हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी के टॉरपीडो हमले से ईरान का जंगी जहाज डूब गया, जिसमें 80 सैनिकों की मौत हुई है। वहीं इजरायल ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर भारी बमबारी करते हुए 5000 से ज्यादा घातक बम गिराए हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कई देशों ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालना शुरू कर दिया है।
मिडिल ईस्ट और वेस्ट एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बीच ईरान पर बड़े हमले हुए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। इस बीच एक बड़ी खबर सामने आई है कि अमेरिका ने हिंद महासागर में टॉरपीडो हमला कर ईरान के एक जंगी जहाज को डुबो दिया है। इस हमले में कम से कम 80 सैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है।
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के अनुसार यह हमला श्रीलंका के पास हिंद महासागर में किया गया। उन्होंने बताया कि अमेरिकी पनडुब्बी ने सटीक टॉरपीडो से ईरान के युद्धपोत को निशाना बनाया। बताया जा रहा है कि इस जहाज पर करीब 140 लोग सवार थे, जिनमें से अब तक 80 सैनिकों के शव बरामद किए जा चुके हैं। पेंटागन ने इस हमले का वीडियो भी जारी किया है, जिसे बेहद भयावह बताया जा रहा है। हेगसेथ ने कहा कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है और आने वाले समय में और बड़े हमले हो सकते हैं।
दूसरी ओर इजरायल ने भी ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को तेज कर दिया है। इजरायली सेना ने शनिवार से अब तक ईरान पर 5000 से ज्यादा घातक बम और गोले दागे हैं। इन हमलों का मुख्य निशाना राजधानी तेहरान के सैन्य ठिकाने हैं।

इजरायली सेना ने बताया कि पूर्वी तेहरान में एक बड़े सुरक्षा परिसर को निशाना बनाया गया, जहां इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड, खुफिया निदेशालय, बासिज अर्धसैनिक बल और ईरान की साइबर इकाई के मुख्यालय स्थित थे। इस हमले में 100 से ज्यादा लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया और 250 से अधिक बम गिराए गए।
इसी बीच इजरायली सैनिकों ने लेबनान की सीमा में घुसपैठ भी की है और वहां के कई गांवों में जमीनी सैन्य अभियान चलाया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है।
ईरान के भीतर भी हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पड़ोसी देशों को संदेश देते हुए कहा है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान के पास कड़ा जवाब देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। इसी के तहत ईरान ने इजरायल की ओर कई मिसाइलें दागी हैं। स्थिति को देखते हुए पूरे ईरान में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं।
पिछले पांच दिनों में इस संघर्ष में मरने वालों की संख्या 1100 से ज्यादा हो चुकी है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार कई शहरों में भारी तबाही हुई है।
इस बीच तुर्किये ने दावा किया है कि ईरान से दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को नाटो के एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र में मार गिराया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उस मिसाइल का असली लक्ष्य क्या था।
क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच कतर के प्रधानमंत्री ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत कर हमलों को तुरंत रोकने की अपील की है।

वहीं लेबनान में भी इजरायल के हमले जारी हैं। हिज्बुल्लाह ने इजरायल के हाइफा शहर पर हमला किया, जिसके बाद हाइफा और तेल अवीव में सायरन बजने लगे। इजरायली सेना ने उत्तरी सीमा और गोलान हाइट्स के फ्रंटलाइन इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का निर्देश दिया है।
इस पूरे संकट के बीच कई देश अपने नागरिकों को मिडिल ईस्ट से निकालने में जुट गए हैं। अमेरिका ने अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए चार्टर्ड फ्लाइट शुरू कर दी हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार 28 फरवरी से अब तक 17,500 से ज्यादा अमेरिकी नागरिकों को क्षेत्र से निकाला जा चुका है।
कुवैत में ईरान के शाहेद ड्रोन हमले में अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद पेंटागन ने मिडिल ईस्ट में अतिरिक्त एयर डिफेंस सिस्टम तैनात करने का फैसला किया है। खास तौर पर काउंटर-ड्रोन सिस्टम तेजी से क्षेत्र में भेजे जा रहे हैं।
इसी दौरान अमेरिका ने कैलिफोर्निया के वैंडनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से मिनटमैन-III इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण भी किया है। यह परमाणु क्षमता वाली मिसाइल हजारों किलोमीटर दूर तक लक्ष्य को निशाना बना सकती है और इसे अमेरिका की न्यूक्लियर डिटरेंस रणनीति का अहम हिस्सा माना जाता है।
उधर अमेरिका की सीनेट में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य कार्रवाई को सीमित करने वाला प्रस्ताव भी गिर गया। यह प्रस्ताव 53 के मुकाबले 47 वोट से खारिज हो गया।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ईरान अमेरिका के खिलाफ अपने अपराधों की कीमत अब खून से चुका रहा है।
इस बीच वैश्विक तनाव को देखते हुए चीन ने भी 2026 के लिए अपने रक्षा बजट में 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य संघर्ष ने पूरी दुनिया की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
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