डॉ एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय की 55वीं कार्य परिषद् बैठक कुलपति प्रो जेपी पाण्डेय की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में विभिन्न राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्तियों, विश्वविद्यालय के संस्थानों में चयन एवं प्रोन्नति, ऑडिटोरियम निर्माण और कई संस्थानों की शैक्षिक स्वायत्ता पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
उत्तर प्रदेश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बैठक में कई बड़े फैसलों पर मुहर लगाई गई। डॉ एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय की 55वीं कार्य परिषद् की बैठक गुरुवार को विश्वविद्यालय के कुलपति जेपी पाण्डेय की अध्यक्षता में आयोजित हुई। इस बैठक को विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध संस्थानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें नियुक्तियों, प्रोन्नतियों, अधोसंरचना विकास और शैक्षिक स्वायत्ता से जुड़े कई अहम निर्णय लिए गए।
बैठक के दौरान सबसे प्रमुख निर्णय विश्वविद्यालय के सहयुक्त संस्थानों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर लिया गया। परिषद् ने राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज मिर्जापुर, बस्ती, गोंडा और प्रतापगढ़ में सह-आचार्य एवं आचार्य पदों पर चयनित अभ्यर्थियों के नामों को अनुमोदन प्रदान कर दिया। माना जा रहा है कि इससे इन संस्थानों में लंबे समय से खाली पड़े शैक्षणिक पदों को भरने की दिशा में राहत मिलेगी और तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
इसके साथ ही विश्वविद्यालय के घटक संस्थानों में भी शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदों पर चयन एवं प्रोन्नति से संबंधित प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज, फैकल्टी ऑफ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग और यूपी इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन शामिल हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार चयन समिति की संस्तुतियों पर विचार करने के बाद परिषद् ने इन संस्थानों में नियुक्ति और प्रोन्नति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की स्वीकृति प्रदान की। इससे विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

बैठक में अधोसंरचना विकास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला भी लिया गया। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज मिर्जापुर, बस्ती, गोंडा और प्रतापगढ़ में ऑडिटोरियम निर्माण के लिए निर्माण एजेंसी के चयन को हरी झंडी दे दी गई। विश्वविद्यालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इन नए ऑडिटोरियमों के निर्माण से छात्रों को शैक्षणिक, सांस्कृतिक और तकनीकी गतिविधियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
इसके अलावा कुछ निजी तकनीकी संस्थानों की शैक्षिक स्वायत्ता के प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। परिषद् ने कानपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, एक्यूरेट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी सहित अन्य संस्थानों के मामलों पर विचार करते हुए अग्रिम कार्रवाई के लिए संस्तुति दी।
विशेषज्ञों का मानना है कि शैक्षिक स्वायत्ता मिलने से संस्थानों को पाठ्यक्रम, शोध, उद्योग सहयोग और कौशल विकास कार्यक्रमों में अधिक स्वतंत्रता मिल सकती है। हालांकि इसके साथ गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखना भी बड़ी चुनौती होगी।
बैठक के दौरान विश्वविद्यालय की विभिन्न समितियों और निकायों के कार्यवृत्तों को भी अनुमोदन प्रदान किया गया। परिषद् ने विद्या परिषद्, वित्त समिति, कैब और पीएमयू की बैठकों में लिए गए निर्णयों पर सहमति जताई।
यह बैठक केवल प्रशासनिक औपचारिकता तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें तकनीकी शिक्षा की बदलती जरूरतों और भविष्य की चुनौतियों पर भी गंभीर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि विश्वविद्यालय आने वाले समय में नई शिक्षा नीति, उद्योग आधारित पाठ्यक्रम और डिजिटल तकनीक आधारित शिक्षण मॉडल पर और अधिक जोर दे सकता है।
बैठक में कई प्रतिष्ठित शिक्षाविद और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। इनमें एमके सुन्दरम, एसके काक, योगेश सिंह, निश्चल वर्मा, बरजीव त्यागी और केशव सिंह सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।
तकनीकी शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि विश्वविद्यालय द्वारा लिए गए ये फैसले आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश की इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं। खासतौर पर नियुक्तियों और अधोसंरचना विकास से जुड़े फैसलों का सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और संस्थानों की गुणवत्ता पर दिखाई दे सकता है।
फिलहाल शिक्षा जगत की नजर अब इस बात पर टिकी है कि परिषद् में लिए गए फैसलों को जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।
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