पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में SIR प्रक्रिया को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 250 मौतों और लाखों नाम हटाए जाने का आरोप लगाया, जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने टीएमसी पर विकासहीन शासन का हमला बोला।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच राजनीतिक माहौल बेहद तनावपूर्ण और आरोप-प्रत्यारोप से भरा हुआ दिखाई दे रहा है। एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी ने अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया है, वहीं दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच तीखी बयानबाजी ने चुनावी सरगर्मी को और बढ़ा दिया है।
इस पूरे चुनावी घटनाक्रम के केंद्र में सबसे बड़ा मुद्दा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) बन गया है, जिस पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। केशियारी में आयोजित एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के कारण राज्य में 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया में करीब 90 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, जिनमें 60 लाख हिंदू और 30 लाख मुस्लिम शामिल हैं।
ममता बनर्जी ने इस मुद्दे को सीधे तौर पर नागरिकता और पहचान से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि क्या केवल बांग्ला बोलने से किसी की भारतीयता पर सवाल उठाया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया ने आम लोगों के भीतर भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।

वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए चुनावी अभियान को पूरी तरह विकास और सुशासन के मुद्दे पर केंद्रित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जनसभा में टीएमसी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में इस समय “भय बनाम भरोसा” की लड़ाई चल रही है। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी का शासन भय, भ्रष्टाचार और सिंडिकेट राज पर आधारित है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में टीएमसी सरकार राज्य के लिए कोई स्पष्ट विकास मॉडल नहीं दे पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अपने कार्यकाल की उपलब्धियों पर चर्चा करने से बचती है क्योंकि इससे उसकी विफलताएं उजागर हो जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि बंगाल को भय के माहौल से निकालकर विकास और विश्वास के रास्ते पर आगे बढ़ाया जाए।
इसी बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी चुनावी परिप्रेक्ष्य में बयान देते हुए विश्वास जताया कि भारतीय जनता पार्टी असम में मजबूत बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। उन्होंने धार्मिक स्थलों के दर्शन के बाद राजनीतिक संदर्भों में अपनी बात रखी।
चुनाव के इस माहौल में बीजेपी ने कोलकाता में अपना घोषणा पत्र भी जारी किया है, जिसे पार्टी ने “भरोसा पत्र” नाम दिया है। इसमें विकास, रोजगार और सुशासन को मुख्य आधार बताया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस अवसर पर कहा कि पार्टी का लक्ष्य पश्चिम बंगाल में एक स्थिर और पारदर्शी सरकार स्थापित करना है।
दूसरी ओर टीएमसी लगातार केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं पर सवाल उठा रही है। SIR को लेकर उठे विवाद ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। ममता बनर्जी ने इसे जनता के अधिकारों पर हमला बताते हुए आंदोलनात्मक रुख अपनाया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने भाषण में टीएमसी पर तीखा हमला जारी रखते हुए कहा कि पार्टी ने त्रिपुरा, असम और गोवा जैसे राज्यों में भी चुनाव लड़ने की कोशिश की, लेकिन वहां जनता का समर्थन नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी के पास न तो विजन है, न नीति और न नीयत।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस बार का पश्चिम बंगाल चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह विश्वास, पहचान और प्रशासनिक पारदर्शिता के मुद्दों पर केंद्रित हो गया है। SIR को लेकर उठा विवाद इस चुनाव को और अधिक संवेदनशील बना रहा है।
इसी बीच 4 मई को होने वाली मतगणना को लेकर सभी दल अपनी-अपनी रणनीति में जुट गए हैं। टीएमसी इसे जनसमर्थन का प्रमाण बता रही है, जबकि बीजेपी इसे बदलाव की शुरुआत के रूप में देख रही है।
फिलहाल, चुनावी रैलियों, आरोपों और घोषणापत्रों के बीच पश्चिम बंगाल का राजनीतिक माहौल बेहद गर्म है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जनता इस बहस में किस पक्ष को समर्थन देती है और SIR विवाद चुनावी नतीजों को किस हद तक प्रभावित करता है।
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