ग्रेटर नोएडा में STF ने SSC ऑनलाइन परीक्षा में धांधली करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। गिरोह प्रति अभ्यर्थी 4 लाख रुपये लेकर प्रॉक्सी सॉल्वर और स्क्रीन शेयरिंग तकनीक से परीक्षा पास कराने का खेल चला रहा था।
ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क क्षेत्र में स्थित बालाजी डिजिटल जोन सेंटर पर उस समय हड़कंप मच गया जब उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (Uttar Pradesh STF) ने एक संगठित परीक्षा माफिया का पर्दाफाश करते हुए 7 लोगों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई 22 मई 2026 को उस समय की गई जब कर्मचारी चयन आयोग (Staff Selection Commission) द्वारा आयोजित ऑनलाइन परीक्षा चल रही थी।
यह परीक्षा SSC की कांस्टेबल (GD) सीपीएफ और एसएसएफ तथा असम राइफल राइफलमैन भर्ती 2026 से जुड़ी थी, जिसे Eduquity कंपनी के तकनीकी सहयोग से विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर आयोजित किया जा रहा था। लेकिन इसी व्यवस्था के बीच एक संगठित गिरोह परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाकर अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूल रहा था।
चार लाख रुपये में “फिक्स पास” का खेल
जांच में सामने आया कि यह गिरोह प्रत्येक अभ्यर्थी से लगभग 4 लाख रुपये की मोटी रकम वसूलता था। इसमें से 50 हजार रुपये उस व्यक्ति को दिए जाते थे जो अभ्यर्थी को परीक्षा तक पहुंचाता था, जबकि बाकी 3.5 लाख रुपये गिरोह के सदस्यों और सेंटर से जुड़े लोगों के बीच बांटे जाते थे।
यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था, जिसमें परीक्षा केंद्र के कुछ कर्मचारी भी शामिल बताए जा रहे हैं।
हाईटेक तरीके से चल रहा था नकल का नेटवर्क
STF की जांच में यह खुलासा हुआ कि गिरोह परीक्षा में नकल कराने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा था। आरोपी परीक्षा केंद्र के सिस्टम में प्रॉक्सी सर्वर लगाकर कंपनी के सर्वर को बायपास कर देते थे।
इसके बाद बाहर बैठे सॉल्वर स्क्रीन शेयरिंग एप्लीकेशन के जरिए प्रश्नपत्र देखते और तुरंत उत्तर हल करके अभ्यर्थी के कंप्यूटर पर भेज देते थे। इस पूरी प्रक्रिया में किसी को शक न हो, इसके लिए अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर और रिमोट एक्सेस तकनीक का उपयोग किया जा रहा था।
7 आरोपी गिरफ्तार, बड़े नाम शामिल
गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य सरगना प्रदीप चौहान के अलावा अरुण कुमार, संदीप भाटी, निशांत राघव, अमित राणा, शाकिर मलिक और विवेक कुमार शामिल हैं।
इनमें से शाकिर मलिक और विवेक कुमार खुद अभ्यर्थी के रूप में परीक्षा दे रहे थे, लेकिन वे इस पूरे गिरोह के लिए प्रॉक्सी सिस्टम का हिस्सा बने हुए थे।
बरामद हुआ भारी कैश और उपकरण
छापेमारी के दौरान STF ने आरोपियों के पास से लगभग 50 लाख रुपये नकद, 10 मोबाइल फोन, 5 लैपटॉप, एक राउटर, कई अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र और उनकी सूची बरामद की। इसके अलावा Eduquity कंपनी के 4 एंट्री और पहचान पत्र भी जब्त किए गए।
यह बरामदगी इस बात का संकेत देती है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और कई परीक्षाओं में धांधली कर चुका था।
पूरे रैकेट का संचालन कैसे होता था
पूछताछ में सामने आया कि मुख्य आरोपी प्रदीप चौहान पिछले कई वर्षों से परीक्षा केंद्रों से जुड़ा हुआ था। उसकी मुलाकात बागपत के अमित राणा से हुई, जिसके बाद दोनों ने मिलकर इस नेटवर्क को बड़ा रूप दिया।
प्रदीप चौहान सेंटर संचालन में भूमिका निभाता था, जबकि अमित राणा और अन्य सदस्य तकनीकी सेटअप और सॉल्वर नेटवर्क संभालते थे। कुछ लोग अभ्यर्थियों को जोड़ने का काम करते थे, जबकि कुछ पैसे का लेन-देन संभालते थे।
पुलिस और STF की बड़ी कार्रवाई
Uttar Pradesh STF ने स्थानीय सूचना के आधार पर अचानक छापा मारा और पूरे गिरोह को रंगे हाथों पकड़ लिया। कार्रवाई के समय सभी आरोपी परीक्षा केंद्र पर ही मौजूद थे।
इस पूरे मामले में थाना नॉलेज पार्क में गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है और आगे की जांच जारी है।
अभ्यर्थियों पर भी गिरेगी गाज
STF ने संकेत दिए हैं कि इस पूरे रैकेट में शामिल अभ्यर्थियों की भी जांच होगी। यदि किसी ने गैरकानूनी तरीके से परीक्षा पास करने की कोशिश की है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जांच का दायरा बढ़ा
अब STF यह भी जांच कर रही है कि यह गिरोह किन-किन अन्य परीक्षाओं में सक्रिय था और कितने अभ्यर्थियों को अब तक इस तरह से पास कराया गया है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
ग्रेटर नोएडा का यह मामला सिर्फ एक परीक्षा घोटाला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को चुनौती देने वाला एक संगठित नेटवर्क है, जिसने तकनीक का दुरुपयोग कर भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। STF की यह कार्रवाई जहां एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, वहीं यह भी साफ करती है कि परीक्षा माफिया कितने आधुनिक और संगठित तरीके से काम कर रहे हैं।
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