केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में शासन व्यवस्था केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रही, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का माध्यम बनी है। उन्होंने मिशन कर्मयोगी, CPGRAMS, डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट, ई-ऑफिस और डिजिटल गवर्नेंस मॉडल की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए राज्यों से इन्हें व्यापक रूप से अपनाने का आह्वान किया।
केंद्र सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय की 12 वर्षों की उपलब्धियों को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की शासन व्यवस्था में पिछले एक दशक में हुए बदलाव केवल प्रशासनिक सुधार नहीं हैं, बल्कि ये सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन के सशक्त माध्यम बन चुके हैं।
उन्होंने राज्यों से अपील की कि केंद्र सरकार द्वारा विकसित मिशन कर्मयोगी, CPGRAMS, डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट और अन्य तकनीक आधारित नागरिक सेवा प्रणालियों को बड़े पैमाने पर अपनाया जाए ताकि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को गति मिल सके।
शासन सुधार अब बदलाव का माध्यम
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शासन सुधारों ने प्रशासनिक सीमाओं को पार करते हुए आम नागरिक के जीवन को सीधे प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता को बढ़ाने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म आज नागरिकों का भरोसा जीत रहे हैं।
उन्होंने कहा कि "अच्छा शासन किसी भी राष्ट्र की प्रगति की कुंजी है" और इसी सोच के साथ पिछले 12 वर्षों में कई ऐतिहासिक सुधार किए गए हैं।
पर्दे के पीछे काम करने वाले विभाग बने परिवर्तन के केंद्र
मंत्री ने बताया कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) तथा पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) ने अपनी भूमिका को पूरी तरह बदल दिया है।
जहां पहले ये विभाग सीमित प्रशासनिक कार्यों तक केंद्रित थे, वहीं आज ये नवाचार, प्रशासनिक सुधार और नागरिक-केंद्रित शासन के प्रमुख वाहक बन चुके हैं।
तीन सिद्धांतों पर आधारित है परिवर्तन
डॉ. सिंह ने कहा कि सरकार के प्रशासनिक सुधार तीन प्रमुख स्तंभों—नवाचार (Innovation), कल्पनाशीलता (Imagination) और समावेशन (Inclusion)—पर आधारित हैं।
इन्हीं सिद्धांतों के कारण भारत के कई गवर्नेंस मॉडल अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहे जा रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका, मंगोलिया और मालदीव सहित कई देशों के प्रतिनिधिमंडल भारत के डिजिटल गवर्नेंस, शिकायत निवारण और सिविल सेवा सुधारों का अध्ययन कर रहे हैं।

सेल्फ-अटेस्टेशन ने बदली सरकार और नागरिक के रिश्ते की सोच
डॉ. जितेंद्र सिंह ने 2014 में लागू किए गए सेल्फ-अटेस्टेशन (स्व-प्रमाणन) को सबसे प्रतीकात्मक और प्रभावशाली सुधारों में से एक बताया।
उन्होंने कहा कि इस कदम ने औपनिवेशिक सोच को पीछे छोड़ते हुए नागरिकों पर भरोसे को प्राथमिकता दी। इससे लोगों को अनावश्यक प्रमाणन प्रक्रियाओं से राहत मिली और शासन व्यवस्था अधिक नागरिक-अनुकूल बनी।
भर्ती प्रक्रिया में बढ़ी पारदर्शिता
सरकार द्वारा ग्रुप ‘बी’ (नॉन-गजेटेड) और ग्रुप ‘सी’ पदों के लिए इंटरव्यू समाप्त करने के निर्णय को भी उन्होंने महत्वपूर्ण सुधार बताया।
उन्होंने कहा कि इससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी और योग्यता आधारित चयन को मजबूती मिली।
आधार आधारित सत्यापन, कंप्यूटर आधारित परीक्षाएं और पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024 जैसे कदमों ने भर्ती प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाया है।
उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2022 से अब तक आयोजित 19 रोजगार मेलों के माध्यम से 12 लाख से अधिक नियुक्ति पत्र वितरित किए जा चुके हैं।
सामाजिक न्याय को मिली मजबूती
डॉ. सिंह ने कहा कि कार्मिक नीतियों में सामाजिक न्याय को केंद्र में रखा गया है।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को आरक्षण, दिव्यांगजन के लिए अवसरों का विस्तार, बैकलॉग रिक्तियों को भरने के विशेष अभियान तथा वंचित वर्गों की भागीदारी बढ़ाने के प्रयास इसी दिशा में किए गए कदम हैं।
मिशन कर्मयोगी बना सबसे बड़ा सिविल सेवा सुधार
डॉ. जितेंद्र सिंह ने मिशन कर्मयोगी को दुनिया के सबसे बड़े सिविल सेवा सुधार कार्यक्रमों में से एक बताया।
उन्होंने कहा कि इस पहल ने नियम-आधारित प्रशासन से क्षमता-आधारित और भूमिका-आधारित प्रशासन की ओर बदलाव किया है।
iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म पर वर्तमान में 1.65 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं और लगभग 13 करोड़ पाठ्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं।
AI सारथी, AI ट्यूटर और अन्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों के माध्यम से भविष्य की जरूरतों के अनुरूप प्रशासनिक क्षमता विकसित की जा रही है।
CPGRAMS बना दुनिया का बड़ा शिकायत निवारण मंच
मंत्री ने कहा कि नागरिक शिकायत निवारण प्रणाली में भी उल्लेखनीय बदलाव आया है।
जहां पहले सरकार के पास प्रतिवर्ष लगभग 2 लाख शिकायतें आती थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 25 लाख हो गई है। इसे उन्होंने नागरिकों के बढ़ते भरोसे का प्रमाण बताया।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि शिकायतों के निस्तारण का औसत समय 157 दिनों से घटकर केवल 13 दिन रह गया है।
उन्होंने CPGRAMS को दुनिया के सबसे बड़े और प्रभावी शिकायत निवारण प्लेटफॉर्म में से एक बताया।

डिजिटल गवर्नेंस में भारत की नई पहचान
डॉ. सिंह ने कहा कि ऑनलाइन RTI, e-HRMS, e-Office, डिजिटल परफॉर्मेंस मूल्यांकन प्रणाली, AI आधारित नागरिक सेवाएं और पेपरलेस प्रशासन ने सरकारी कार्यप्रणाली को पूरी तरह बदल दिया है।
उन्होंने कहा कि भारत अब केवल वैश्विक मॉडल अपनाने वाला देश नहीं रहा, बल्कि अपने नवाचारों के जरिए दूसरे देशों के लिए उदाहरण बन रहा है।
भ्रष्टाचार पर भी सख्त प्रहार
उन्होंने बताया कि लोकपाल की स्थापना, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में संशोधन और तकनीक आधारित सतर्कता तंत्र ने जवाबदेही को मजबूत किया है।
साथ ही ईमानदार अधिकारियों को निर्णय लेने का सुरक्षित वातावरण भी प्रदान किया गया है।
कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए कई मानवीय सुधार
डॉ. सिंह ने कहा कि मातृत्व अवकाश, सरोगेसी से जुड़े अवकाश, अंगदान के लिए विशेष अवकाश और दिव्यांग बच्चों की शिक्षा सहायता जैसे कदमों ने शासन में संवेदनशीलता को बढ़ाया है।
उन्होंने मृत शिशु जन्म (Stillbirth) के मामलों में विशेष मातृत्व अवकाश और तलाकशुदा या अलग रह रही बेटियों को पारिवारिक पेंशन का लाभ देने जैसे निर्णयों को भी महत्वपूर्ण बताया।
डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट ने बुजुर्गों को दी राहत
पेंशन सुधारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि फेस रिकग्निशन आधारित डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट ने लाखों वरिष्ठ पेंशनरों को कार्यालयों के चक्कर लगाने से मुक्ति दिलाई है।
इसके साथ ही पेंशन अदालत, पेंशन शिकायत निवारण प्रणाली और ‘अनुभव’ मंच जैसी पहलें भी पेंशनरों के लिए लाभकारी साबित हुई हैं।
विकसित भारत 2047 की मजबूत नींव
अपने संबोधन के अंत में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बीते 12 वर्षों की उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि जब शासन व्यवस्था भरोसे, तकनीक और नागरिक-प्रथम सोच पर आधारित होती है, तो वह राष्ट्रीय परिवर्तन का सशक्त माध्यम बन जाती है।
उन्होंने कहा कि भारत प्रशासनिक प्रक्रियाओं से आगे बढ़कर उत्तरदायी शासन की दिशा में सफलतापूर्वक अग्रसर है और यही यात्रा विकसित भारत 2047 की मजबूत नींव तैयार कर रही है।
COMMENTS