतर आरोपी पुलिस की गोली खाकर अस्पताल के बेड पर दर्द से कराहता नजर आया।

खौफनाक रात: नींद में ही मासूम को उठा ले गया हैवान

वारदात सोमवार सुबह की है। महरौली के सीडीआर (CDR) चौक के पास फुटपाथ पर एक परिवार सोया हुआ था। गरीबी की मार झेल रहा यह परिवार मूल रूप से बिहार का रहने वाला है। कभी किराए के मकान में रहता था, लेकिन जब तंगी बढ़ी और किराया देने के पैसे नहीं बचे, तो आसमान ही इनकी छत बन गया। माता-पिता दिहाड़ी मजदूरी करते हैं और उनकी 11 साल की मासूम बच्ची सड़कों पर गुब्बारे बेचकर परिवार का हाथ बंटाती थी। चार भाई-बहनों में वह भी माता-पिता की लाडली थी।

सोमवार तड़के, जब वह बच्ची बेफिक्र होकर फुटपाथ पर सो रही थी, तभी वहां से एक ऐप-बेस्ड कैब गुजरी। कैब चला रहा था बबलू नाम का ड्राइवर, जो खुद भी बिहार का ही रहने वाला है। बबलू की नजर फुटपाथ पर सो रही उस मासूम पर पड़ी। उसके सिर पर हैवानियत सवार हो चुकी थी। उसने कार रोकी, दबे पांव बच्ची के पास पहुंचा और गहरी नींद में सो रही 11 साल की बच्ची को वैसे ही उठा लिया। बच्ची को कार की पिछली सीट पर डालकर वह सीधे महरौली के घने जंगलों की तरफ भाग निकला। वहां उसने उस मासूम के साथ न सिर्फ दरिंदगी की, बल्कि पकड़े जाने के डर से उसकी हत्या कर दी और लाश को झाड़ियों में फेंककर फरार हो गया।


4 घंटे का वो 'सर्च ऑपरेशन' और कातिल की गिरफ्तारी

सुबह करीब 6 बजे जब माता-पिता की आंख खुली, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उनकी बेटी वहां नहीं थी। बदहवास माता-पिता ने तुरंत महरौली पुलिस थाने को सूचना दी और पीसीआर (PCR) कॉल की गई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कई टीमें गठित कीं।

पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि फुटपाथ पर कोई चश्मदीद नहीं था। लेकिन तफ्तीश के दौरान पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगालने शुरू किए। सीसीटीवी में एक संदिग्ध कैब दिखाई दी। इसके बाद पुलिस ने अपने मुखबिरों को एक्टिव किया। महज 4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद, पुलिस ने उस कैब ड्राइवर बबलू को दबोच लिया। जब पुलिस ने उससे कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। बबलू की निशानदेही पर पुलिस महरौली के जंगलों में पहुंची और उस मासूम का लहूलुहान शव बरामद किया, जिसे पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।

मंगलवार की रात: क्राइम सीन और अचानक गूंजी गोलियां

कहानी में असली मोड़ मंगलवार की रात को आया। पुलिस आरोपी बबलू को लेकर महरौली के उसी घने जंगल में पहुंची थी, जहां उसने वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस का मकसद था 'क्राइम सीन रीक्रिएट' करना, ताकि अदालत में आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश किए जा सकें। जंगल के सन्नाटे में पुलिस की टीम बबलू से वारदात की कड़ियां जोड़ ही रही थी कि अचानक बबलू ने पुलिसकर्मियों को चकमा देकर भागने की कोशिश की।

अंधेरे का फायदा उठाकर आरोपी ने दौड़ लगा दी। पुलिस ने उसे रुकने की चेतावनी दी, लेकिन वह नहीं माना। आखिरकार, पुलिस को अपनी सरकारी पिस्टल निकालनी पड़ी। पुलिस ने आरोपी को रोकने के लिए उसके पैर पर निशाना साधकर गोली चला दी। गोली लगते ही बबलू चीखते हुए जमीन पर गिर पड़ा।

कंधे पर कातिल और अस्पताल का वो मंजर

भागने की कोशिश कर रहा आरोपी अब बेबस हो चुका था। उसके पैर से खून बह रहा था। जिस पुलिस टीम पर कुछ देर पहले वह भारी पड़ने की कोशिश कर रहा था, उसी टीम के पुलिसकर्मियों ने इंसानियत दिखाते हुए उसे अपने कंधों पर उठाया और तुरंत नजदीकी अस्पताल लेकर भागे।

अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड का नजारा देखने लायक था। जो शख्स कुछ घंटों पहले एक 11 साल की बच्ची की जान लेते वक्त जरा भी नहीं कांपा था, वह अब मामूली गोली के दर्द से स्ट्रेचर पर लेटा-लेटा बुरी तरह कराह रहा था। डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू कर दिया है और फिलहाल वह पुलिस कस्टडी में अस्पताल में भर्ती है।


आरोपी का पुराना 'क्रिमिनल रिकॉर्ड'

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी बबलू कोई सीधा-साधा ड्राइवर नहीं है। उसका पुराना क्रिमिनल रिकॉर्ड रहा है। उसके खिलाफ पहले भी मारपीट करने और शराब के नशे में लापरवाही से गाड़ी चलाने के मामले दर्ज हो चुके हैं। वह आदतन अपराधी प्रवृत्ति का था, लेकिन इस बार उसने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी थीं।

फिलहाल, पुलिस इस मामले में कानूनी कार्रवाई को तेजी से आगे बढ़ा रही है। बच्ची के शव का पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है, ताकि वैज्ञानिक साक्ष्य भी जुटाए जा सकें। दिल्ली के इस दिल दहला देने वाले मामले ने एक बार फिर फुटपाथ पर रहने वाले मासूमों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी और त्वरित कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि कानून के हाथ से कोई भी गुनहगार बच नहीं सकता।

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