जून 2026 के राज्यसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि मध्य प्रदेश में उसकी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन तकनीकी और कानूनी आधारों के बिना रद्द किया गया, जबकि झारखंड में भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नथवानी के मामले में कथित तौर पर अलग मानदंड अपनाए गए। इस पूरे विवाद ने चुनावी निष्पक्षता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
जून 2026 के राज्यसभा चुनाव अब केवल संसदीय सीटों की लड़ाई नहीं रह गए हैं, बल्कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता, उम्मीदवारों के साथ समान व्यवहार और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मध्य प्रदेश में तीसरी राज्यसभा सीट जीतने के लिए भाजपा ने हर संभव प्रयास किया और जब उसे अपेक्षित राजनीतिक समर्थन नहीं मिला तो उसकी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करवा दिया गया।
कांग्रेस का दावा है कि मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा के पास तीसरी राज्यसभा सीट जीतने के लिए पर्याप्त विधायक नहीं थे और वह आवश्यक संख्या से लगभग 10 विधायक कम थी। इसके बावजूद भाजपा ने अपना आधिकारिक उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारा।
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन क्यों बना विवाद का केंद्र?
पूरा विवाद कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने से शुरू हुआ। रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन इस आधार पर खारिज किया कि उन्होंने हैदराबाद में अपने खिलाफ दर्ज कथित आपराधिक मामले की जानकारी फॉर्म 26 में नहीं दी।

हालांकि कांग्रेस का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई लंबित आपराधिक मामला था ही नहीं। पार्टी के अनुसार अदालत के समक्ष केवल एक निजी शिकायत प्रस्तुत की गई थी, लेकिन अदालत ने उस पर किसी अपराध का संज्ञान नहीं लिया था।
कांग्रेस का तर्क है कि जब अदालत ने अपराध का संज्ञान ही नहीं लिया, तब उसे लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता और इसलिए फॉर्म 26 में उसका उल्लेख करना आवश्यक नहीं था।
आखिर क्या है फॉर्म 26?
राज्यसभा चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक उम्मीदवार को फॉर्म 26 जमा करना अनिवार्य होता है। इसमें उम्मीदवार को अपनी व्यक्तिगत, वित्तीय और कानूनी जानकारी देनी होती है।
फॉर्म 26 के तहत राजनीतिक दल, मतदाता सूची विवरण, मोबाइल नंबर, ईमेल, सोशल मीडिया अकाउंट, पैन कार्ड, आयकर विवरण, लंबित आपराधिक मामले, सजा प्राप्त मामलों की जानकारी, चल-अचल संपत्ति, देनदारियां, पेशा और शैक्षणिक योग्यता जैसी जानकारियां मांगी जाती हैं।
कांग्रेस का दावा है कि मीनाक्षी नटराजन ने फॉर्म 26 के सभी कॉलम भरे थे और जहां जानकारी लागू नहीं थी, वहां "लागू नहीं" लिखा गया था।
कांग्रेस का कानूनी तर्क
कांग्रेस ने चुनाव संचालन नियम 1961 के नियम-4 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 33A का हवाला देते हुए कहा है कि उम्मीदवार को केवल उन्हीं आपराधिक मामलों की जानकारी देनी होती है जिनमें अदालत द्वारा आरोप तय किए गए हों या अपराध का संज्ञान लिया गया हो।

पार्टी का कहना है कि 17 सितंबर 2025 को जारी नोटिस केवल सुनवाई का अवसर देने के लिए था और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 223 के तहत यह प्रक्रिया संज्ञान लेने से पहले की कार्रवाई थी।
कांग्रेस का आरोप है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने गलत तथ्यात्मक आधार पर यह मान लिया कि अदालत ने अपराध का संज्ञान ले लिया था और इसी आधार पर नामांकन रद्द कर दिया।
झारखंड से जुड़े मामले को लेकर उठाए सवाल
कांग्रेस ने झारखंड से राज्यसभा चुनाव लड़ रहे परिमल नथवानी के नामांकन को लेकर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज की हैं।
पार्टी के अनुसार नथवानी ने अपने नामांकन पत्र में अपना नाम "Nathwani Parimal" दर्ज किया, जबकि मतदाता सूची में नाम का प्रारूप अलग बताया गया है।
इसके अलावा कांग्रेस ने आरोप लगाया कि फॉर्म 26 के कुछ महत्वपूर्ण कॉलम खाली छोड़े गए थे, जिनमें आपराधिक मामलों और दोषसिद्धि से जुड़े विवरण भी शामिल थे।
पार्टी का यह भी दावा है कि उम्मीदवार ने अपने और अपने परिवार से संबंधित कुछ वित्तीय जानकारियां तथा कुछ अचल संपत्तियों का पूरा विवरण प्रस्तुत नहीं किया।

चुनाव आयोग पर दोहरे मापदंड का आरोप
कांग्रेस का सबसे बड़ा आरोप चुनाव आयोग के कथित दोहरे रवैये को लेकर है।
पार्टी का कहना है कि मध्य प्रदेश में मीनाक्षी नटराजन के मामले में अत्यंत कठोर मानदंड अपनाए गए, जबकि झारखंड में परिमल नथवानी को स्पष्टीकरण देने और जानकारी उपलब्ध कराने का अवसर दिया गया।
कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा है कि रिटर्निंग ऑफिसर का काम उम्मीदवार को गंभीर त्रुटियां सुधारने का अवसर देना नहीं होता, फिर भी झारखंड मामले में ऐसा किया गया।
भाजपा और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मध्य प्रदेश में तीसरी राज्यसभा सीट जीतने के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर दबाव बनाया गया। पार्टी का दावा है कि जब कांग्रेस विधायक दल में टूट की संभावना नहीं बनी तो नामांकन प्रक्रिया को ही विवादित बना दिया गया।

हालांकि भाजपा और चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों को लेकर आधिकारिक प्रतिक्रिया और कानूनी पक्ष अलग हो सकता है। चुनाव आयोग और संबंधित रिटर्निंग अधिकारियों के निर्णय कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं और अंतिम सत्य का निर्धारण न्यायिक या संवैधानिक समीक्षा के बाद ही संभव होगा।
लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बढ़ी बहस
राज्यसभा चुनाव का यह विवाद अब केवल एक सीट तक सीमित नहीं रह गया है। यह मामला चुनावी पारदर्शिता, समान अवसर, संस्थागत निष्पक्षता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर अदालतों और राजनीतिक मंचों तक चर्चा का विषय बना रह सकता है। फिलहाल मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने और परिमल नथवानी के नामांकन को वैध ठहराए जाने को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है और देश की निगाहें इस पूरे विवाद के अगले घटनाक्रम पर टिकी हैं।
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