नई दिल्ली स्थित एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 'संविधान हत्या दिवस' कार्यक्रम में दिल्ली भाजपा ने 1975 के आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और वरिष्ठ नेता सत्यनारायण जाटिया ने कांग्रेस पर तीखे राजनीतिक हमले करते हुए आपातकाल को लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला बताया।
देश में आपातकाल लागू होने के 51 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दिल्ली भाजपा ने शुक्रवार को राजधानी के एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में एक विशेष संगोष्ठी आयोजित की। इस कार्यक्रम में वर्ष 1975 के आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले अनेक लोकतंत्र सेनानियों का सार्वजनिक सम्मान किया गया। कार्यक्रम केवल सम्मान समारोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह कांग्रेस और भाजपा के बीच लोकतंत्र, संविधान और आपातकाल की विरासत को लेकर राजनीतिक विमर्श का बड़ा मंच भी बन गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता दिल्ली भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने की। मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता उपस्थित रहीं, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने संबोधित किया। लोकतंत्र सेनानी एवं भाजपा संसदीय दल के सदस्य सत्यनारायण जाटिया ने भी अपने अनुभव साझा किए।
लोकतंत्र सेनानियों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानियों ओ.पी. बब्बर, नंदकिशोर गर्ग, लालबिहारी तिवारी, पी.के. चांदला, सुरेश गुप्ता, रामभज, करण सिंह तंवर, श्रवण कुमार, तिलकराज कटारिया, संजय भाटिया, राजन ढींगरा और जगमल प्रसाद सहित कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर सांसद मनोज तिवारी, रामवीर सिंह बिधूड़ी, सांसद बाँसुरी स्वराज तथा दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद भी उपस्थित रहे।
रेखा गुप्ता बोलीं— 'इतिहास दोहराने की हिम्मत कोई न करे'
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि जिस प्रकार दशहरे पर रावण दहन असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है, उसी प्रकार संविधान हत्या दिवस आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाने का अवसर है कि लोकतंत्र पर दोबारा ऐसा हमला कभी न हो।
उन्होंने कहा कि आज जो लोग संविधान हाथ में लेकर लोकतंत्र बचाने की बातें करते हैं, उन्हें पहले यह बताना चाहिए कि 1975 में लोकतंत्र के साथ क्या हुआ था। उनके अनुसार लोकतंत्र सेनानियों का अपमान करने वालों को इतिहास का सही ज्ञान होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने जयप्रकाश नारायण और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उल्लेख करते हुए कहा कि जेल की कठिन परिस्थितियों में भी लोकतंत्र की आवाज को दबाया नहीं जा सका। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों ने वर्षों तक यातनाएं झेलीं लेकिन राष्ट्र के प्रति समर्पण नहीं छोड़ा।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों को मजबूत बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

स्मृति ईरानी का कांग्रेस पर तीखा हमला
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि इतिहास स्वयं को दोहराता है, इसलिए युवाओं को आपातकाल का सच जानना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जो दल आज स्वयं को संविधान का सबसे बड़ा रक्षक बताते हैं, उन्हीं के शासनकाल में संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सबसे बड़ा हमला हुआ था।
स्मृति ईरानी ने आरोप लगाया कि आपातकाल के दौरान लाखों लोगों को जेल में डाला गया, बड़े पैमाने पर नसबंदी अभियान चलाया गया और विरोध करने वालों पर कठोर कार्रवाई हुई।
उन्होंने महिलाओं पर हुए अत्याचारों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि आपातकाल के इतिहास में महिलाओं के साथ हुई घटनाओं को पर्याप्त स्थान नहीं मिला। उनके अनुसार यह भी इतिहास का एक ऐसा पक्ष है जिसे नई पीढ़ी के सामने लाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल पुस्तकों से नहीं बल्कि उन लोगों से भी सीखना चाहिए जिन्होंने स्वयं उस दौर की यातनाएं झेली हैं।

हर्ष मल्होत्रा बोले— युवा पीढ़ी को जानना होगा पूरा सच
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि संविधान हत्या दिवस केवल अतीत को याद करने का कार्यक्रम नहीं बल्कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने का संकल्प है।
उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी ने आपातकाल नहीं देखा, इसलिए उसे बताया जाना चाहिए कि उस समय प्रेस की स्वतंत्रता समाप्त कर दी गई थी, विपक्षी नेताओं को जेल भेजा गया था और नागरिक अधिकार सीमित कर दिए गए थे।
उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत स्वतंत्र न्यायपालिका, स्वतंत्र मीडिया, जागरूक नागरिक समाज और जनता की सर्वोच्च शक्ति है। लोकतंत्र में अंतिम निर्णय हमेशा जनता का होता है।
सत्यनारायण जाटिया ने बताया लोकतंत्र का काला अध्याय
लोकतंत्र सेनानी और भाजपा संसदीय दल के सदस्य सत्यनारायण जाटिया ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय था।
उन्होंने कहा कि सत्ता के अहंकार में संविधान की मर्यादाओं को कुचला गया, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए गए और हजारों लोगों को जेलों में बंद कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा केवल संविधान की धाराओं से नहीं बल्कि जागरूक नागरिकों और संघर्षशील लोकतंत्र सेनानियों के साहस से होती है।
युवाओं को इतिहास से जोड़ने पर रहा विशेष जोर
कार्यक्रम का प्रमुख संदेश यही रहा कि नई पीढ़ी को आपातकाल के घटनाक्रम, लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष और संवैधानिक मूल्यों की जानकारी दी जाए ताकि भविष्य में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर किसी भी प्रकार का संकट आने पर समाज सजग रह सके।
राजनीतिक संदेश भी रहा स्पष्ट
पूरे कार्यक्रम में भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर तीखे राजनीतिक आरोप लगाए और आपातकाल को कांग्रेस शासन की सबसे बड़ी ऐतिहासिक भूल बताया। वहीं कांग्रेस का पक्ष इस कार्यक्रम में मौजूद नहीं था। इसलिए कार्यक्रम में व्यक्त किए गए आरोप भाजपा नेताओं के राजनीतिक वक्तव्यों के रूप में सामने आए।
लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान के साथ समाप्त हुए इस कार्यक्रम ने एक बार फिर आपातकाल की ऐतिहासिक बहस को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ला दिया। आगामी समय में भी इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी जारी रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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