Friday, June 12, 2026

चोरी करने आया था... लेकिन खुद फंस गया! NSD के मंच पर ‘श्रीमान चोर?’ ने हंसी और व्यंग्य से जीता दर्शकों का दिल

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में डारियो फ़ो के विश्वविख्यात नाटक ‘द वर्चुअस बर्गलर’ के हिन्दी रूपांतरण ‘श्रीमान चोर?’ का शानदार मंचन; हास्य, व्यंग्य, रिश्तों की उलझन और सामाजिक पाखंड पर करारा प्रहार।

noida , Latest Updated On - Jun 08 2026 | 13:09:00 PM
विज्ञापन

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली में इन दिनों द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नाटक ‘श्रीमान चोर?’ दर्शकों को खूब पसंद आ रहा है। प्रसिद्ध इतालवी नाटककार डारियो फ़ो की रचना पर आधारित यह प्रस्तुति हास्य और व्यंग्य के माध्यम से मानवीय रिश्तों, वैवाहिक बेवफ़ाई और सामाजिक दिखावे पर तीखी टिप्पणी करती है। इसका अंतिम प्रदर्शन 9 जून 2026 को होगा।

विज्ञापन

नई दिल्ली के मंडी हाउस स्थित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) का अभिमंच सभागार इन दिनों हंसी, व्यंग्य और रंगमंचीय ऊर्जा से सराबोर है। यहां राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी प्रसिद्ध नाटक ‘श्रीमान चोर?’ का मंचन कर रहे हैं, जिसे दर्शकों का जबरदस्त प्रेम और सराहना मिल रही है।

यह नाटक विश्वविख्यात इतालवी नाटककार और नोबेल पुरस्कार से सम्मानित लेखक डारियो फ़ो के चर्चित नाटक ‘द वर्चुअस बर्गलर’ का हिन्दी रूपांतरण है। भारतीय दर्शकों के लिए इसे नए रंग, नई भाषा और नई प्रस्तुति शैली के साथ मंच पर जीवंत रूप दिया गया है।

नाटक का हिन्दी रूपांतरण, संगीत परिकल्पना और निर्देशन रंगकर्मी इश्तियाक ख़ान ने किया है। उनकी रचनात्मक दृष्टि ने इस अंतरराष्ट्रीय नाटक को भारतीय संदर्भों और दर्शकों के अनुरूप रोचक और प्रभावशाली बना दिया है।

एक चोरी... और फिर शुरू होती है गलतफहमियों की तूफानी कहानी

‘श्रीमान चोर?’ की कहानी एक साधारण लेकिन बेहद दिलचस्प स्थिति से शुरू होती है। एक व्यक्ति चोरी करने के इरादे से एक धनी व्यक्ति के घर में प्रवेश करता है। उसकी योजना आसान और सीधी होती है, लेकिन घटनाएं अचानक ऐसे मोड़ लेती हैं कि वह खुद एक ऐसे जाल में फंस जाता है, जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की होती।


कहानी तब और दिलचस्प हो जाती है जब घर का मालिक अपनी प्रेमिका के साथ वहां पहुंच जाता है। इसके बाद उसकी पत्नी, फिर प्रेमिका का पति और अन्य पात्र भी घटनास्थल पर पहुंचने लगते हैं। एक के बाद एक प्रवेश करते पात्र और बढ़ती गलतफहमियां पूरे घर को हास्यास्पद अराजकता में बदल देती हैं।

दर्शकों के लिए यह सिर्फ एक कॉमेडी नहीं बल्कि लगातार बदलती परिस्थितियों और अप्रत्याशित घटनाओं का ऐसा सिलसिला है जो अंत तक रोमांच बनाए रखता है।

हंसी के पीछे छिपे हैं समाज के कई सवाल

पहली नजर में यह नाटक एक मनोरंजक प्रहसन दिखाई देता है, लेकिन इसकी परतें खुलने पर समाज की कई जटिल सच्चाइयां सामने आती हैं।

नाटक वैवाहिक बेवफ़ाई, सामाजिक पाखंड, झूठ, दिखावे और मानवीय रिश्तों की जटिलताओं को बेहद हल्के लेकिन प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत करता है।

दिलचस्प बात यह है कि समाज में सम्मानित और प्रतिष्ठित माने जाने वाले पात्र अपने रहस्यों को छिपाने के लिए लगातार झूठ और बहानों का सहारा लेते दिखाई देते हैं। दूसरी ओर एक साधारण चोर, जो कहानी का सबसे संदिग्ध पात्र माना जाता है, कई बार दूसरों से अधिक ईमानदार और स्पष्टवादी नजर आता है।

यही विरोधाभास नाटक की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरता है।


डारियो फ़ो की रचना का भारतीय रंग

डारियो फ़ो को दुनिया भर में उनके तीखे राजनीतिक और सामाजिक व्यंग्य के लिए जाना जाता है। उनके नाटक अक्सर सत्ता, सामाजिक ढोंग और मानवीय कमजोरियों पर कटाक्ष करते हैं।

‘द वर्चुअस बर्गलर’ भी इसी परंपरा का हिस्सा है। हिन्दी रूपांतरण ‘श्रीमान चोर?’ में मूल रचना की आत्मा को बनाए रखते हुए भारतीय दर्शकों की संवेदनाओं और हास्यबोध के अनुरूप प्रस्तुत किया गया है।

इश्तियाक ख़ान का निर्देशन इस प्रस्तुति को केवल एक अनुवादित नाटक नहीं रहने देता, बल्कि इसे एक स्वतंत्र भारतीय रंगमंचीय अनुभव में बदल देता है।

युवा कलाकारों ने दिखाई रंगमंचीय परिपक्वता

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत यह नाटक इस बात का प्रमाण है कि नई पीढ़ी के रंगकर्मी मंच पर कितनी ऊर्जा, प्रतिबद्धता और अभिनय क्षमता लेकर आ रहे हैं।

नाटक में कलाकारों की संवाद अदायगी, शारीरिक अभिनय, हास्य की टाइमिंग और मंच पर उपस्थिति दर्शकों को लगातार बांधे रखती है।

विशेष रूप से तेज गति से बदलती परिस्थितियों और जटिल हास्य दृश्यों को जिस सहजता से प्रस्तुत किया गया है, वह कलाकारों के प्रशिक्षण और मेहनत को दर्शाता है।


तकनीकी पक्ष भी बना आकर्षण

नाटक की सफलता में इसके तकनीकी पक्ष की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

  • वेशभूषा परिकल्पना: दीपांकर पॉल
  • ध्वनि परिकल्पना: सैंडी सिंह
  • प्रकाश परिकल्पना: दिव्यांग श्रीवास्तव
  • मंच सज्जा: श्रद्धा विश्वास एवं निलोय डे

इन सभी तत्वों ने मिलकर मंच पर ऐसा वातावरण तैयार किया है जो दर्शकों को कहानी के भीतर ले जाता है।

विशेष रूप से प्रकाश और ध्वनि का संयोजन हास्यपूर्ण परिस्थितियों को और प्रभावी बनाने में सफल रहा है।

समकालीन समाज पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी

‘श्रीमान चोर?’ केवल हंसाता नहीं है, बल्कि सोचने पर भी मजबूर करता है। नाटक यह सवाल उठाता है कि क्या वास्तव में समाज में सम्मानित दिखने वाले लोग हमेशा ईमानदार होते हैं? और क्या कभी-कभी सबसे संदिग्ध दिखने वाला व्यक्ति भी सबसे अधिक सच्चा हो सकता है?


इन्हीं प्रश्नों के माध्यम से यह प्रस्तुति समकालीन समाज के नैतिक द्वंद्वों और मानवीय कमजोरियों को उजागर करती है।

9 जून को होगा अंतिम प्रदर्शन

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की सतत रंग गतिविधियों के अंतर्गत प्रस्तुत इस नाटक का अंतिम प्रदर्शन 9 जून 2026 को शाम 7 बजे अभिमंच सभागार, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय परिसर, मंडी हाउस, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।

दर्शकों के लिए प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है। हालांकि सीटों की उपलब्धता के आधार पर ही प्रवेश दिया जाएगा।

ऐसे में रंगमंच प्रेमियों के लिए यह प्रस्तुति देखने का एक शानदार अवसर है, जहां मनोरंजन, हास्य और सामाजिक व्यंग्य का अनोखा संगम देखने को मिलेगा।

‘श्रीमान चोर?’ केवल एक नाटक नहीं, बल्कि हंसी के जरिए समाज को आईना दिखाने वाली एक सशक्त रंगमंचीय प्रस्तुति है, जो दर्शकों को मुस्कुराने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर करती है।

विज्ञापन

NSD Play, ShriMaan Chor, National School of Drama, Dario Fo, The Virtuous Burglar, Theatre News, Hindi Play Delhi, Mandi House Events, Ishtiyaq Khan, NSD Students Performance, Hindi Theatre, Delhi Cultural News, Stage Performance, Comedy Play, Satirical Theatre

Related News

विज्ञापन

Newsletter

For newsletter subscribe us

विज्ञापन
आपकी राय
भारत क्रिकेट टीम के सर्वश्रेष्ठ कप्तान का नाम कौन है?




COMMENTS
All Comments (11)
  • V
    vijaykumar
    vijaykumar@pearlorganisation.com
    25/12/2023
    Lorem ipsum, dolor sit amet consectetur adipisicing elit. Earum autem perferendis ad libero at cumque ipsa labore consequatur inventore eaque
    A
    arif
    arif@pearlorganisation.com
    25/12/2023
    Lorem ipsum, dolor sit amet consectetur adipisicing elit. Earum autem perferendis ad libero at cumque ipsa labore consequatur inventore eaque
    A
    ajaykumar
    ajaykumar@pearlorganisation.com
    25/12/2023
    Lorem ipsum, dolor sit amet consectetur adipisicing elit. Earum autem perferendis ad libero at cumque ipsa labore consequatur inventore eaque
    H
    harshit
    harshit@pearlorganisation.com
    25/12/2023
    very intresting news
    A
    ankitankit
    ankitankit@pearlorganisation.com
    27/12/2023
    Good
    H
    harshit
    harshit@pearlorganisation.com
    29/12/2023
    good news
    R
    rahul+11
    rahul+11@pearlorganisation.com
    15/01/2024
    Nice
    R
    rahul+11
    rahul+11@pearlorganisation.com
    15/01/2024
    Bisarkh police station, during checking at Char Murti intersection, spotted an FZ MOSA carrying two persons towards Surajpur.
    R
    rahul
    rahul@pearlorganisation.com
    02/02/2024
    test
    H
    harshit
    harshit@pearlorganisation.com
    02/02/2024
    अच्छा
    R
    rahul
    rahul@pearlorganisation.com
    08/02/2024
    अच्छा