गौतमबुद्धनगर में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित सरस शॉप का शुभारंभ जिलाधिकारी ने किया। इस अवसर पर उन्होंने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों का अवलोकन कर उनकी गुणवत्ता की सराहना की और खरीदारी कर उनका उत्साहवर्धन भी किया।
ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके उत्पादों को बाजार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित सरस शॉप का शुभारंभ गौतमबुद्धनगर के विकास भवन परिसर में जिलाधिकारी द्वारा फीता काटकर किया गया। यह पहल केवल एक दुकान की शुरुआत नहीं है, बल्कि उन हजारों महिलाओं के सपनों को नया मंच देने का प्रयास है जो स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से अपने परिवार और समाज में आर्थिक बदलाव की कहानी लिख रही हैं।
शुभारंभ समारोह के बाद जिलाधिकारी ने सरस शॉप में प्रदर्शित विभिन्न उत्पादों का अवलोकन किया। यहां स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए मसाले, अचार, पापड़, जूट बैग, सैनिटरी पैड, खादी वस्त्र, हस्तशिल्प सामग्री, शहद और अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुएं आकर्षक ढंग से प्रदर्शित की गई थीं। उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और प्रस्तुति को देखकर जिलाधिकारी ने महिलाओं के प्रयासों की सराहना की और कहा कि यह ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, समर्पण और आत्मविश्वास का जीवंत उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि आज ग्रामीण भारत की महिलाएं केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने कौशल और परिश्रम के बल पर आर्थिक विकास की धुरी बन रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं, बल्कि समाज में अपनी अलग पहचान भी स्थापित कर रही हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा आत्मनिर्भर भारत और महिला सशक्तिकरण को लेकर जो दृष्टिकोण रखा गया है, उसे धरातल पर साकार करने में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि गांवों में तैयार होने वाले उत्पाद अब केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गुणवत्ता और प्रस्तुति के आधार पर बड़े बाजारों में भी अपनी जगह बना रहे हैं।
महिलाओं का उत्साह बढ़ाने के लिए जिलाधिकारी ने स्वयं सरस शॉप से कुछ उत्पाद खरीदे और समूह की सदस्य महिलाओं से बातचीत कर उनके अनुभव जाने। उन्होंने महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि इसी प्रकार गुणवत्ता और नवाचार पर ध्यान दिया जाए तो उनके उत्पाद प्रदेश ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना सकते हैं।

इस अवसर पर जिला विकास अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित सरस शॉप स्वयं सहायता समूहों के लिए एक प्रभावी विपणन मंच के रूप में कार्य कर रही है। इसका उद्देश्य महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।
उन्होंने बताया कि मिशन के माध्यम से अनेक महिलाएं आज ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। इन महिलाओं ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया है। सरस शॉप जैसी पहलें इन महिलाओं को स्थायी बाजार उपलब्ध कराने में मदद कर रही हैं, जिससे उनकी आय में और वृद्धि होने की संभावना है।
जिला विकास अधिकारी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि उन्हें सफल उद्यमी के रूप में स्थापित करना भी है। इसी सोच के साथ महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, विपणन सुविधा और उत्पाद विकास जैसी विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में ‘लखपति दीदी’ की संख्या तेजी से बढ़ेगी और यही महिलाएं आगे चलकर ‘करोड़पति दीदी’ बनने का सपना भी साकार करेंगी। इसके लिए प्रशासन और ग्रामीण आजीविका मिशन लगातार प्रयासरत हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। महिलाएं छोटे स्तर से व्यवसाय शुरू कर आज बड़े बाजारों तक पहुंच बना रही हैं। इससे न केवल उनके परिवार की आय बढ़ रही है बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
सरस शॉप का शुभारंभ इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यह मंच महिलाओं को अपने उत्पादों की बिक्री का अवसर प्रदान करेगा और उन्हें बाजार की प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी देगा।

कार्यक्रम में जिला विकास अधिकारी शिव प्रताप परमेश, परियोजना निदेशक नेहा, अखिलेश प्रजापति (एनआरएलएम), डॉ. सपना आर्य (वेदिका फाउंडेशन) सहित स्वयं सहायता समूहों की बड़ी संख्या में सदस्य महिलाएं उपस्थित रहीं।
सरस शॉप का यह शुभारंभ केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन महिलाओं के संघर्ष, सपनों और आत्मनिर्भरता की यात्रा का उत्सव था, जो आज अपने हाथों से भविष्य गढ़ रही हैं और आने वाले वर्षों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई पहचान बनने की ओर बढ़ रही हैं।
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