नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में भाजपा सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने महिला आरक्षण विधेयक के पारित न होने को लोकतंत्र के लिए काला अध्याय बताया और विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए।
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर देश की राजनीति में तीखा विवाद उभर आया है। चाँदनी चौक से भाजपा सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस विधेयक के संसद में पारित न होने को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का “काला अध्याय” करार देते हुए कांग्रेस और पूरे विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए।
नई दिल्ली में आयोजित इस पत्रकार वार्ता में चांदनी चौक भाजपा के जिलाध्यक्ष अरविंद गर्ग और केशवपुरम भाजपा के जिलाध्यक्ष अजय खटाना भी मौजूद रहे। इस दौरान खंडेलवाल ने सीधे तौर पर राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सुनियोजित तरीके से इस ऐतिहासिक विधेयक को गिराने का काम किया।
खंडेलवाल ने कहा कि यह केवल एक विधेयक की हार नहीं है, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं के अधिकारों, सम्मान और भविष्य के साथ किया गया “घोर विश्वासघात” है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी सहित पूरे विपक्ष ने मिलकर इस बिल को पारित होने से रोकने की साजिश रची।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने व्यक्तिगत और राजनीतिक स्वार्थों के चलते इस विधेयक का विरोध किया और महिलाओं के सशक्तिकरण के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आए। उनके अनुसार, यह रवैया न केवल नेतृत्व की विफलता को दर्शाता है, बल्कि महिला सम्मान के प्रति असंवेदनशीलता को भी उजागर करता है।
खंडेलवाल ने संसद के भीतर हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह राहुल गांधी ने सदन में मेज ठोककर इस विधेयक के विरोध का आक्रामक प्रदर्शन किया और उसके बाद विपक्षी दलों द्वारा बिल के गिरने का जश्न मनाया गया, वह बेहद निंदनीय और लोकतंत्र के मूल्यों का अपमान है। उन्होंने इसे “लोकतांत्रिक परंपराओं का खुला मजाक” बताया।

उन्होंने आगे कहा कि जिस लोकसभा में राहुल गांधी ने महिला आरक्षण बिल को गिराने का दुस्साहस किया, वही सदन भविष्य में इस ऐतिहासिक गलती को सुधारेगा और महिलाओं को उनका अधिकार देकर नया इतिहास रचेगा।
खंडेलवाल ने एक और बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए कहा कि अगर यह विधेयक पारित हो जाता, तो कांग्रेस के भीतर प्रियंका गांधी एक सशक्त और प्रभावशाली नेता के रूप में उभर सकती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि शायद इसी राजनीतिक आशंका के कारण राहुल गांधी ने इस बिल का विरोध किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लाई गई इस पहल को विफल करना “महापाप” के समान है। उनके अनुसार, विपक्ष ने अपने संकीर्ण राजनीतिक हितों के कारण देश की महिलाओं के सपनों को कुचलने का काम किया है।
खंडेलवाल ने कांग्रेस के इतिहास पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी ने हमेशा महिलाओं को केवल “वोट बैंक” के रूप में देखा है। दशकों तक इस महत्वपूर्ण मुद्दे को टालना और जब इसे लागू करने का अवसर आया, तब उसका विरोध करना—यह कांग्रेस की दोहरी नीति और अवसरवादी राजनीति को दर्शाता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व का विषय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय, समान अवसर और राष्ट्र के समग्र विकास का आधार है। इसे रोकना देश की प्रगति को रोकने जैसा है।
अपने संबोधन के अंत में खंडेलवाल ने कहा कि यह संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है। देश की महिलाएं और जागरूक नागरिक इस “विश्वासघात” का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देंगे और उन सभी को जवाबदेह ठहराएंगे जिन्होंने उनके अधिकारों को कुचलने का प्रयास किया।
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर यह विवाद आने वाले समय में और गहराने की संभावना है, क्योंकि यह मुद्दा सीधे तौर पर देश की आधी आबादी के प्रतिनिधित्व और अधिकारों से जुड़ा हुआ है। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर यह भी संकेत देता है कि आने वाले चुनावों में महिला मतदाता एक निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।
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