वीडियो वायरल… गुस्से में छात्राएं और खामोश सिस्टम: आखिर ग्रेटर नोएडा के हॉस्टलों में क्या छिपाया जा रहा है?”
Greater Noida एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला नॉलेज पार्क क्षेत्र में स्थित Raksha Hostel का है, जहां छात्राओं का गुस्सा कैमरे पर खुलकर सामने आया। वायरल वीडियो में छात्राएं साफ तौर पर आरोप लगाती दिखाई दे रही हैं कि उन्हें समय पर खाना नहीं दिया जाता, खाने की गुणवत्ता बेहद खराब है, हॉस्टल में साफ-सफाई की हालत बदतर है और फीस के नाम पर लगातार मानसिक दबाव बनाया जाता है।
वीडियो सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर ग्रेटर नोएडा के हॉस्टलों में चल क्या रहा है? क्या यहां रहने वाले छात्र और छात्राएं सिर्फ फीस भरने का जरिया बनकर रह गए हैं?
यह पहला मामला नहीं है। कुछ ही दिनों पहले Nalanda Living Hostel से जुड़ा विवाद भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। वहां भी छात्रों ने खाने और मूलभूत सुविधाओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। मामला तूल पकड़ता उससे पहले एक दूसरा वीडियो सामने आया और कथित तौर पर छात्रों के बयान बदलते हुए दिखाई दिए। तभी से यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर हर बार छात्रों की आवाज दब क्यों जाती है?
अब रक्षा हॉस्टल का वीडियो सामने आने के बाद पूरे मामले ने फिर से तूल पकड़ लिया है। वीडियो में छात्राओं का गुस्सा सिर्फ खाने तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि उनके चेहरे पर सिस्टम के प्रति अविश्वास भी साफ नजर आता है। कई छात्राएं आरोप लगा रही हैं कि शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती।
सबसे ज्यादा सवाल अब Greater Noida Authority पर उठ रहे हैं। आखिर अथॉरिटी की निगरानी में चल रहे इन हॉस्टलों की नियमित जांच क्यों नहीं होती? क्या इन हॉस्टलों के पास वैध अनुमति है? क्या फायर सेफ्टी, स्वच्छता और फूड सेफ्टी के मानकों की कभी गंभीरता से जांच की गई?

स्थानीय स्तर पर लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि किसान कोटे के 6 प्रतिशत प्लॉटों पर कई हॉस्टल और पीजी नियमों के विपरीत संचालित किए जा रहे हैं। अगर ऐसा है तो आखिर प्रशासन अब तक कार्रवाई क्यों नहीं कर पाया?
मामले में Food Safety and Drug Administration Uttar Pradesh की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। छात्राएं खुले कैमरे पर खाने की गुणवत्ता को लेकर शिकायत कर रही हैं। कहीं अधपका खाना, कहीं गंदगी, तो कहीं बेसिक हाइजीन की कमी की बात सामने आ रही है। इसके बावजूद फूड सेफ्टी विभाग की कोई बड़ी कार्रवाई अब तक सामने नहीं आई।
सवाल यह भी है कि क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? अगर कल को कोई फूड पॉइजनिंग या बड़ा स्वास्थ्य संकट सामने आता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
हॉस्टल प्रबंधन की भूमिका भी कटघरे में है। छात्राओं का आरोप है कि लाखों रुपये फीस लेने के बावजूद उन्हें सम्मानजनक सुविधाएं नहीं मिल रहीं। अगर छात्राएं विरोध करती हैं, तो उन पर दबाव बनाया जाता है। आखिर ऐसा क्यों? क्या छात्रों की आवाज उठाना अब “समस्या” माना जाने लगा है?
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और काउंसलरों की चुप्पी भी कई सवाल खड़े करती है। चुनाव के समय छात्रों और युवाओं की बात करने वाले नेता आखिर अब कहां हैं? क्या उन्हें अपने क्षेत्र के हॉस्टलों की हालत दिखाई नहीं देती?
Greater Noida देशभर के छात्रों के लिए तेजी से एक बड़ा एजुकेशन हब बनता जा रहा है। हजारों छात्र यहां अपने सपनों को लेकर आते हैं। लेकिन अगर हॉस्टलों की हालत ऐसी ही रही, तो यह शहर शिक्षा से ज्यादा अव्यवस्था और लापरवाही के लिए पहचाना जाएगा।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि हर कुछ दिनों में हॉस्टलों से नया विवाद सामने आ जाता है — कहीं खाने को लेकर हंगामा, कहीं सुरक्षा को लेकर डर, तो कहीं साफ-सफाई पर सवाल। लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ जांच और आश्वासन दिखाई देते हैं।
अब सवाल सिर्फ Raksha Hostel का नहीं रह गया है। सवाल पूरे सिस्टम की जवाबदेही का है। आखिर छात्रों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान की जिम्मेदारी कौन लेगा? और सबसे बड़ा सवाल — क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा, या फिर इस बार सच में कोई कार्रवाई होगी?
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