मिडिल ईस्ट में बढ़ता सैन्य टकराव अब खुली जंग की शक्ल लेता दिखाई दे रहा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुआ संघर्ष तेजी से क्षेत्रीय सीमाओं को पार कर रहा है। पहले ही 24 घंटों में अमेरिका ने दावा किया है कि उसने ईरान के 1000 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में मिसाइल लॉन्च साइट्स, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े ठिकाने शामिल बताए गए हैं।
United States Central Command के अनुसार इस बड़े ऑपरेशन में स्टेल्थ बॉम्बर, ड्रोन, अत्याधुनिक फाइटर जेट और एंटी-मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। हमले कई चरणों में किए गए ताकि ईरान की जवाबी सैन्य क्षमता को कमजोर किया जा सके और उसकी कमान संरचना को झटका दिया जा सके।
दूसरी ओर Israel ने भी तेहरान सहित कई रणनीतिक शहरों पर नई एयरस्ट्राइक करने का दावा किया है। इजरायल का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए “प्री-एम्प्टिव एक्शन” ले रहा है। जवाब में ईरान समर्थित संगठन Hezbollah ने लेबनान की ओर से इजरायल के हाइफा शहर की दिशा में रॉकेट दागे। इसके बाद इजरायल ने लेबनान में कई ठिकानों पर जोरदार पलटवार किया।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इजरायली हमलों में अब तक कम से कम 31 लोगों की मौत हो चुकी है और 149 लोग घायल हुए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार कई रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया, जिससे नागरिकों में दहशत फैल गई है। मिडिल ईस्ट में यह संघर्ष अब स्पष्ट रूप से बहु-देशीय आयाम ले चुका है।
कुवैत से भी चिंताजनक तस्वीर सामने आई, जहां अमेरिकी दूतावास के ऊपर धुआं उठता देखा गया। हालांकि आधिकारिक रूप से नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पूरे इलाके में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है। खाड़ी देशों में हाई अलर्ट घोषित है।
Gulf Cooperation Council के सदस्य देशों—यूएई, सऊदी अरब, कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान—ने आपात बैठक बुलाई। संयुक्त बयान में इन देशों ने कहा कि नागरिक इलाकों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और क्षेत्र की सुरक्षा खतरे में डालने वाली कार्रवाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर सामूहिक सुरक्षा उपायों को और मजबूत किया जाएगा।
Donald Trump ने इस पूरे ऑपरेशन को “वैश्विक सुरक्षा के लिए आवश्यक” बताया है। उन्होंने स्वीकार किया कि अब तक तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और आगे भी सैनिकों की जान जा सकती है। ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका पीछे हटने के मूड में नहीं है और कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक उसके रणनीतिक लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते।
तनाव साइप्रस तक पहुंच चुका है, जहां ब्रिटेन के अक्रोतिरि एयरबेस पर ड्रोन हमले की सूचना मिली है। दुबई एयरपोर्ट पर खतरे का सायरन बजते ही कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। कई खाड़ी देशों ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए हैं।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हिज्बुल्लाह के संसदीय गुट के प्रमुख मोहम्मद राद को टारगेटेड हमले में मार दिया गया है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है। इसी बीच एक अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान सैन्य ऑपरेशन के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, लेकिन पायलट सुरक्षित इजेक्ट करने में सफल रहा। यह स्पष्ट नहीं है कि हादसा तकनीकी खराबी से हुआ या किसी हमले के कारण।
Ali Larijani ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान अमेरिका से किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं करेगा। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में वार्ता की कोई गुंजाइश नहीं है और ईरान अपने हितों की रक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई जारी रखेगा।
वहीं अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि यदि Ali Khamenei की मौत भी होती है तो तत्काल सत्ता परिवर्तन की संभावना कम है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड का नेटवर्क बेहद मजबूत है और सेना में किसी बड़े विद्रोह के संकेत नहीं हैं।
इस संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट में लड़ाई लंबी चली तो तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ेगी और कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित होंगी।
मिडिल ईस्ट की यह आग अब सीमाओं से बाहर फैलती दिख रही है। कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं और सैन्य कार्रवाई तेज हो रही है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह टकराव यहीं थमेगा या आने वाले दिनों में एक व्यापक क्षेत्रीय या वैश्विक युद्ध का रूप ले लेगा।


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