देशभर में आज मेडिकल स्टोरों की हड़ताल और दिल्ली-NCR में ट्रांसपोर्ट यूनियनों की तीन दिवसीय स्ट्राइक का असर दिखने लगा है। AIOCD ई-फार्मेसी नियमों के विरोध में उतरा है, जबकि ड्राइवर यूनियन महंगे ईंधन, बढ़े पर्यावरण शुल्क और Ola-Uber जैसी कंपनियों की कथित मनमानी के खिलाफ आंदोलन कर रही हैं। इससे दवा सप्लाई, टैक्सी सेवा और माल ढुलाई प्रभावित हो सकती है।
देशभर में आज दो बड़े आंदोलनों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर मेडिकल स्टोर और केमिस्ट दुकानों की 24 घंटे की राष्ट्रव्यापी हड़ताल जारी है, तो दूसरी तरफ दिल्ली-NCR में ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने 21 से 23 मई तक हड़ताल का ऐलान कर दिया है। इन दोनों आंदोलनों का असर दवा सप्लाई, टैक्सी सेवाओं, माल ढुलाई और आम जनजीवन पर दिखाई देने लगा है।
AIOCD का दावा है कि देशभर में करीब 20 लाख मेडिकल स्टोर इस बंद में शामिल हो सकते हैं। दिल्ली में लगभग 15 हजार मेडिकल स्टोर बंद रहने की संभावना जताई गई है। कई बड़े शहरों—दिल्ली, मुंबई, पटना, जयपुर, लखनऊ, भोपाल और कोलकाता—में सुबह से मेडिकल दुकानों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिलीं। कई जगह सिर्फ इमरजेंसी सेवाओं के लिए चुनिंदा मेडिकल स्टोर ही खुले हैं।
क्या है केमिस्टों का विरोध?
केमिस्ट संगठनों का मुख्य विरोध ई-फार्मेसी और इंस्टेंट मेडिसिन डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ है। संगठन का आरोप है कि ऑनलाइन दवा कंपनियां बिना सख्त नियमों और पर्याप्त निगरानी के काम कर रही हैं। AIOCD का कहना है कि कई प्लेटफॉर्म बिना सही प्रिस्क्रिप्शन जांच के दवाइयां बेच रहे हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

संगठन विशेष रूप से GSR 220(E) और GSR 817(E) नोटिफिकेशन का विरोध कर रहा है। AIOCD के मुताबिक कोविड काल के दौरान होम डिलीवरी के लिए बनाए गए अस्थायी नियमों का इस्तेमाल अब स्थायी व्यापार मॉडल के रूप में किया जा रहा है। उनका कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स “कानूनी धुंधले क्षेत्र” का फायदा उठा रहे हैं।
AIOCD महासचिव राजीव सिंघल ने कहा कि पारंपरिक मेडिकल स्टोरों को सख्त नियमों का पालन करना पड़ता है, जबकि ई-फार्मेसी कंपनियों पर समान नियम लागू नहीं हैं। संगठन ने प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्र सरकार को पत्र भेजकर इस मामले में सख्त कानून बनाने की मांग की है।
मरीजों को हो रही परेशानी
दवा दुकानों की हड़ताल का सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों और नियमित दवाइयों पर निर्भर मरीजों पर पड़ रहा है। अस्पतालों के बाहर स्थित मेडिकल स्टोरों पर भीड़ बढ़ गई है। कई मरीजों को जरूरी दवाइयां लेने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह विवाद जल्द नहीं सुलझा तो दवा सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
दिल्ली-NCR में ट्रांसपोर्ट हड़ताल से बढ़ी चिंता
दूसरी ओर दिल्ली-NCR में ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने 21 से 23 मई तक हड़ताल का ऐलान किया है। AIMTC सहित 68 से ज्यादा ट्रांसपोर्ट संगठनों ने इस आंदोलन में शामिल होने की बात कही है।
यूनियनों का आरोप है कि सरकार द्वारा बढ़ाया गया पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क और BS-IV वाहनों पर प्रस्तावित प्रतिबंध ट्रांसपोर्ट कारोबार को नुकसान पहुंचाएगा। उनका कहना है कि दिल्ली आने वाले सभी कमर्शियल वाहनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।

इस हड़ताल से ट्रक, टैक्सी, प्राइवेट बस और मैक्सी कैब सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। कई इलाकों में माल ढुलाई की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
Ola-Uber और Rapido ड्राइवरों का गुस्सा क्यों फूटा?
Ola, Uber और Rapido जैसी ऐप आधारित कंपनियों के खिलाफ भी ड्राइवर यूनियनों में भारी नाराजगी है। ड्राइवरों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से किराए में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ, जबकि CNG, पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ती गई हैं।
यूनियन नेताओं का आरोप है कि ऐप कंपनियां भारी कमीशन वसूल रही हैं, जिससे ड्राइवरों की आय लगातार घट रही है। कई संगठनों ने इसे “आर्थिक शोषण” करार दिया है।
ड्राइवर यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द किराया संशोधित नहीं किया गया तो आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।
अगले 48 घंटे क्यों अहम?
सूत्रों के अनुसार केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों ही पक्षों से बातचीत का रास्ता तलाश रही हैं। अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में दवा उपलब्धता, सप्लाई चेन और सार्वजनिक परिवहन पर व्यापक असर पड़ सकता है।
केमिस्ट संगठन और ट्रांसपोर्ट यूनियन दोनों ने साफ संकेत दिए हैं कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन लंबा चल सकता है।
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