दिल्ली के पूर्वी जिले में एक चौंकाने वाला साइबर फ्रॉड सामने आया है, जहां मरीज की देखभाल करने वाले केयरटेकर ने ही मालिक के क्रेडिट कार्ड का दुरुपयोग कर करीब 9.58 लाख रुपये की ठगी कर डाली। आरोपी ने अपने भाई और साथी के साथ मिलकर सोने के सिक्के खरीदे। दिल्ली पुलिस की साइबर ईस्ट टीम ने तकनीकी जांच, सीसीटीवी फुटेज और ज्वेलरी रिकॉर्ड के आधार पर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
विश्वास का कत्ल: जिस पर देखभाल की जिम्मेदारी थी, उसी ने किया करोड़ों जैसा खेल
राजधानी दिल्ली में साइबर अपराध का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने भरोसे और रिश्तों दोनों को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। जिस युवक को एक परिवार ने अपने घर में देखभाल और सेवा के लिए रखा था, उसी ने घर के मालिक के बैंकिंग डिटेल्स चुराकर लाखों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दे दिया।
पूर्वी दिल्ली के मधुबन एन्क्लेव निवासी कृष्णा गुप्ता के साथ हुई इस घटना में करीब 9 लाख 58 हजार 51 रुपये की धोखाधड़ी सामने आई है। मामले का खुलासा तब हुआ जब उनके इंडसइंड बैंक क्रेडिट कार्ड से लगातार संदिग्ध ट्रांजैक्शन होने लगे।
कैसे हुआ पूरे फ्रॉड का खुलासा?
पीड़ित कृष्णा गुप्ता ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनके क्रेडिट कार्ड से बिना अनुमति कई ट्रांजैक्शन किए गए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना साइबर ईस्ट में ई-एफआईआर संख्या 172/2026 दर्ज की गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 303(2), 317(2) और 361(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
साइबर ईस्ट टीम ने ऐसे सुलझाई गुत्थी
मामले की जांच के लिए एसीपी ऑपरेशन पवन कुमार की निगरानी में और इंस्पेक्टर पवन यादव के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई। टीम में डब्ल्यूएसआई रिंकी, हेड कांस्टेबल कुलदीप, हेड कांस्टेबल परस और डब्ल्यूएचसी पूनम शामिल थीं।
पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस, बैंक ट्रांजैक्शन एनालिसिस, सीसीटीवी फुटेज और दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश तक कई ज्वेलरी दुकानों के रिकॉर्ड खंगाले।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी सोने के सिक्के खरीदकर ठगी के पैसे को छिपाने की कोशिश कर रहे थे।

केयरटेकर ही निकला मास्टरमाइंड
पुलिस जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी निशांत कुमार पीड़ित के यहां नर्सिंग अटेंडेंट और केयरटेकर के तौर पर काम करता था। इसी दौरान उसने भरोसे का फायदा उठाकर चोरी-छिपे क्रेडिट कार्ड की डिटेल्स हासिल कर लीं।
इसके बाद उसने कार्ड की जानकारी का इस्तेमाल करते हुए लाखों रुपये के गोल्ड कॉइन खरीद लिए।
इस पूरे खेल में निशांत का भाई निकिल कुमार हैंडलर और सहयोगी की भूमिका में था, जबकि तीसरा आरोपी यश शर्मा ज्वेलरी दुकानों पर जाकर खुद को कार्ड का असली उपयोगकर्ता बताता था और सोने के सिक्के खरीदता था।
दिल्ली और मेरठ की दुकानों से खरीदे गए गोल्ड कॉइन
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने दिल्ली के नजफगढ़ और उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित ज्वेलरी शॉप्स से गोल्ड कॉइन खरीदे।
जांच में सामने आया कि चोरी किए गए कार्ड डिटेल्स का इस्तेमाल कर लगभग 55 ग्राम सोना खरीदा गया था।
दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब 50 ग्राम वजन के चार गोल्ड कॉइन बरामद कर लिए हैं। हालांकि एक गोल्ड कॉइन अभी भी बरामद नहीं हो पाया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है:
1. निशांत कुमार
निवासी – साबोली, शक्ति गार्डन, गोकलपुरी, उत्तर-पूर्वी दिल्ली
उम्र – 22 वर्ष
भूमिका – मुख्य साजिशकर्ता और केयरटेकर
2. निकिल कुमार
निवासी – साबोली, शक्ति गार्डन, गोकलपुरी, उत्तर-पूर्वी दिल्ली
उम्र – 26 वर्ष
भूमिका – हैंडलर और सहयोगी
3. यश शर्मा
निवासी – साबोली, शक्ति गार्डन, गोकलपुरी, उत्तर-पूर्वी दिल्ली
उम्र – 22 वर्ष
भूमिका – गोल्ड कॉइन खरीदने वाला आरोपी

अदालत में पेश, आगे की जांच जारी
दिल्ली पुलिस ने तीनों आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद अदालत में पेश किया। फिलहाल उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। साथ ही बाकी रकम और खरीदे गए सामान की रिकवरी की कोशिश की जा रही है।
दिल्ली पुलिस की जनता से अपील
इस मामले के बाद दिल्ली पुलिस ने आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
पुलिस ने कहा कि लोग अपने बैंकिंग डिटेल्स, ओटीपी, सीवीवी, पिन और क्रेडिट कार्ड की जानकारी किसी के साथ साझा न करें। यहां तक कि घरेलू स्टाफ, केयरटेकर या करीबी लोगों के साथ भी संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचें।
अगर किसी भी तरह का संदिग्ध बैंकिंग ट्रांजैक्शन दिखाई दे तो तुरंत संबंधित बैंक से संपर्क करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल www.cybercrime.gov.in या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
लगातार बढ़ रहे हैं साइबर फ्रॉड के मामले
विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधी अब लोगों के भरोसे और निजी संबंधों का फायदा उठाकर अपराध को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे मामलों में केवल तकनीकी सुरक्षा ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत सतर्कता भी बेहद जरूरी हो गई है।
दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई को बड़ी सफलता माना जा रहा है, लेकिन यह मामला आम लोगों के लिए भी एक बड़ा सबक बनकर सामने आया है।
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