गौतमबुद्धनगर के थाना जेवर में वर्ष 2016 में दर्ज गैंगरेप और पोक्सो एक्ट के मामले में अदालत ने आरोपी धीरेन्द्र को दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। पुलिस की ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत प्रभावी पैरवी के चलते पीड़िता को इंसाफ मिला।
गौतमबुद्धनगर में करीब एक दशक पुराने गैंगरेप और पोक्सो एक्ट से जुड़े मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। थाना जेवर में वर्ष 2016 में दर्ज मामले में आरोपी धीरेन्द्र को दोषी करार देते हुए माननीय न्यायालय ने 20 साल के कठोर कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई है। यह फैसला उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन कन्विक्शन” अभियान के तहत की गई प्रभावी पैरवी का परिणाम माना जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मामला थाना जेवर में वर्ष 2016 में मु0अ0सं0 336/2016 के तहत दर्ज किया गया था। आरोपी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366, 376डी तथा पोक्सो एक्ट की धारा 5/6 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
अदालत ने आरोपी को दोषी माना
माननीय न्यायालय ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद आरोपी धीरेन्द्र पुत्र हरिगोपाल निवासी करीली थाना नरवाई जिला भरतपुर, राजस्थान को दोषी करार दिया। कोर्ट ने आरोपी को पोक्सो एक्ट की धारा 5/6 के तहत 20 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि यदि आरोपी निर्धारित जुर्माना अदा नहीं करता है तो उसे एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
इसके अलावा आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 366 के तहत 10 वर्ष के कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड की भी सजा सुनाई गई। जुर्माना न देने की स्थिति में एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।

क्या है ऑपरेशन कन्विक्शन?
उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक द्वारा चलाया जा रहा “ऑपरेशन कन्विक्शन” अभियान गंभीर अपराधों में आरोपियों को सजा दिलाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत पुलिस, मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन विभाग समन्वय बनाकर अदालत में मजबूत पैरवी करते हैं ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।
गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट भी इस अभियान के तहत लगातार पुराने और गंभीर मामलों की मॉनिटरिंग कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक इस केस में भी मॉनिटरिंग सेल, थाना जेवर पुलिस और अभियोजन इकाई ने साक्ष्यों और गवाहों को मजबूती से अदालत के सामने प्रस्तुत किया।
10 साल बाद मिला न्याय
यह मामला वर्ष 2016 का था और लंबे समय से अदालत में विचाराधीन था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में पीड़ित और उनके परिवार को लंबे समय तक मानसिक संघर्ष से गुजरना पड़ता है। ऐसे में दोषियों को सजा मिलना न सिर्फ पीड़ित परिवार के लिए राहत है बल्कि समाज में कानून के प्रति विश्वास भी मजबूत करता है

पुलिस अधिकारियों ने जताई संतुष्टि
गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट की ओर से कहा गया कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में सख्त कार्रवाई प्राथमिकता है। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी गंभीर मामलों में प्रभावी पैरवी जारी रखी जाएगी ताकि अपराधियों को कानून के मुताबिक सख्त सजा मिल सके।
पुलिस के मुताबिक ऑपरेशन कन्विक्शन के जरिए ऐसे मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है, जिनमें गंभीर अपराध शामिल हैं। इससे अदालतों में लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि पोक्सो एक्ट और महिला अपराधों से जुड़े मामलों में त्वरित और प्रभावी न्याय बेहद जरूरी है। इससे समाज में अपराधियों के बीच डर पैदा होता है और पीड़ितों को न्याय व्यवस्था पर भरोसा मिलता है।
गौतमबुद्धनगर पुलिस द्वारा इस मामले में की गई कार्रवाई को इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
अपराधियों को कड़ा संदेश
अदालत के इस फैसले को महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए एक सख्त संदेश माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून से बचना अब आसान नहीं है और गंभीर अपराधों में दोषियों को सख्त सजा दिलाने के लिए हर स्तर पर प्रयास जारी रहेंगे।
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