नोएडा हिंसा के बाद पुलिस जांच में बड़ा खुलासा—सोशल मीडिया, कॉल सेंटर और फंडिंग के जरिए भड़काया गया था बवाल, 50 हैंडलर्स चिन्हित।
गौतमबुद्धनगर में 13 अप्रैल को हुए व्यापक हिंसक बवाल के बाद अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन इस घटना के पीछे जो साजिश सामने आ रही है, उसने प्रशासन और आमजन दोनों को चौंका दिया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि इस पूरे उपद्रव को सुनियोजित तरीके से सोशल मीडिया, कॉल सेंटर नेटवर्क और फंडिंग के जरिए भड़काया गया था।
घटना के अगले ही दिन पुलिस कमिश्नर श्रीमती लक्ष्मी सिंह के नेतृत्व में पूरे जिले में व्यापक स्तर पर फ्लैग मार्च किया गया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी ने न केवल स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखा, बल्कि लोगों में सुरक्षा और विश्वास का माहौल भी स्थापित किया। संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है और पुलिस लगातार गश्त कर रही है।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि करीब 50 सोशल मीडिया हैंडलर्स की पहचान की गई है, जिन्होंने विभिन्न प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भड़काऊ संदेश, झूठी सूचनाएं और अफवाहें फैलाकर माहौल को खराब किया। ये हैंडलर्स अलग-अलग स्थानों से ऑपरेट कर रहे थे और एक संगठित नेटवर्क के तहत काम कर रहे थे।

जांच में यह भी सामने आया है कि कॉल सेंटर के जरिए लोगों तक सीधे संपर्क कर उन्हें गुमराह किया गया। फोन कॉल्स के माध्यम से भ्रामक जानकारी दी गई, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ा और बड़ी संख्या में श्रमिक सड़कों पर उतर आए। यह एक बेहद संगठित और योजनाबद्ध तरीका था, जिसने प्रशासन को भी सतर्क कर दिया है।
सबसे चौंकाने वाला पहलू इस पूरे घटनाक्रम में फंडिंग का सामने आना है। पुलिस को ऐसे संकेत मिले हैं कि उपद्रव को भड़काने के लिए आर्थिक मदद भी दी गई थी। विभिन्न स्रोतों से धन जुटाकर इस नेटवर्क को सक्रिय किया गया, जिससे यह आंदोलन अचानक इतना व्यापक और उग्र रूप ले सका।
गौरतलब है कि 13 अप्रैल को लगभग 40 से 45 हजार श्रमिक और मजदूर विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में एकत्र होकर सड़कों पर उतर आए थे। देखते ही देखते यह भीड़ उग्र हो गई और कमिश्नरेट के 80 से अधिक स्थानों पर उत्पात और उपद्रव की घटनाएं सामने आईं। कई जगहों पर यातायात बाधित हुआ और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई।

स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब सेक्टर-63 के दो स्थानों और मदरसन कंपनी परिसर के आसपास आगजनी की घटनाएं हुईं। हिंसक प्रदर्शन के कारण पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। उपद्रवियों ने समूह बनाकर सड़कों को जाम किया और प्रशासन को चुनौती देने की कोशिश की।
हालांकि, पुलिस प्रशासन ने अत्यंत संयम, धैर्य और सूझबूझ का परिचय देते हुए स्थिति को संभाला। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में जोनल पुलिस, थाना पुलिस, फायर सर्विस और अन्य संबंधित विभागों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर हालात को नियंत्रित करने की कार्रवाई शुरू की। भीड़ को समझाने और शांतिपूर्ण तरीके से हटाने का प्रयास किया गया।
फायर सर्विस की मदद से आगजनी की घटनाओं पर जल्द ही काबू पा लिया गया। कुछ स्थानों पर अराजक तत्वों ने दोबारा समूह बनाकर उपद्रव करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की सतर्कता के चलते इन प्रयासों को विफल कर दिया गया। पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस ने न्यूनतम बल प्रयोग की नीति अपनाई और आमजन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

अब तक इस मामले में कमिश्नरेट के विभिन्न थानों में 7 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं और कई असामाजिक तत्वों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस उपद्रव में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी हुई है और उनके खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
वर्तमान में गौतमबुद्धनगर में स्थिति पूरी तरह सामान्य है और शांति व्यवस्था कायम है। पुलिस प्रशासन संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर बनाए हुए है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पूरी तरह सतर्क है।
प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। साथ ही, शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करने की अपील भी की गई है।
यह घटना एक बड़ा संकेत है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और संगठित नेटवर्क के जरिए किस तरह से हालात को प्रभावित किया जा सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है और क्या पुलिस इस साजिश की जड़ तक पहुंच पाएगी। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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