ग्रेटर नोएडा स्थित गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (जीआईएमएस) में एफएसएसएआई की ‘ईट राइट कैंपस’ पहल के अंतर्गत खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता पर जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में खाद्य विक्रेताओं, भोजनालय संचालकों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। संस्थान ने अगले सप्ताह से सभी खाद्य प्रतिष्ठानों के व्यवस्थित मूल्यांकन का निर्णय भी लिया है।
किसी भी अस्पताल या मेडिकल संस्थान में मरीजों की दवा जितनी महत्वपूर्ण होती है, उतना ही महत्वपूर्ण होता है उन्हें मिलने वाला भोजन। यदि भोजन सुरक्षित, स्वच्छ और पौष्टिक न हो तो स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी सीधा असर पड़ता है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए ग्रेटर नोएडा स्थित गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (जीआईएमएस) ने खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की महत्वाकांक्षी ‘ईट राइट कैंपस’ पहल के अंतर्गत जीआईएमएस के सामुदायिक चिकित्सा विभाग एवं खाद्य सुरक्षा समिति द्वारा “खाद्य सुरक्षा एवं खाद्य स्वच्छता पर जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक प्रशिक्षण नहीं था, बल्कि संस्थान में खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा के नए मानक स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
सुरक्षित भोजन की दिशा में बड़ा कदम
जीआईएमएस प्रशासन का मानना है कि अस्पताल परिसर में आने वाले मरीज, उनके परिजन, छात्र, चिकित्सक और कर्मचारी प्रतिदिन भोजनालयों और कैंटीन सेवाओं पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा विषय भी है।
इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए आयोजित कार्यक्रम को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों (हाइब्रिड मोड) में संचालित किया गया, जिससे अधिक से अधिक लोग इसमें शामिल हो सकें।

कार्यक्रम में संस्थान के सभी खाद्य विक्रेताओं, भोजनालय संचालकों, खाद्य प्रतिष्ठानों के प्रभारी अधिकारियों तथा खाद्य सुरक्षा समिति के सदस्यों ने सक्रिय सहभागिता की।
चिकित्सा अधीक्षक की अध्यक्षता में चल रही पहल
यह पूरी पहल जीआईएमएस के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बृज मोहन की अध्यक्षता वाली खाद्य सुरक्षा समिति के नेतृत्व में संचालित की जा रही है। वहीं संस्थान के निदेशक डॉ. (ब्रिगेडियर) राकेश कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।
संस्थान का उद्देश्य केवल एफएसएसएआई प्रमाणन प्राप्त करना नहीं है, बल्कि परिसर में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता की स्थायी संस्कृति विकसित करना है ताकि हर व्यक्ति को सुरक्षित भोजन उपलब्ध हो सके।
जनस्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा का गहरा संबंध
कार्यक्रम के पहले सत्र में सामुदायिक चिकित्सा विभाग के डॉ. सुप्रकाश मंडल ने खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के महत्व पर विस्तृत चर्चा की।
उन्होंने कहा कि अस्पताल और मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थानों में खाद्य सुरक्षा का महत्व सामान्य स्थानों की तुलना में कहीं अधिक होता है। यहां बड़ी संख्या में मरीज, छात्र और स्वास्थ्यकर्मी प्रतिदिन भोजन सेवाओं का उपयोग करते हैं। यदि भोजन की गुणवत्ता में किसी प्रकार की कमी हो तो यह स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकती है।
डॉ. मंडल ने प्रतिभागियों को एफएसएसएआई की ‘ईट राइट कैंपस’ पहल के उद्देश्यों, इसके निर्धारित मानकों और प्रमाणन प्रक्रिया की भी विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पहल देशभर के संस्थानों में सुरक्षित, संतुलित और स्वच्छ भोजन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है।

खाद्य प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रशिक्षण
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में डॉ. आयशा, जूनियर रेजिडेंट, सामुदायिक चिकित्सा विभाग ने प्रतिभागियों को खाद्य सुरक्षा के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया।
उन्होंने बताया कि भोजन तैयार करने और परोसने की प्रत्येक प्रक्रिया में स्वच्छता का विशेष महत्व होता है। उन्होंने व्यक्तिगत स्वच्छता, खाद्य पदार्थों में संदूषण रोकने के उपाय, सुरक्षित पकाने की तकनीक, उचित भंडारण व्यवस्था, अपशिष्ट प्रबंधन और खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
डॉ. आयशा ने यह भी समझाया कि छोटी-छोटी लापरवाहियां किस प्रकार खाद्य जनित रोगों का कारण बन सकती हैं और इन्हें रोकने के लिए कौन-कौन से उपाय अपनाए जाने चाहिए।
निरीक्षण और मूल्यांकन प्रक्रिया की दी जानकारी
कार्यक्रम के अंतिम सत्र में एमबीबीएस छात्र प्रियांशु ने खाद्य प्रतिष्ठानों के निरीक्षण और मूल्यांकन की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला।
उन्होंने प्रतिभागियों को बताया कि खाद्य सुरक्षा आकलन के दौरान किन-किन मानकों की जांच की जाती है। इसके साथ ही निरीक्षण के दौरान आवश्यक दस्तावेजों, अनुपालन आवश्यकताओं और मूल्यांकन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई।
इस सत्र का उद्देश्य भोजनालय संचालकों और विक्रेताओं को पहले से तैयार करना था ताकि वे निर्धारित मानकों का बेहतर तरीके से पालन कर सकें।
संवाद और सुझावों से मिला व्यावहारिक समाधान
कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि इसे केवल व्याख्यान तक सीमित नहीं रखा गया।
खाद्य विक्रेताओं और संचालकों ने अपने अनुभव साझा किए तथा रोजमर्रा के संचालन में आने वाली चुनौतियों को विशेषज्ञों के सामने रखा। विभिन्न परिस्थितियों और समस्याओं पर खुलकर चर्चा हुई।

विशेषज्ञों ने इन चुनौतियों के समाधान सुझाए और प्रतिभागियों को व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया। इससे कार्यक्रम अधिक प्रभावी और उपयोगी साबित हुआ।
अगले सप्ताह से शुरू होगा बड़ा मूल्यांकन अभियान
कार्यक्रम के दौरान एक महत्वपूर्ण निर्णय भी लिया गया।
जीआईएमएस प्रशासन ने घोषणा की कि संस्थान परिसर में संचालित सभी भोजनालयों और खाद्य प्रतिष्ठानों का व्यवस्थित मूल्यांकन अगले सप्ताह से शुरू किया जाएगा।
इस मूल्यांकन का उद्देश्य ‘ईट राइट कैंपस’ प्रमाणन प्रक्रिया को आगे बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना है कि परिसर के सभी खाद्य प्रतिष्ठान निर्धारित सुरक्षा एवं स्वच्छता मानकों का पालन कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल संस्थान की गुणवत्ता सुधार पहल को मजबूती देगा, बल्कि मरीजों, छात्रों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
खाद्य सुरक्षा संस्कृति विकसित करने का संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर खाद्य सुरक्षा समिति ने स्पष्ट किया कि जीआईएमएस परिसर में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता को केवल एक अभियान नहीं बल्कि एक सतत प्रक्रिया के रूप में विकसित किया जाएगा।
समिति ने सभी भोजनालयों और खाद्य प्रतिष्ठानों में निर्धारित मानकों के प्रभावी अनुपालन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे।
जीआईएमएस की यह पहल स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षित भोजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकती है। यदि यह अभियान सफल रहता है तो आने वाले समय में जीआईएमएस न केवल चिकित्सा शिक्षा और उपचार के क्षेत्र में बल्कि खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के क्षेत्र में भी एक आदर्श संस्थान के रूप में उभर सकता है।
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