Wednesday, June 24, 2026

लखनऊ अग्निकांड के बाद यूपी में चला ‘सुरक्षा का शिकंजा’! 48 से ज्यादा संस्थान सील, सैकड़ों पर कार्रवाई जारी

15 मौतों के बाद मचा हड़कंप! यूपी में खुलने लगीं सुरक्षा की परतें, कितनी इमारतें बनीं मौत का जाल?

New Delhi , Latest Updated On - Jun 24 2026 | 15:14:00 PM
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लखनऊ के अलीगंज में 22 जून 2026 को हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे उत्तर प्रदेश को झकझोर दिया। 15 लोगों की दर्दनाक मौत के बाद सरकार ने राज्यव्यापी फायर सेफ्टी ऑडिट शुरू किया है। जांच के दौरान कई जिलों में कोचिंग सेंटर, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, अस्पताल और अन्य भवन सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करते पाए गए। अब तक कम से कम 48 संस्थानों को सील किया जा चुका है, जबकि कई अन्य पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है।

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लखनऊ के अलीगंज में हुए दर्दनाक अग्निकांड की आग भले ही बुझ चुकी हो, लेकिन उसके बाद उठे सवाल अब भी धधक रहे हैं। 22 जून 2026 को एक व्यावसायिक भवन में लगी आग ने 15 लोगों की जान ले ली। इस हादसे ने न केवल प्रशासन बल्कि पूरे प्रदेश को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर कितनी ऐसी इमारतें हैं जहां लोग रोजाना अपनी जान जोखिम में डालकर आते-जाते हैं।

हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे प्रदेश में व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट और जांच अभियान के निर्देश दिए। इसके बाद प्रशासनिक और अग्निशमन विभाग की टीमें मैदान में उतरीं और जो तस्वीर सामने आई, उसने सभी को चौंका दिया।

हादसे वाली इमारत पर पहली कार्रवाई

अलीगंज में जिस तीन मंजिला व्यावसायिक भवन में आग लगी थी, उसे तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया। भवन मालिकों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। साथ ही लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को देखते हुए ध्वस्तीकरण नोटिस भी जारी कर दिया।


जांच में यह भी देखा जा रहा है कि निर्माण स्वीकृति, फायर एनओसी और सुरक्षा प्रावधानों में कहीं अधिकारियों की लापरवाही तो नहीं रही।

पूरे प्रदेश में शुरू हुआ मेगा ऑडिट अभियान

अलीगंज हादसे के बाद लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, मेरठ, अलीगढ़ और मथुरा समेत कई जिलों में विशेष अभियान शुरू किया गया।

टीमें कोचिंग सेंटर, अस्पताल, होटल, मॉल, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और सार्वजनिक उपयोग वाली इमारतों का निरीक्षण कर रही हैं। फायर एनओसी, आपातकालीन निकास, अग्निशमन उपकरण, भवन मानचित्र और सुरक्षा मानकों की गहन जांच की जा रही है।

अब तक कितने संस्थान सील हुए?

उपलब्ध प्रशासनिक और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 24 जून 2026 तक प्रदेश में कम से कम 48 कोचिंग सेंटर और व्यावसायिक संस्थानों को सील किए जाने की पुष्टि हुई है। हालांकि कई जिलों में कार्रवाई जारी है और यह संख्या लगातार बढ़ सकती है।

कानपुर में सबसे बड़ी कार्रवाई

फायर सेफ्टी जांच में सबसे ज्यादा कार्रवाई कानपुर के काकादेव क्षेत्र में देखने को मिली। यहां बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान संचालित होते हैं।

प्रारंभिक रिपोर्टों में 16 संस्थानों पर कार्रवाई की बात सामने आई थी, जो बाद में बढ़कर 22 और फिर लगभग 30 संस्थानों तक पहुंच गई। प्रशासन ने अवैध निर्माण, फायर सुरक्षा में कमी और भवन नियमों के उल्लंघन को कार्रवाई का आधार बनाया।


कुछ रिपोर्टों में प्रसिद्ध कोचिंग ब्रांड फिजिक्स वाला के एक परिसर का भी उल्लेख किया गया है, हालांकि प्रशासन ने सभी संस्थानों की विस्तृत सूची सार्वजनिक नहीं की है।

नोएडा में भी चला प्रशासन का शिकंजा

गौतमबुद्ध नगर में संयुक्त जांच टीम ने कई कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया।

जांच के दौरान सेक्टर-149 स्थित ओम एजुकेशन कोचिंग सेंटर में आवश्यक पंजीकरण और फायर एनओसी नहीं मिली। इसके बाद उसे तत्काल सील कर दिया गया।

इसी प्रकार सेक्टर-49 स्थित बसु कोचिंग सेंटर को भी बिना वैध पंजीकरण के संचालन के कारण सील कर दिया गया।

इसके अलावा विक्टर कोचिंग सेंटर और साई विनायक इंस्टीट्यूट ऑफ स्टडीज निरीक्षण के दौरान बंद पाए गए। प्रशासन ने दोनों संस्थानों को नोटिस जारी कर निर्धारित समय में दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

गाजियाबाद में भी बड़ी संख्या में प्रतिष्ठान बंद

गाजियाबाद में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान कोचिंग सेंटर, प्ले स्कूल, क्लीनिक और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच की गई।

रिपोर्टों के अनुसार यहां लगभग 56 प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की कार्रवाई की गई है। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक सभी संस्थानों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

प्रयागराज, वाराणसी और मथुरा में भी कार्रवाई

प्रयागराज में 93 कोचिंग संस्थानों की जांच की गई, जिनमें से 3 संस्थानों को सील कर दिया गया।

वाराणसी में 2 और मथुरा में 1 कोचिंग संस्थान को सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के कारण बंद कराया गया।


क्या-क्या खामियां मिलीं?

जांच के दौरान कई गंभीर कमियां सामने आईं—

  • फायर एनओसी का अभाव
  • आपातकालीन निकास मार्ग बंद होना
  • अग्निशमन उपकरणों का अनुपयोगी होना
  • भवन मानचित्र के विपरीत निर्माण
  • बेसमेंट का अवैध उपयोग
  • क्षमता से अधिक लोगों की उपस्थिति
  • सुरक्षा प्रशिक्षण का अभाव

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसी इमारतों में आग लगती तो हालात अलीगंज से भी ज्यादा भयावह हो सकते थे।

सरकार का सख्त संदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जन सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। बिना वैध अनुमति और सुरक्षा मानकों के संचालन करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि फायर सेफ्टी ऑडिट केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि वास्तविक स्थिति का आकलन कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

प्रशासन का कहना है कि यह अभियान अभी जारी है। सैकड़ों अन्य इमारतें जांच के दायरे में हैं। आने वाले दिनों में और संस्थानों पर कार्रवाई हो सकती है।

अलीगंज की त्रासदी ने एक बार फिर यह याद दिला दिया है कि सुरक्षा नियम केवल कागजों पर नहीं, जमीन पर भी लागू होने चाहिए। क्योंकि जब लापरवाही आग बनकर भड़कती है, तो उसकी कीमत इंसानी जानों से चुकानी पड़ती है।

अब पूरा प्रदेश इस अभियान पर नजर बनाए हुए है और लोगों को उम्मीद है कि यह कार्रवाई सिर्फ कुछ दिनों की कवायद न होकर सुरक्षा व्यवस्था में स्थायी सुधार का कारण बनेगी।

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