Tuesday, May 19, 2026

रिसर्च की नई क्रांति या नर्सिंग शिक्षा का बड़ा बदलाव? SGPGIMS में अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला ने खोले वैश्विक शोध के नए रास्ते

“अनुदान एवं प्रकाशन : नर्सिंग अनुसंधान और नवाचार को सशक्त बनाना” विषय पर आयोजित कार्यशाला में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने साझा किए शोध, फंडिंग और वैज्ञानिक प्रकाशन के महत्वपूर्ण पहलू

Bahrampur , Latest Updated On - May 15 2026 | 14:30:00 PM
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एसजीपीजीआईएमएस के कॉलेज ऑफ नर्सिंग द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में नर्सिंग रिसर्च, वैज्ञानिक लेखन, ग्रांट प्राप्ति, प्लेजरिज्म और वैश्विक शोध सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत चर्चा की। देश-विदेश के विशेषज्ञों ने नर्सिंग शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए शोध आधारित दृष्टिकोण पर जोर दिया।

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Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences (एसजीपीजीआईएमएस) के कॉलेज ऑफ नर्सिंग द्वारा 14 मई को टेलीमेडिसिन ऑडिटोरियम में “अनुदान एवं प्रकाशन : नर्सिंग अनुसंधान और नवाचार को सशक्त बनाना” विषय पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला नर्सिंग शिक्षा, स्वास्थ्य अनुसंधान और वैज्ञानिक नवाचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई।

कार्यशाला का उद्देश्य नर्सिंग विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और स्वास्थ्यकर्मियों को शोध कार्य, वैज्ञानिक लेखन, रिसर्च प्रकाशन तथा अनुसंधान के लिए अनुदान प्राप्त करने की प्रक्रिया के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नर्सिंग शिक्षक, स्नातकोत्तर विद्यार्थी, शोधकर्ता एवं नर्सिंग अधिकारी शामिल हुए।

इस महत्वपूर्ण आयोजन का संचालन Radha K, प्रोफेसर एवं प्राचार्य, कॉलेज ऑफ नर्सिंग, एसजीपीजीआईएमएस के मार्गदर्शन में किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में नर्सिंग अनुसंधान, वैज्ञानिक सोच और ग्रांट लेखन की बढ़ती आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए नर्सिंग रिसर्च अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुका है।


कार्यक्रम को R K Dhiman, निदेशक एसजीपीजीआईएमएस का विशेष मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त हुआ। उद्घाटन सत्र में Shaleen Kumar, डॉ. अंकुर भटनागर (सब-डीन, नर्सिंग), श्रीमती मंजू सिंह (मुख्य नर्सिंग अधिकारी) तथा प्राचार्य डॉ. राधा के. उपस्थित रहीं।

कार्यशाला के दौरान विभिन्न विशेषज्ञों ने नर्सिंग अनुसंधान से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए। Manish Dixit ने शोध विषयों की पहचान, रिसर्च की दिशा तय करने और फंडिंग के अवसरों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने प्रतिभागियों को बताया कि गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए सही विषय चयन और समय पर फंडिंग अत्यंत आवश्यक है।

वहीं Shagun Mishra ने नर्सिंग रिसर्च में नैतिकता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी शोध की विश्वसनीयता उसके नैतिक मूल्यों पर आधारित होती है। उन्होंने रिसर्च के दौरान पारदर्शिता और जिम्मेदारी बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।


कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण अमेरिका से ऑनलाइन जुड़ीं Sujayalakshmi Devarayasamudram रहीं, जिन्होंने नर्सिंग अनुसंधान में नवाचार और वैश्विक शोध सहयोग पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान बेहद जरूरी है।

Anshuman Elhence ने बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) और रिसर्च ईमानदारी पर जानकारी देते हुए प्रतिभागियों को शोध कार्यों की कानूनी एवं नैतिक सुरक्षा के बारे में जागरूक किया। उन्होंने कहा कि मौलिक शोध और सही संदर्भ प्रणाली वैज्ञानिक समुदाय में विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

इसी क्रम में Alok Kumar ने ग्रांट प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया को सरल तरीके से समझाया। उन्होंने बताया कि रिसर्च फंडिंग प्राप्त करने के लिए स्पष्ट उद्देश्य, प्रभावी प्रस्तुति और मजबूत शोध पद्धति बेहद महत्वपूर्ण होती है।

Rohit Anthony Sinha ने वैज्ञानिक लेखन एवं शोध पत्र प्रकाशन पर व्याख्यान देते हुए बताया कि गुणवत्तापूर्ण शोध को प्रभावी भाषा और सही प्रकाशन प्रक्रिया के माध्यम से वैश्विक मंच तक पहुंचाया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त Amit Goyal ने रिसर्च परियोजनाओं की निगरानी एवं मूल्यांकन की प्रक्रिया पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसी भी शोध परियोजना की सफलता उसके नियमित मूल्यांकन और पारदर्शी निगरानी पर निर्भर करती है।


Vikas Agrawal ने शोध प्रस्तावों के अस्वीकृत होने के सामान्य कारणों और उन्हें बेहतर बनाने के उपायों पर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों को उच्च गुणवत्ता वाले रिसर्च प्रस्ताव तैयार करने के व्यावहारिक सुझाव दिए।

कार्यशाला में C P Chaturvedi ने प्लेजरिज्म यानी साहित्यिक चोरी से बचाव और प्रकाशन प्रक्रिया के तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि शोध में मौलिकता बनाए रखना वैज्ञानिक विश्वसनीयता की सबसे बड़ी पहचान है।

कार्यक्रम में आयोजित इंटरैक्टिव सत्र प्रतिभागियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हुआ। इसमें रिसर्च, फंडिंग, वैज्ञानिक प्रकाशन और प्लेजरिज्म से जुड़े कई प्रश्न पूछे गए, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से समाधान किया।

कार्यशाला का समापन पोस्ट-टेस्ट और वैलेडिक्टरी सत्र के साथ हुआ। आयोजन सचिव श्री यादिद्या, डॉ. अंजू वर्मा एवं श्री आशुतोष के. चंचल के प्रयासों से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

इस अवसर पर लखनऊ के विभिन्न प्रतिष्ठित नर्सिंग महाविद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक और विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में साक्ष्य-आधारित नर्सिंग प्रैक्टिस, नैतिक प्रकाशन, आपसी सहयोग और वैश्विक शोध सहभागिता के महत्व पर विशेष जोर दिया गया, ताकि नर्सिंग शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी एवं आधुनिक बनाया जा सके।

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