उत्तर प्रदेश आबकारी विभाग ने गौतमबुद्धनगर में शराब बिक्री केंद्रों पर अचानक निरीक्षण अभियान चलाकर व्यवस्थाओं की जांच की। अधिकारियों ने दुकानों पर गोपनीय टेस्ट परचेज कराया, सीसीटीवी संचालन और पीओएस मशीनों से 100 प्रतिशत बिक्री सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
गौतमबुद्धनगर में शराब दुकानों पर आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई, औचक निरीक्षण से मचा हड़कंप
जनपद गौतमबुद्धनगर में शराब की बिक्री और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को पारदर्शी एवं नियमबद्ध बनाए रखने के उद्देश्य से आबकारी विभाग ने व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया। आबकारी आयुक्त उत्तर प्रदेश के निर्देशों के क्रम में जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर और पुलिस आयुक्त गौतमबुद्धनगर के निर्देशन में जिला आबकारी अधिकारी गौतमबुद्धनगर के नेतृत्व में 31 मई 2026 को जिले के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित शराब दुकानों और बारों का आकस्मिक निरीक्षण किया गया।
इस औचक कार्रवाई से शराब कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप की स्थिति देखी गई। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने न केवल दुकानों की व्यवस्थाओं की जांच की बल्कि बिक्री प्रक्रिया, सुरक्षा प्रबंधन और उपभोक्ताओं को दी जा रही सेवाओं का भी गहन परीक्षण किया।
इन क्षेत्रों की दुकानों पर पहुंची आबकारी टीम
अभियान के तहत मंडी श्याम नगर, बिलासपुर, सिरसा और घघौला क्षेत्र में स्थित देशी शराब की दुकानों, कम्पोजिट शॉप, मॉडल शॉप, प्रीमियम रिटेल शॉप तथा बार अनुज्ञापनों का निरीक्षण किया गया।
आबकारी विभाग की टीम ने प्रत्येक प्रतिष्ठान पर पहुंचकर लाइसेंस संबंधी नियमों, बिक्री प्रक्रिया और रिकॉर्ड का सत्यापन किया। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि सभी दुकानें निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुरूप संचालित हो रही हैं या नहीं।

कैंटीन और बिक्री व्यवस्था की हुई गहन जांच
निरीक्षण के दौरान दुकानों और बारों से जुड़ी कैंटीनों की भी विशेष रूप से जांच की गई। अधिकारियों ने वहां उपलब्ध सुविधाओं, साफ-सफाई, खाद्य सामग्री की गुणवत्ता तथा उपभोक्ताओं के लिए बनाए गए प्रबंधों का जायजा लिया।
आबकारी विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि लाइसेंसधारी प्रतिष्ठानों में किसी प्रकार की अनियमितता, अवैध गतिविधि या नियमों के उल्लंघन की स्थिति न हो।
गोपनीय टेस्ट परचेज से परखी गई दुकानों की कार्यप्रणाली
इस निरीक्षण अभियान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू गोपनीय टेस्ट परचेज रहा। विभाग की ओर से गुप्त रूप से ग्राहकों के माध्यम से शराब खरीदकर दुकानों की वास्तविक कार्यप्रणाली को परखा गया।
इस प्रक्रिया के माध्यम से यह जांचा गया कि विक्रेता निर्धारित नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं, बिक्री का रिकॉर्ड सही तरीके से दर्ज किया जा रहा है या नहीं तथा उपभोक्ताओं को निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही उत्पाद उपलब्ध कराए जा रहे हैं या नहीं।
गोपनीय टेस्ट परचेज का उद्देश्य दुकानों की वास्तविक स्थिति का पता लगाना था ताकि निरीक्षण के दौरान दिखावे के बजाय वास्तविक व्यवस्था का मूल्यांकन किया जा सके।

सीसीटीवी निगरानी पर विशेष जोर
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने सभी मदिरा दुकानों पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की स्थिति की भी समीक्षा की। विभाग ने अनुज्ञापियों और विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी सीसीटीवी कैमरे रियल टाइम मोड में लगातार संचालित होने चाहिए।
अधिकारियों ने कहा कि सीसीटीवी निगरानी न केवल सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि किसी भी विवाद, शिकायत या अनियमितता की जांच में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि कैमरों की रिकॉर्डिंग नियमित रूप से सुरक्षित रखी जाए ताकि आवश्यकता पड़ने पर उसका उपयोग किया जा सके।
पीओएस मशीन से 100 प्रतिशत बिक्री के निर्देश
आबकारी विभाग ने निरीक्षण के दौरान डिजिटल और पारदर्शी बिक्री व्यवस्था को लेकर भी विशेष जोर दिया। सभी अनुज्ञापियों एवं विक्रेताओं को निर्देशित किया गया कि मदिरा की बिक्री 100 प्रतिशत पीओएस (Point of Sale) मशीनों के माध्यम से ही की जाए।

विभाग का मानना है कि पीओएस मशीनों से बिक्री करने पर लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध रहता है, जिससे राजस्व की पारदर्शिता बनी रहती है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना कम हो जाती है।
नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर विभाग का फोकस
आबकारी विभाग लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि शराब बिक्री से जुड़े सभी प्रतिष्ठान निर्धारित नियमों और लाइसेंस शर्तों का कड़ाई से पालन करें। इसी उद्देश्य से समय-समय पर औचक निरीक्षण अभियान चलाए जाते हैं ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी इस प्रकार के निरीक्षण अभियान जारी रहेंगे और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
गौतमबुद्धनगर में चलाया गया यह अभियान न केवल कानून व्यवस्था और राजस्व संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, बल्कि इससे शराब बिक्री व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी मजबूती मिलेगी।
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