सेक्टर ओमेगा-1, ग्रेटर नोएडा में सहकारी समिति और RWA/AOA के बीच विवाद गहराया। मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित, प्राधिकरण और डिप्टी रजिस्ट्रार की कार्यशैली पर सवाल।
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर ओमेगा-1 स्थित पावर ऑफिसर्स सहकारी आवास समिति लिमिटेड और कथित आरडब्ल्यूए/एओए के बीच विवाद गहरा गया है। बुधवार को नोएडा मीडिया क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में समिति के अध्यक्ष अजय कुमार बाना और अन्य पदाधिकारियों ने गंभीर आरोप लगाए।
समिति का दावा है कि वर्ष 2020 में कुछ विला निवासियों को दिग्भ्रमित कर तत्कालीन कथित सचिव राजबीर सिंह द्वारा तथ्यों को छिपाते हुए और कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से “डिवाइन ग्रेस विला रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन” का पंजीकरण डिप्टी रजिस्ट्रार, चिट्स, फंड्स एंड सोसाइटीज, मेरठ-गाजियाबाद से करा लिया गया। बाद में दिसंबर 2025 में इसका नाम बदलकर “डिवाइन ग्रेस विला अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन” कर दिया गया।

अजय कुमार बाना के अनुसार, समिति की उपविधियों में किसी भी आरडब्ल्यूए या एओए गठन का प्रावधान नहीं है, फिर भी समानांतर संस्था बनाई गई। आवास एवं विकास परिषद, लखनऊ के आदेशों के अनुपालन में समिति ने आरडब्ल्यूए निरस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कराई, जिस पर डिप्टी रजिस्ट्रार ने कारण बताओ नोटिस जारी किया।
हालांकि, आरडब्ल्यूए ने जवाब देने के बजाय 2022 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिट याचिका संख्या 14274/2022 दाखिल कर दी। न्यायालय ने निरस्तीकरण कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है और मामला वर्तमान में लंबित है।

समिति ने यह भी आरोप लगाया कि ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी एन.के. सिंह ने अनुरक्षण कार्य आरडब्ल्यूए को हस्तांतरित करने के तीन आदेश जारी किए, जिनका समिति ने विधिसम्मत जवाब दिया।
साथ ही डिप्टी रजिस्ट्रार, गाजियाबाद पर उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कर नाम परिवर्तन करने का आरोप भी लगाया गया है। समिति ने शासन के उच्चाधिकारियों से अविधिक निर्णयों पर रोक लगाने की मांग की है।
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