ग्रेटर नोएडा के नालंदा लिविंग हॉस्टल से सामने आए एक वीडियो ने छात्रों की सेहत और हॉस्टल व्यवस्थाओं पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। छात्रों ने खाने में नाखून जैसा पदार्थ मिलने का आरोप लगाया है। लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने से प्रशासन और फूड सेफ्टी विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रेटर नोएडा के नालंदा लिविंग हॉस्टल से सामने आया एक वीडियो अब सिर्फ सोशल मीडिया चर्चा का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की कार्यशैली और संवेदनहीनता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
वीडियो में छात्रों के खाने के अंदर नाखून जैसा पदार्थ दिखाई देने का दावा किया गया है। यह वीडियो हॉस्टल में रहने वाले छात्रों द्वारा रिकॉर्ड कर साझा किया गया, जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया।
छात्रों का कहना है कि वे लगातार खाने की गुणवत्ता को लेकर शिकायत कर रहे हैं, लेकिन हर बार मामला दबा दिया जाता है। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन मिलेगा भी या नहीं?
वीडियो ने बढ़ाई चिंता
सामने आए वीडियो में खाने के अंदर संदिग्ध पदार्थ दिखाई दे रहा है, जिसे छात्र नाखून बता रहे हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद छात्रों और अभिभावकों में चिंता का माहौल है। कई छात्रों ने आरोप लगाया कि यह पहली बार नहीं है जब खाने की गुणवत्ता को लेकर शिकायत हुई हो।
सूत्रों के मुताबिक पिछले एक महीने के भीतर कई बार खाने में गंदगी, मिलावट और खराब गुणवत्ता को लेकर विवाद सामने आए हैं। कुछ छात्रों की तबीयत बिगड़ने तक की बात भी सामने आई है।
“कैमरा ऑन तो सफाई, कैमरा ऑफ तो लापरवाही”
छात्रों का आरोप है कि जब भी शिकायत होती है, विभागीय टीम औपचारिक जांच के लिए पहुंचती जरूर है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं होता।
छात्रों के मुताबिक निरीक्षण के दौरान सब कुछ सामान्य दिखाया जाता है और बाद में फिर वही हालात शुरू हो जाते हैं।
उनका कहना है कि “कैमरा ऑन” रहते हुए साफ-सफाई और नियमों का पालन दिखाया जाता है, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग है।
किसान आबादी क्षेत्र में संचालित हॉस्टल
जानकारी के मुताबिक यह हॉस्टल किसान आबादी क्षेत्र में संचालित हो रहा है।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इलाके में कई हॉस्टल ऐसे हैं जो नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे हैं।
खाने की गुणवत्ता, स्वच्छता, किचन मानक और सुरक्षा नियमों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, लेकिन कार्रवाई सीमित ही नजर आती है।
फूड सेफ्टी विभाग पर सवाल
इस पूरे मामले के बाद सबसे ज्यादा सवाल फूड सेफ्टी विभाग की भूमिका को लेकर उठ रहे हैं।
लोग पूछ रहे हैं कि आखिर विभाग की जिम्मेदारी क्या सिर्फ त्योहारों के दौरान मिठाई की दुकानों पर अभियान चलाने तक सीमित है?
अगर छात्रों की लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती, तो ऐसे हॉस्टल संचालकों के हौसले क्यों नहीं बढ़ेंगे?
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई मामलों में हर बार वही जवाब सामने आता है —
“जांच में सब ठीक मिला।”
अब यही जवाब लोगों के बीच अविश्वास पैदा कर रहा है।
छात्रों की सेहत पर बड़ा सवाल
ग्रेटर नोएडा शिक्षा और छात्र आवास का बड़ा केंद्र बन चुका है। हजारों छात्र देशभर से यहां पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं।
ऐसे में अगर हॉस्टलों में खाने की गुणवत्ता पर ही सवाल उठने लगें, तो यह बेहद गंभीर विषय बन जाता है।
अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को सुरक्षित माहौल और बेहतर सुविधाओं की उम्मीद के साथ यहां भेजते हैं, लेकिन बार-बार सामने आ रही ऐसी घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं।
कार्रवाई की मांग तेज
अब छात्रों और स्थानीय लोगों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण, जिला प्रशासन और फूड सेफ्टी विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
लोगों का कहना है कि अगर समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।
फिलहाल वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और पूरे मामले को लेकर प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
COMMENTS