Saturday, June 27, 2026

'गैस कनेक्शन बंद हो जाएगा'... एक मैसेज और खाते से उड़ गए ₹2.64 लाख! दिल्ली पुलिस ने बेनकाब किया देशभर में फैला साइबर गैंग

दिल्ली, झारखंड और पश्चिम बंगाल तक फैला था साइबर ठगी का नेटवर्क, फर्जी APK लिंक भेजकर मोबाइल पर कब्जा करते थे जालसाज; 4 आरोपी गिरफ्तार, टाटा हैरियर, सोना-चांदी, लैपटॉप, टैबलेट और 20 मोबाइल बरामद

Bahrampur , Latest Updated On - Jun 26 2026 | 11:30:00 AM
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दिल्ली पुलिस के दक्षिण-पश्चिम जिला साइबर थाना पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। आरोपी गैस कनेक्शन डिस्कनेक्ट होने का फर्जी संदेश भेजकर लोगों के मोबाइल में खतरनाक APK फाइल इंस्टॉल करवाते थे और बैंक खातों से पैसे निकालकर महंगे मोबाइल, गिफ्ट कार्ड, सोना और अन्य सामान खरीदकर सबूत मिटाने की कोशिश करते थे। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण, नकदी और एक लग्जरी एसयूवी बरामद की है।

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 मोबाइल पर आया एक साधारण-सा संदेश—"आपका IGL गैस कनेक्शन बंद होने वाला है।" संदेश पढ़ने वाले व्यक्ति को लगा कि यह गैस सेवा से जुड़ी सामान्य सूचना है। लेकिन जैसे ही उसने दिए गए नंबर पर संपर्क किया और भेजी गई APK फाइल अपने मोबाइल में इंस्टॉल की, उसके बैंक खाते और क्रेडिट कार्ड पर साइबर अपराधियों का पूरा नियंत्रण हो गया।

यहीं से शुरू हुई दिल्ली पुलिस की उस जांच की कहानी, जिसने दिल्ली से लेकर कोलकाता और झारखंड तक फैले एक संगठित साइबर अपराध सिंडिकेट का पर्दाफाश कर दिया।

दक्षिण-पश्चिम जिला साइबर थाना पुलिस ने इस मामले में चार प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से 20 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, एक टैबलेट, सोने-चांदी के आभूषण, नकदी और एक टाटा हैरियर एसयूवी बरामद की है।

फर्जी गैस डिस्कनेक्शन मैसेज बनता था जाल

पुलिस के अनुसार मामला ई-एफआईआर संख्या 53/25 के तहत दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता महिला ने बताया कि उसे एक मोबाइल नंबर से संदेश मिला कि उसका IGL गैस कनेक्शन बंद किया जा रहा है और सहायता के लिए दूसरे नंबर पर संपर्क करने को कहा गया।

जैसे ही महिला ने उस नंबर पर कॉल किया, जालसाजों ने उसे एक APK फाइल भेजी और उसे इंस्टॉल करने के लिए कहा। फाइल इंस्टॉल होते ही साइबर अपराधियों ने उसके मोबाइल और बैंकिंग सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच बना ली।


कुछ ही मिनटों में महिला के बैंक खाते और क्रेडिट कार्ड से करीब 2.64 लाख रुपये निकाल लिए गए।

पैसे सीधे बैंक में नहीं, महंगे सामान में बदल दिए जाते थे

जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि आरोपी सीधे नकदी निकालने के बजाय चोरी किए गए पैसों से ऑनलाइन महंगे मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, गिफ्ट कार्ड, सोने के सिक्के और अन्य कीमती सामान खरीदते थे।

इस तरीके से वे अपराध की कमाई को इलेक्ट्रॉनिक सामान और चल-अचल संपत्ति में बदलकर जांच एजेंसियों से बचने की कोशिश करते थे।

तकनीकी जांच ने खोले कई राज

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएचओ साइबर थाना दक्षिण-पश्चिम इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक के नेतृत्व में तथा एसीपी संगमित्रा की निगरानी में विशेष जांच टीम गठित की गई। टीम में एसआई जगदीप नारा, एचसी विकास, विनोद कुमार, हरेंद्र, प्रवीण और महिला एचसी रीना शामिल थीं।

जांच के दौरान पता चला कि पीड़िता के क्रेडिट कार्ड से दो महंगे मोबाइल फोन खरीदे गए थे। डिलीवरी रिकॉर्ड की जांच करने पर पता चला कि सामान दिल्ली के शाहीन बाग स्थित एक फर्जी पते पर मंगाया गया था।

दिल्ली से मिला पहला सुराग

तकनीकी विश्लेषण के दौरान पुलिस ने उस स्थान के आसपास सक्रिय एक संदिग्ध मोबाइल नंबर की पहचान की। जांच करते हुए पुलिस शाहीन बाग स्थित एक दुकान तक पहुंची, जहां काम करने वाले एक सेल्समैन को हिरासत में लिया गया।

पूछताछ में उसने खुलासा किया कि वह साइबर अपराधियों के कहने पर उनके लिए पार्सल रिसीव करता था और बाद में उन्हें कोलकाता भेज देता था। इसके बदले उसे कमीशन मिलता था।

उसके पास से ऑनलाइन मंगाए गए सोने के सिक्के भी बरामद किए गए।


कोलकाता और झारखंड तक फैला था नेटवर्क

इसके बाद पुलिस की जांच पश्चिम बंगाल पहुंची। कोलकाता के खिदिरपुर हब पर एक संदिग्ध पार्सल की निगरानी की गई, जहां मोहम्मद साहिल को पार्सल लेते समय गिरफ्तार किया गया।

पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मोहम्मद रहीम की भूमिका सामने आई। वह साइबर ठगी से खरीदे गए नए मोबाइल फोन कम कीमत पर खरीदकर अवैध चैनलों और विदेशी संपर्कों के माध्यम से आगे बेचता था, ताकि उनकी ट्रेसिंग न हो सके।

इसके बाद जांच झारखंड के देवघर पहुंची, जहां से मोहम्मद मोहसिन और मोहम्मद दिलशाद को गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपी ठगी से खरीदे गए इलेक्ट्रॉनिक सामान को ठिकाने लगाने और अपराध से अर्जित धन के प्रबंधन का काम करते थे।

ऐसे चलता था पूरा साइबर सिंडिकेट

पुलिस जांच में इस संगठित गिरोह की चार स्तरों वाली संरचना सामने आई—

पहली टीम: लोगों को गैस कनेक्शन बंद होने जैसे फर्जी संदेश भेजकर APK लिंक इंस्टॉल करवाती थी।

दूसरी टीम: मोबाइल पर नियंत्रण हासिल कर बैंक खातों और क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन लेनदेन करती थी।

तीसरी टीम: अलग-अलग शहरों में फर्जी नाम और पते पर मंगाए गए सामान को रिसीव करती थी।

चौथी टीम: चोरी के पैसों से खरीदे गए मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य सामान को अवैध नेटवर्क के जरिए बेचकर अपराध की कमाई को वैध रूप देने की कोशिश करती थी।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से—

  • 20 मोबाइल फोन (13 संचार में प्रयुक्त तथा 7 ठगी की रकम से खरीदे गए)
  • एक लैपटॉप
  • एक टैबलेट
  • एक टाटा हैरियर कार
  • सोने के सिक्के एवं अन्य स्वर्ण आभूषण
  • एक चांदी का सिक्का
  • ₹61,900 नकद
  • अन्य मूल्यवान इलेक्ट्रॉनिक सामान

बरामद किया है।

पुलिस की अपील—APK फाइल कभी डाउनलोड न करें

दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी बैंक, गैस कंपनी, बिजली विभाग या सरकारी संस्था द्वारा भेजे गए संदिग्ध संदेशों पर बिना पुष्टि किए विश्वास न करें।

विशेष रूप से किसी अज्ञात नंबर से प्राप्त APK फाइल या ऐप को कभी डाउनलोड या इंस्टॉल न करें, क्योंकि यही साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस इस अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है। संभावना जताई जा रही है कि गिरोह ने देशभर में कई लोगों को इसी तरीके से निशाना बनाया है।

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