तकनीकी शिक्षा विभाग की पहल से अब उत्तर प्रदेश के अटल आवासीय और विहान आवासीय विद्यालयों के छात्रों को भी अत्याधुनिक मोबाइल साइंस लैब का अनुभव मिलेगा। प्रमुख सचिव डॉ. एम. के. शन्मुगा सुन्दरम् के निर्देश पर ‘लैब ऑन व्हील्स’ बस को प्रदेशभर के विद्यालयों तक पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई है।
M. K. Shanmuga Sundaram ने उत्तर प्रदेश में तकनीकी और वैज्ञानिक शिक्षा को नई दिशा देने की पहल करते हुए डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय में संचालित ‘लैब ऑन व्हील्स’ परियोजना को प्रदेश के अटल एवं विहान आवासीय विद्यालयों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस पहल से अब हजारों छात्र-छात्राओं को आधुनिक तकनीकी प्रयोगशालाओं का अनुभव उनके विद्यालय परिसर में ही मिल सकेगा।
यह पहल उस समय शुरू हुई जब प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा ने Dr. A.P.J. Abdul Kalam Technical University में आयोजित विश्वविद्यालय की कार्यकारी समिति की बैठक में भाग लिया। बैठक के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा संचालित ‘लैब ऑन व्हील्स’ बस का अवलोकन किया। यह बस आधुनिक तकनीकी उपकरणों और प्रयोगात्मक सुविधाओं से सुसज्जित मोबाइल प्रयोगशाला है, जिसे विशेष रूप से कॉलेज और स्कूली छात्रों को विज्ञान एवं तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
प्रमुख सचिव डॉ. एम. के. शन्मुगा सुन्दरम् ने इस पहल की सराहना करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति A. K. Pandey से अनुरोध किया कि इस मोबाइल प्रयोगशाला को अटल आवासीय विद्यालय, लखनऊ भी भेजा जाए ताकि वहां अध्ययनरत छात्र भी आधुनिक विज्ञान और तकनीक का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर सकें।

प्रमुख सचिव के अनुरोध पर 14 मई को ‘लैब ऑन व्हील्स’ बस को Atal Residential School भेजा गया। विद्यालय पहुंचे छात्रों ने इस मोबाइल प्रयोगशाला का उत्साहपूर्वक अवलोकन किया। बच्चों ने न केवल विभिन्न तकनीकी उपकरणों और वैज्ञानिक मॉडलों को देखा, बल्कि स्वयं कई सुविधाओं का उपयोग भी किया। इस दौरान छात्रों ने विशेषज्ञों से कई सवाल पूछे और विज्ञान व तकनीक के प्रति अपनी जिज्ञासा भी जाहिर की।
विद्यालय में छात्रों के उत्साह और रुचि को देखते हुए प्रमुख सचिव ने एक और बड़ा निर्णय लिया। उन्होंने AKTU के कुलपति से अनुरोध किया कि ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होने के बाद प्रदेश के सभी 17 अन्य अटल आवासीय विद्यालयों और 24 विहान आवासीय विद्यालयों में भी ‘लैब ऑन व्हील्स’ बस भेजी जाए, ताकि प्रदेशभर के बच्चे इस अत्याधुनिक प्रयोगशाला का लाभ उठा सकें।
बताया गया कि छात्रों का ग्रीष्मकालीन अवकाश 19 मई से शुरू हो रहा है और अवकाश समाप्त होने के बाद इस विशेष अभियान को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
प्रमुख सचिव डॉ. सुन्दरम् ने अटल आवासीय विद्यालयों की विशेषताओं पर भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अटल आवासीय विद्यालय मुख्य रूप से निर्माण श्रमिकों के बच्चों तथा कोविड-19 महामारी के दौरान अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों के लिए स्थापित किए गए हैं। उत्तर प्रदेश के प्रत्येक मंडल में एक विद्यालय के हिसाब से कुल 18 अटल आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं।

इन विद्यालयों में सीबीएसई पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षा प्रदान की जाती है। प्रत्येक विद्यालय में 1000 विद्यार्थियों के आवास की सुविधा उपलब्ध है, जिसमें 500 बालक और 500 बालिकाओं के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई है। इन विद्यालयों में नवोदय विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय और सैनिक स्कूलों के सेवानिवृत्त शिक्षकों के साथ-साथ चयनित परिषदीय शिक्षक भी शिक्षण कार्य कर रहे हैं।
शिक्षा की गुणवत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अटल आवासीय विद्यालयों के पहले बैच के 2178 विद्यार्थियों ने इस वर्ष आयोजित कक्षा 10 की सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में 93.15 प्रतिशत उत्तीर्ण परिणाम हासिल किया है। इनमें प्रयागराज और वाराणसी स्थित विद्यालयों का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा, जबकि 15 विद्यालयों का पास प्रतिशत 90 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया।
इसके अलावा प्रमुख सचिव ने विहान आवासीय विद्यालयों के बारे में भी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि विहान आवासीय विद्यालय श्रम विभाग द्वारा संचालित किए जाते हैं। वर्तमान में प्रदेश के 12 जिलों में कुल 24 विहान विद्यालय संचालित हैं, जिनमें प्रत्येक जिले में बालकों और बालिकाओं के लिए अलग-अलग विद्यालय बनाए गए हैं।
ये विद्यालय राज्य पाठ्यक्रम से संबद्ध हैं और यहां हिंदी माध्यम से कक्षा 6 से 8 तक शिक्षा प्रदान की जाती है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की तर्ज पर विकसित इन विद्यालयों में प्रत्येक कक्षा में 100 विद्यार्थियों की क्षमता निर्धारित की गई है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ‘लैब ऑन व्हील्स’ जैसी पहल ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के छात्रों को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक शिक्षा से जोड़ने में बेहद प्रभावी साबित हो सकती है। इससे छात्रों में विज्ञान, नवाचार और तकनीकी शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ेगी तथा भविष्य में उन्हें बेहतर करियर अवसर भी प्राप्त हो सकेंगे।
तकनीकी शिक्षा विभाग की यह पहल अब प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई शुरुआत के रूप में देखी जा रही है, जहां सरकारी आवासीय विद्यालयों के बच्चों को भी आधुनिक संसाधनों और प्रयोगात्मक शिक्षा से जोड़ा जा रहा है।
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