अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दान (चढ़ावे) में कथित गबन का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। SIT की जांच के बाद दर्ज एफआईआर में आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच एजेंसियों के अनुसार अब तक करीब 79.85 लाख रुपये बरामद किए गए हैं, जबकि बैंक कर्मचारियों समेत अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है। इस बीच ट्रस्ट स्तर पर भी प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं।
करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दान (चढ़ावे) में कथित गबन का मामला अब केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक, धार्मिक और राजनीतिक स्तर पर भी व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर दर्ज एफआईआर के बाद अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है, जबकि जांच लगातार नए पहलुओं की ओर बढ़ रही है।
7 जून को सामने आया मामला, 13 जून को बनी SIT
राम मंदिर के दान में कथित अनियमितताओं का मामला सबसे पहले 7 जून को सामने आया। मामला सार्वजनिक होने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। जांच टीम ने कई दिनों तक रिकॉर्ड, नकदी प्रबंधन और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ की।
23 जून को SIT ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई तेज हुई और दो दिन बाद आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में टिन्नू, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ आरोपियों के बीच पारिवारिक और निकट संबंध हैं। अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा के जीजा बताए जा रहे हैं और दोनों का संबंध अनिल मिश्रा के परिवार से बताया गया है। वहीं मनीष यादव, टिन्नू यादव का भतीजा है। जांच एजेंसियां इन संबंधों के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।
करीब 79.85 लाख रुपये बरामद होने का दावा
सूत्रों के मुताबिक, जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि सात आरोपियों की निशानदेही पर अब तक करीब 79.84 से 79.85 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं। हालांकि आठवें आरोपी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव के पास से कोई नकदी बरामद नहीं हुई है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि वह कथित साजिश का हिस्सा था।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी टिन्नू के पास कैश काउंटर, दान पेटियों और नोट गिनने वाले हॉल की चाबियां रहती थीं। शुरुआती जांच के अनुसार दान की गिनती के दौरान नोटों के बंडलों में कथित हेराफेरी कर रकम का गबन किया गया।
रिमांड की तैयारी, बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
पुलिस अब आरोपियों की रिमांड लेने की तैयारी कर रही है ताकि उनसे गहन पूछताछ की जा सके। सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां कुछ बैंक कर्मचारियों की संभावित भूमिका की भी जांच कर रही हैं। यदि जांच में उनके खिलाफ कोई साक्ष्य मिलता है तो उनसे भी पूछताछ की जाएगी।

अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और नकदी की बरामदगी तथा नए तथ्य सामने आ सकते हैं।
ट्रस्ट ने बदली गोपाल राव की जिम्मेदारी
सूत्रों के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने गोपाल राव को मंदिर परिसर के अंदर की व्यवस्थाओं से हटाकर बाहरी व्यवस्थाओं की निगरानी की जिम्मेदारी सौंप दी है। बताया जा रहा है कि कथित दान गबन मामले में उन पर भी आरोप लगाए गए हैं। हालांकि उनके खिलाफ जांच की प्रक्रिया जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
चंपत राय और अनिल मिश्रा ने सौंपा इस्तीफा
मामले के लगातार तूल पकड़ने के बीच 19 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे के दौरान ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय कार्यक्रमों से दूर रहे। इसके बाद बढ़ते दबाव के बीच शुक्रवार को चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपना इस्तीफा ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को सौंप दिया। इस्तीफे को लेकर ट्रस्ट की ओर से औपचारिक अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा है।
धार्मिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज
हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है और यदि कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
इसी मुद्दे पर कथा के दौरान बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि जैसे सीता माता का हरण करने वाले रावण का अंत हुआ था, वैसे ही भगवान के मंदिर में चोरी करने वालों को भी ईश्वर के न्याय का सामना करना पड़ेगा।

वहीं कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन का मुद्दा संसद के मानसून सत्र में उठाया जाएगा। उनके अनुसार यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है और सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए।
उधर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि एफआईआर दर्ज हो चुकी है और सरकार निष्पक्ष जांच के पक्ष में है। कानून के अनुसार जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वरिष्ठ अधिवक्ता हरि शंकर जैन ने भी कहा कि जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सामने आएगी और यदि घोटाला हुआ है तो दोषियों को दंड मिलना चाहिए।
जेल में अलग बैरक में रखे गए सभी आरोपी
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार मंडलीय जेल अधीक्षक मुकेश कुमार ने बताया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी आठ आरोपियों को जेल में अलग बैरक में रखा गया है। उनकी सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं और उन्हें अन्य कैदियों से अलग रखा गया है।
जांच अभी जारी है
फिलहाल SIT, पुलिस और संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की जांच में जुटी हैं। जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि कथित गबन की वास्तविक राशि कितनी है, इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही और क्या इस नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल थे। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां, नई बरामदगी या अतिरिक्त खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।
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