उत्तर प्रदेश में गोबर आधारित कम्पोस्ट और बायोगैस को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ा रोडमैप तैयार किया है। किसानों की आय बढ़ाने और जैविक खेती को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
लखनऊ से एक अहम पहल सामने आई है, जहां योगी सरकार अब गोबर को ‘वेस्ट’ नहीं बल्कि ‘वेल्थ’ बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है।
सोमवार को विधानसभा स्थित समिति कक्ष 44-ख में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में प्रदेश के पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने अधिकारियों को गोबर आधारित कम्पोस्ट, बायोगैस, जीवामृत और घनामृत के उत्पादन, उपयोग और विपणन को लेकर व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
‘गौशालाएं बनें आत्मनिर्भर उत्पादन केंद्र’
मंत्री धर्मपाल सिंह ने साफ कहा कि प्रदेश की गौशालाओं को सिर्फ संरक्षण केंद्र नहीं, बल्कि उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।
उन्होंने निर्देश दिए कि गौशालाओं में कम्पोस्ट, जीवामृत और अन्य जैविक उत्पादों का उत्पादन बढ़ाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए, जिससे न केवल पर्यावरण को फायदा होगा बल्कि किसानों की आय में भी इजाफा होगा।

जैविक खेती को मिलेगा बड़ा बल
मंत्री ने कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता को फिर से मजबूत करना है।
उन्होंने बताया कि गोबर खाद के इस्तेमाल से मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ता है, जिससे खेती की उत्पादकता लंबे समय तक बनी रहती है।
इसके जरिए रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता भी कम की जा सकती है।
लाखों मीट्रिक टन उत्पादन की क्षमता
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि प्रदेश में गोबर आधारित कम्पोस्ट उत्पादन की क्षमता लाखों मीट्रिक टन तक पहुंच सकती है।
इसके लिए गौशालाओं, डेयरी इकाइयों और किसानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की जरूरत बताई गई।

सफल मॉडल्स को पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी
मंत्री ने झांसी, चंदौली, फर्रुखाबाद, कानपुर और बाराबंकी जैसे जिलों में चल रहे सफल बायोगैस और जैविक खाद मॉडलों का जिक्र किया।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन मॉडलों का अध्ययन कर पूरे प्रदेश में लागू किया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों को इसका लाभ मिल सके।
बायोगैस से ऊर्जा और खाद—दोहरा फायदा
बैठक में कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) संयंत्रों के विस्तार और गोबर गैस प्लांट्स की स्थापना पर भी चर्चा हुई।
मंत्री ने कहा कि बायोगैस से जहां ऊर्जा की जरूरतें पूरी होंगी, वहीं इससे निकलने वाली स्लरी खेतों के लिए बेहतरीन जैविक खाद का काम करेगी।
इससे किसानों को एक साथ दोहरा लाभ मिलेगा—ऊर्जा और उर्वरक दोनों।


गुणवत्ता और मार्केटिंग पर खास फोकस
मंत्री धर्मपाल सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गोबर आधारित खाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उसका मानकीकरण किया जाए।
उन्होंने कहा कि पैकेजिंग, नमी स्तर और गुणवत्ता के स्पष्ट मानक तय किए जाएं ताकि किसानों को भरोसेमंद उत्पाद मिल सके।
इसके साथ ही सहकारी समितियों के जरिए गोबर खाद की उपलब्धता बढ़ाने और इसके प्रभावी विपणन की व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
वैज्ञानिकों और संस्थानों को जोड़ने की योजना
सरकार ने इस योजना को और प्रभावी बनाने के लिए कृषि विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिकों और कृषि विज्ञान केंद्रों को भी जोड़ने का फैसला किया है।
मंत्री ने निर्देश दिए कि सरल और कम लागत वाले मॉडल विकसित किए जाएं ताकि छोटे किसान भी आसानी से इस योजना का लाभ उठा सकें।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
मंत्री ने कहा कि यह पहल सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।
गोबर आधारित उत्पादों के इस्तेमाल से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित होगी।
COMMENTS