फिरोजाबाद जिले की बैंक ऑफ इंडिया शाखा में उस समय हड़कंप मच गया जब वीडियोग्राफी के बीच खोले गए लॉकर से गोल्ड लोन के 96 पैकेट गायब मिले। करोड़ों रुपये के इस संभावित घोटाले में बैंक के तीन कर्मचारियों पर FIR दर्ज की गई है। पुलिस कई स्थानों पर छापेमारी कर आरोपियों और गायब सोने की तलाश कर रही है।
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले से सामने आया एक मामला बैंकिंग व्यवस्था और ग्राहकों के भरोसे पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। बैंक ऑफ इंडिया की भरौल शाखा में ग्राहकों द्वारा गोल्ड लोन के लिए गिरवी रखा गया सोना रहस्यमय तरीके से गायब हो गया। जब बैंक अधिकारियों ने वीडियोग्राफी के बीच लॉकर खोला तो अंदर का दृश्य देखकर सभी हैरान रह गए। जांच में पता चला कि लॉकर में रखे गए सोने के 96 पैकेट गायब हैं।
मामला सामने आने के बाद बैंक प्रबंधन में हड़कंप मच गया और तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने बैंक के तीन कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कर्मचारी के अचानक गायब होने से शुरू हुआ शक
जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब बैंक शाखा में लॉकर संचालन से जुड़े कार्य प्रभावित होने लगे। बैंक अधिकारियों के मुताबिक शाखा में लॉकर की मुख्य चाबी रखने वाले कर्मचारी दिलीप कुमार 27 मई 2026 से बिना किसी सूचना के अनुपस्थित चल रहे थे।
दिलीप कुमार इटावा जिले के बासगांव गांव के निवासी बताए जा रहे हैं। कई दिनों तक उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। लगातार संपर्क न होने और उनके अचानक गायब हो जाने से बैंक अधिकारियों को संदेह हुआ।
इसके बाद मामले की जानकारी बैंक ऑफ इंडिया के आगरा क्षेत्रीय कार्यालय को दी गई।
क्षेत्रीय कार्यालय ने भेजी विशेष टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए आगरा क्षेत्रीय कार्यालय ने 15 जून को विशेष जांच टीम भरौल शाखा भेजी।
इस टीम में घिरोर शाखा के वरिष्ठ सुरक्षा प्रबंधक अंकित तथा वरिष्ठ प्रबंधक (सुरक्षा) सुशील कुमार शामिल थे। दोनों अधिकारियों ने शाखा पहुंचकर रिकॉर्ड और लॉकर की स्थिति का निरीक्षण किया।
जब प्राथमिक जांच में संदेह और गहरा हुआ तो लॉकर खोलने का निर्णय लिया गया।
वीडियोग्राफी के बीच खोला गया लॉकर
बैंक अधिकारियों ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी रखने के लिए दूसरी चाबी की व्यवस्था की। इसके बाद बैंक के पैनल अधिवक्ता शिव कुमार शर्मा की मौजूदगी में वीडियोग्राफी कराते हुए लॉकर खोला गया।
लॉकर खुलते ही वहां मौजूद अधिकारियों के होश उड़ गए।
जांच में पाया गया कि गोल्ड लोन के तहत ग्राहकों द्वारा जमा कराए गए सोने के कुल 96 पैकेट लॉकर से गायब हैं।
बताया जा रहा है कि ये पैकेट विभिन्न ग्राहकों द्वारा बैंक में गिरवी रखे गए थे और बैंक की अभिरक्षा में सुरक्षित रखे जाने थे।
कितने करोड़ का है मामला?
एफआईआर में फिलहाल गायब सोने का कुल वजन या बाजार मूल्य दर्ज नहीं किया गया है।
हालांकि बैंक अधिकारियों और जांच एजेंसियों का अनुमान है कि गायब सोने की कीमत करोड़ों रुपये में हो सकती है।
चूंकि गोल्ड लोन के तहत जमा सोना आमतौर पर उच्च शुद्धता वाला होता है, इसलिए 96 पैकेट सोने का मूल्य काफी बड़ा माना जा रहा है।
पुलिस अब बैंक रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि गायब सोने का वास्तविक वजन और कुल कीमत कितनी है।
तीन कर्मचारियों पर दर्ज हुई FIR
बैंक ऑफ इंडिया के आगरा क्षेत्रीय कार्यालय के मुख्य प्रबंधक आदित्य प्रताप सिंह की शिकायत पर अरांव थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।
एफआईआर में जिन लोगों को नामजद किया गया है, उनमें—
- पूर्व शाखा प्रबंधक संदीप यादव
- कर्मचारी अधिकारी दिलीप कुमार
- क्रेडिट अधिकारी एवं कर्मचारी अधिकारी नरेश कुमार
शामिल हैं।
नरेश कुमार हाथरस जिले के निवासी बताए गए हैं।
पुलिस अब इन तीनों की भूमिका की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि सोना कब और कैसे गायब हुआ।
क्या यह सुनियोजित साजिश थी?
जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह एक सुनियोजित हेराफेरी थी या फिर बैंक की आंतरिक सुरक्षा में किसी बड़ी चूक का परिणाम।
लॉकर तक पहुंच रखने वाले कर्मचारियों, चाबी प्रबंधन प्रणाली, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, लॉकर संचालन रजिस्टर और बैंक के डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगा रही है कि कहीं सोना धीरे-धीरे निकालकर गायब तो नहीं किया गया।
गायब कर्मचारी पर सबसे ज्यादा शक
जांच में फिलहाल सबसे अधिक संदेह उस कर्मचारी पर जताया जा रहा है जो मुख्य चाबी धारक था और पिछले कई दिनों से लापता है।
बैंक अधिकारियों के अनुसार उसके अचानक गायब होने और संपर्क में न आने के कारण संदेह और गहरा गया है।
हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
पुलिस की कई टीमें कर रहीं छापेमारी
अरांव थाना प्रभारी ऋषि कुमार ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच शुरू कर दी गई है।
निगरानी इकाई सहित पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं।
आरोपियों का पता लगाने और गायब सोना बरामद करने के लिए विभिन्न जिलों में लगातार छापेमारी की जा रही है।
पुलिस बैंक के वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों के लेनदेन की भी जांच कर रही है।
ग्राहकों में बढ़ी चिंता
घटना के सामने आने के बाद बैंक ग्राहकों में चिंता का माहौल है।
गोल्ड लोन लेने वाले कई ग्राहक अपने गिरवी रखे गए आभूषणों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
बैंक प्रबंधन ने भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों रुपये मूल्य का सोना आखिर गया कहां?
क्या यह बैंकिंग इतिहास के बड़े गोल्ड घोटालों में से एक साबित होगा, या जांच में कोई नया मोड़ सामने आएगा?
इन सवालों के जवाब पुलिस जांच और बैंक की आंतरिक पड़ताल पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेंगे।
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