UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद जेएनयू कैंपस में विरोध तेज हो गया। साबरमती हॉस्टल के बाहर छात्रों ने नारेबाजी की और ब्राह्मणवाद का पुतला दहन किया।
UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में छात्र राजनीति एक बार फिर उबाल पर आ गई है। 29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद गुरुवार शाम जेएनयू कैंपस में विरोध प्रदर्शन देखने को मिला, जहां कुछ छात्र संगठनों ने फैसले के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पुतला दहन किया।
यह प्रदर्शन जेएनयू के साबरमती हॉस्टल के बाहर हुआ, जहां करीब 50 छात्रों का समूह जमा हुआ। प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को “ब्राह्मणवाद और मनुवाद को समर्थन देने वाला” करार दिया और आरोप लगाया कि इस आदेश से विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव रोकने की कोशिश कमजोर हुई है। इस दौरान छात्रों ने जोर-जोर से आपत्तिजनक नारे लगाए और ब्राह्मणवाद के प्रतीक के रूप में बनाए गए पुतले को आग के हवाले कर दिया।

दरअसल, UGC ने हाल ही में नए नियम जारी किए थे, जिनका उद्देश्य विश्वविद्यालय परिसरों में जाति, जेंडर और दिव्यांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना था। इन नियमों के तहत हर विश्वविद्यालय में इक्विटी कमेटी गठित करने का प्रावधान था। UGC का तर्क था कि रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों के बाद यह कदम जरूरी है।
हालांकि, जनरल कैटेगरी के छात्रों और कुछ संगठनों ने इन नियमों पर आपत्ति जताते हुए आशंका जताई थी कि इनका दुरुपयोग हो सकता है।

इसी को आधार बनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नए नियमों की भाषा को “अस्पष्ट” बताते हुए 29 जनवरी 2026 को इन पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि नियमों के गलत इस्तेमाल से समाज में और विभाजन बढ़ सकता है, इसलिए फिलहाल 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे।
इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को होगी। तब तक देशभर के विश्वविद्यालय परिसरों में इस फैसले को लेकर बहस और विरोध जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं।
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