कानपुर दौरे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में कानपुर मंडल के छह जिलों से प्राप्त 11,724 करोड़ रुपये की 1,374 विकास परियोजनाओं पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों को प्राथमिकता देने, लंबित परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और लापरवाही बरतने वाली फर्मों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
उत्तर प्रदेश में विकास कार्यों को गति देने और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानपुर मंडल में लोक निर्माण विभाग (PWD) की विस्तृत समीक्षा बैठक की। एचबीटीयू परिसर स्थित संयुक्त आयुक्त कार्यालय के उद्योग सभागार में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए गए विकास प्रस्तावों को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर संकलित कर शीघ्र शासन को भेजा जाए, ताकि समयबद्ध तरीके से स्वीकृतियां प्रदान कर विकास कार्यों को धरातल पर उतारा जा सके।
बैठक में कानपुर नगर, कानपुर देहात, कन्नौज, इटावा, औरैया और फर्रुखाबाद के जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप सड़क, पुल, संपर्क मार्ग, फ्लाईओवर तथा अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं के प्रस्ताव प्रस्तुत किए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, सामाजिक आवश्यकताओं और विकास की वास्तविक जरूरतों से भलीभांति परिचित होते हैं। ऐसे में उनके सुझाव और प्रस्ताव विकास योजनाओं की दिशा तय करने में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी प्रस्तावों को गंभीरता से लिया जाए और जनप्रतिनिधियों द्वारा निर्धारित प्राथमिकता क्रम के अनुसार कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजी जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्यों में जनता की अपेक्षाओं और स्थानीय आवश्यकताओं का समुचित ध्यान रखा जाना चाहिए।
जनहित की परियोजनाओं को मिले प्राथमिकता
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़ी परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति दी जाए और उनके क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की देरी न हो। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण, पुल, रेलवे ओवरब्रिज (ROB), रेलवे अंडरब्रिज (RUB), मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना तथा धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाले संपर्क मार्गों जैसी योजनाएं आम जनता के जीवन को सीधे प्रभावित करती हैं।
इसलिए इन परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
सड़कों को नुकसान पहुंचाने वालों से होगी क्षतिपूर्ति वसूली
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक निर्माण विभाग की संपत्तियों की सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिन व्यक्तियों, संस्थाओं अथवा एजेंसियों द्वारा सड़कों को नुकसान पहुंचाया जाता है, उनसे नियमानुसार क्षतिपूर्ति की वसूली सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित की जाए और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

विकास कार्यों में देरी बर्दाश्त नहीं
मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी परियोजनाओं को गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ पूरा किया जाए।
उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि भूमि पूजन और शिलान्यास जैसे कार्यक्रमों में संबंधित सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों की सहभागिता अनिवार्य रूप से रहे, ताकि जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय मजबूत हो।
छह जिलों से आए 11,724 करोड़ रुपये के प्रस्ताव
बैठक में मुख्यमंत्री को बताया गया कि कानपुर मंडल के छह जनपदों से कुल 11,724 करोड़ रुपये की लागत वाली 1,374 विकास परियोजनाओं के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
जिलावार प्रस्तावों का विवरण इस प्रकार है—
- कानपुर नगर – 5,523 करोड़ रुपये की 344 परियोजनाएं
- कन्नौज – 2,058 करोड़ रुपये की 217 परियोजनाएं
- फर्रुखाबाद – 2,016 करोड़ रुपये की 339 परियोजनाएं
- कानपुर देहात – 1,581 करोड़ रुपये की 387 परियोजनाएं
- औरैया – 439 करोड़ रुपये की 33 परियोजनाएं
- इटावा – 104 करोड़ रुपये की 54 परियोजनाएं
इन प्रस्तावों में सड़क निर्माण, पुल निर्माण, फ्लाईओवर, संपर्क मार्गों के विस्तार, ग्रामीण सड़क नेटवर्क और यातायात सुधार से जुड़ी परियोजनाएं प्रमुख रूप से शामिल हैं।

पिछली कार्ययोजना की भी हुई समीक्षा
मुख्यमंत्री ने केवल आगामी योजनाओं की समीक्षा ही नहीं की, बल्कि पिछले वित्तीय वर्ष में स्वीकृत परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट भी तलब की।
अधिकारियों ने उन्हें अवगत कराया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कानपुर मंडल में 5,497 करोड़ रुपये की लागत से 2,301 परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई थी।
इनमें से 1,242 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि शेष परियोजनाओं पर कार्य जारी है। मुख्यमंत्री ने इन परियोजनाओं की प्रगति पर संतोष जताते हुए लंबित कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।
लापरवाह फर्मों पर सख्त कार्रवाई के आदेश
बैठक का सबसे सख्त संदेश उन निर्माण एजेंसियों और फर्मों के लिए रहा, जिन्होंने निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद कार्य प्रारंभ नहीं किया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों की पहचान कर संबंधित फर्मों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जरूरत पड़ने पर ऐसी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया जाए और उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया भी अपनाई जाए।
मुख्यमंत्री का यह रुख साफ संकेत देता है कि प्रदेश सरकार अब विकास कार्यों में लापरवाही और देरी को किसी भी कीमत पर स्वीकार करने के मूड में नहीं है।

कई मंत्री और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद
बैठक में प्रदेश सरकार के मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, राकेश सचान, असीम अरुण, अजीत पाल और प्रतिभा शुक्ला सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
इसके अलावा सांसद रमेश अवस्थी तथा विधायक नीलिमा कटियार, सुरेंद्र मैथानी, अभिजीत सिंह सांगा, महेश त्रिवेदी, राहुल बच्चा सोनकर, सुरभि, सरोज कुरील और अर्चना पांडेय समेत अनेक जनप्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्रों की विकास आवश्यकताओं से संबंधित सुझाव मुख्यमंत्री के समक्ष रखे।
विकास की नई दिशा तय करने वाली बैठक
कानपुर मंडल में आयोजित यह समीक्षा बैठक केवल परियोजनाओं की संख्या और बजट तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने यह स्पष्ट संदेश भी दिया कि उत्तर प्रदेश सरकार विकास कार्यों को जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं और जनता की जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ाना चाहती है। 11,724 करोड़ रुपये की विशाल विकास योजनाओं पर चर्चा और समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश आने वाले वर्षों में कानपुर मंडल के आधारभूत ढांचे को नई दिशा देने वाले साबित हो सकते हैं।
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