कोलकाता के तारातला इलाके में निर्माणाधीन 20 हजार वर्गफुट का विशाल गोदाम अचानक ढह गया। हादसे के समय वहां 50 से 60 मजदूर काम कर रहे थे। भारी कंक्रीट और लोहे के बीमों के नीचे कई मजदूरों के दबे होने की आशंका है। सेना, NDRF, दमकल विभाग और पुलिस की टीमें लगातार बचाव अभियान चला रही हैं। अब तक 14 लोगों को बाहर निकाला जा चुका है जबकि मलबे के नीचे से अभी भी लोगों की आवाजें सुनाई देने की बात सामने आ रही है।
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला इलाके में बुधवार दोपहर अचानक एक ऐसा हादसा हुआ जिसने पूरे शहर को सदमे में डाल दिया। निर्माणाधीन एक विशाल गोदाम की छत और संरचना अचानक भरभराकर गिर गई। कुछ ही सेकंड में लगभग 20 हजार वर्गफुट में फैला ढांचा मलबे के विशाल पहाड़ में बदल गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा इतना भयानक था कि आसपास के कई इलाकों में धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। मौके पर मौजूद लोगों को पहले लगा कि कोई बड़ा विस्फोट हुआ है, लेकिन जब धूल का गुबार छंटा तो सामने दर्दनाक मंजर दिखाई दिया।
हादसे के समय गोदाम के भीतर बड़ी संख्या में मजदूर निर्माण कार्य में लगे हुए थे। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार 50 से 60 मजदूर अंदर मौजूद थे।

मलबे के नीचे दबे लोगों की आवाजें लगातार सुनाई देने की खबर ने राहतकर्मियों की चुनौती और बढ़ा दी है। कई मजदूर लोहे के भारी बीम, कंक्रीट के स्लैब और निर्माण सामग्री के बीच फंसे हुए हैं।
बचाव दलों ने बताया कि कुछ स्थानों पर छोटे छेद बनाकर अंदर हवा पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि फंसे लोगों को ऑक्सीजन मिल सके।
हादसे की गंभीरता को देखते हुए राज्य प्रशासन ने तत्काल सेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) को मौके पर तैनात कर दिया।
विशाल क्रेन, हाइड्रोलिक ड्रिलिंग मशीनें, गैस कटर और आधुनिक उपकरणों की मदद से मलबा हटाने का काम जारी है। राहतकर्मी बेहद सावधानी से काम कर रहे हैं ताकि मलबे के नीचे दबे लोगों को अतिरिक्त नुकसान न पहुंचे।
रात होते ही पूरे क्षेत्र को फ्लड लाइट्स से रोशन कर दिया गया और बचाव अभियान बिना रुके जारी रखा गया।

अब तक 14 मजदूर निकाले गए
बचाव दलों ने अब तक 14 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की है। सभी घायलों को तुरंत कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया।
अस्पताल प्रशासन ने आपातकालीन व्यवस्था लागू कर दी है। डॉक्टरों की विशेष टीम घायलों के उपचार में लगी हुई है। कुछ लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
ड्रोन और स्निफर डॉग्स की मदद
मलबे के नीचे फंसे लोगों की सही स्थिति का पता लगाने के लिए ड्रोन तकनीक और स्निफर डॉग्स का सहारा लिया जा रहा है।
राहतकर्मियों का कहना है कि भारी कंक्रीट और लोहे की संरचनाओं के कारण बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण है, लेकिन हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
सरकार ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
हादसे के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने विशेष नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है।
परिजन और आम नागरिक निम्न हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:
- 1070
- 8697981070
- 033-22143526
- 033-22535185
राज्य सरकार ने कहा है कि राहत और बचाव कार्य में किसी प्रकार की कमी नहीं छोड़ी जाएगी।

क्या पहले से मिल रहे थे चेतावनी संकेत?
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि निर्माणाधीन ढांचे में पहले से तकनीकी समस्याएं दिखाई दे रही थीं। कुछ मजदूरों ने कथित तौर पर ढांचे में कंपन और असामान्य हलचल की शिकायत भी की थी।
हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि जांच में यह सही पाया जाता है तो मामला केवल दुर्घटना नहीं बल्कि गंभीर लापरवाही का भी हो सकता है।
डेढ़ साल से चल रहा था निर्माण
सूत्रों के अनुसार यह गोदाम पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से निर्माणाधीन था। बताया जा रहा है कि यह जमीन पोर्ट ट्रस्ट से संबंधित है, जिसे एक निजी कंपनी को उपयोग के लिए दिया गया था।
अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या निर्माण कार्य के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था? क्या संरचना की गुणवत्ता की नियमित जांच की गई थी? और क्या मजदूरों की सुरक्षा को पर्याप्त महत्व दिया गया था?

जांच के आदेश, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तैयारी
राज्य सरकार ने घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। विशेषज्ञों की टीम यह पता लगाएगी कि गोदाम की संरचना आखिर क्यों ढह गई।
जांच में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, इंजीनियरिंग डिजाइन, सुरक्षा मानकों और निर्माण एजेंसी की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।
यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
परिवारों का दर्द सबसे बड़ा
घटनास्थल के बाहर सबसे दर्दनाक दृश्य उन परिवारों का है जो अपने प्रियजनों के सुरक्षित बाहर आने की उम्मीद में घंटों से इंतजार कर रहे हैं।
हर एम्बुलेंस के पहुंचने पर लोगों की निगाहें उसी ओर टिक जाती हैं। कोई अपने बेटे की तलाश में है, कोई पति की, तो कोई पिता के बारे में जानकारी पाने की कोशिश कर रहा है।
पूरा तारातला इलाका इस समय चिंता, भय और उम्मीद के बीच झूल रहा है।
यह हादसा केवल एक इमारत के गिरने की घटना नहीं है, बल्कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों और मजदूरों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल भी है। फिलहाल देशभर की निगाहें तारातला पर टिकी हैं और हर कोई यही दुआ कर रहा है कि मलबे के नीचे फंसी हर जिंदगी सुरक्षित बाहर निकल आए।
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