Tuesday, May 12, 2026

यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव! पहली ही बैठक में बना 5 साल का मास्टर प्लान

मातृ-शिशु मृत्यु दर से लेकर डिजिटल हेल्थ डैशबोर्ड तक, स्वास्थ्य सेवाओं को हाईटेक बनाने की तैयारी

Bahrampur , Latest Updated On - May 12 2026 | 16:07:00 PM
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लखनऊ में स्टेट हेल्थ सिस्टम रिसोर्स सेंटर (SHSRC-UP) की नवगठित संचालन समिति की पहली बैठक आयोजित हुई। बैठक में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने, डिजिटल हेल्थ डैशबोर्ड, अस्पतालों के डिजिटलीकरण और सस्ती दवाइयों की उपलब्धता जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। अगले पांच वर्षों के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र का रोडमैप तैयार करने पर भी जोर दिया गया।

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उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक, प्रभावी और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार द्वारा गठित स्टेट हेल्थ सिस्टम रिसोर्स सेंटर, उत्तर प्रदेश (SHSRC-UP) की नवगठित संचालन समिति की पहली बैठक सोमवार को लखनऊ में आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने से जुड़े कई अहम विषयों पर गहन चर्चा हुई और भविष्य की कार्ययोजना को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

बैठक की अध्यक्षता स्टेट ट्रांसफॉरमेशन कमीशन, उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री मनोज कुमार सिंह ने की। बैठक में स्वास्थ्य व्यवस्था के डिजिटलीकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार, गुणवत्तापूर्ण दवाइयों की उपलब्धता और अगले पांच वर्षों के हेल्थ रोडमैप पर विशेष फोकस रहा।

मातृ और शिशु मृत्यु दर कम करने पर बड़ा फोकस

बैठक के प्रमुख एजेंडा में मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर और नवजात मृत्यु दर को कम करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करना शामिल रहा।

विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाना बेहद जरूरी है। इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर बड़े सरकारी अस्पतालों तक सेवाओं को मजबूत बनाने पर चर्चा की गई।

बैठक में यह भी माना गया कि मातृ और शिशु स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों की नियमित निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई के जरिए मृत्यु दर में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है।

अस्पतालों के लिए बनेगा डिजिटल डैशबोर्ड

स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अस्पतालों हेतु डिजिटल डैशबोर्ड विकसित करने पर भी चर्चा की गई।

यह डैशबोर्ड राज्य के विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी को रियल टाइम में मॉनिटर करने में मदद करेगा। इसके जरिए मरीजों की संख्या, बेड उपलब्धता, दवाइयों की स्थिति, डॉक्टरों की तैनाती और अन्य आवश्यक आंकड़ों पर नजर रखी जा सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल डैशबोर्ड से स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रशासनिक निर्णय तेजी से लिए जा सकेंगे।

अस्पताल रिकॉर्ड होंगे पूरी तरह डिजिटल

बैठक में अस्पतालों के अभिलेखों के डिजिटलीकरण पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली लागू होने से मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री सुरक्षित रहेगी और उपचार प्रक्रिया अधिक आसान एवं प्रभावी बन सकेगी।

इसके अलावा मरीजों को बार-बार दस्तावेज लेकर अस्पताल आने की परेशानी भी कम होगी। डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड सिस्टम से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को टेक्नोलॉजी आधारित बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।


सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयों पर जोर

बैठक में आम लोगों को न्यूनतम लागत पर गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराने के विषय पर भी गंभीर चर्चा हुई।

विशेषज्ञों ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावशीलता तभी बढ़ेगी जब गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को सस्ती और भरोसेमंद दवाइयां आसानी से उपलब्ध हों।

इसके लिए दवा आपूर्ति प्रणाली को मजबूत करने और सरकारी अस्पतालों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की योजना पर विचार किया गया।

पांच साल का हेल्थ रोडमैप तैयार करने की तैयारी

बैठक में अगले पांच वर्षों के लिए उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र का विस्तृत रोडमैप तैयार करने पर भी विशेष जोर दिया गया।

इस रोडमैप में—

  • स्वास्थ्य जनशक्ति को मजबूत करना
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों में सुधार
  • राज्य स्तरीय केंद्रीकृत डिजिटल डैशबोर्ड विकसित करना
  • ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना
  • अस्पताल प्रबंधन प्रणाली को आधुनिक बनाना

जैसे विषयों को प्राथमिकता देने की बात कही गई।

अधिकारियों का मानना है कि इस रोडमैप के जरिए आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य प्रणाली को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाया जा सकेगा।

SHSRC-UP की संरचना और भर्ती प्रक्रिया पर भी चर्चा

बैठक में SHSRC-UP के बोर्ड ऑफ गवर्नेंस, संचालन समिति, वेबसाइट निर्माण, स्टाफ संरचना और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई अहम निर्णय लिए गए। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि यह केंद्र स्वास्थ्य नीति और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों की रही मौजूदगी

इस महत्वपूर्ण बैठक में स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ विशेषज्ञ एवं अधिकारी मौजूद रहे।

एसएचएसआरसी-यूपी की ओर से एसजीपीजीआईएमएस के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश हर्षवर्धन उपस्थित रहे। इसके अलावा डॉ. नारायण प्रसाद, डॉ. आर.के. सिंह, डॉ. कीर्ति और वित्त अधिकारी ने भी बैठक में भाग लिया।

राज्य सरकार की ओर से चिकित्सा शिक्षा विभाग की विशेष सचिव श्रीमती कृतिका शर्मा, स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव श्री रवि, आईआईएम लखनऊ के प्रो. वेंकट, लखनऊ विश्वविद्यालय के डीन प्रो. अरविंद मोहन तथा आईएमए और एफओजीएसआई के प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल हुए।

स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम

उल्लेखनीय है कि SHSRC-UP का गठन एसजीपीजीआईएमएस, लखनऊ के हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के अंतर्गत किया गया है।

यह केंद्र राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक मजबूत, आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा। अधिकारियों ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में SHSRC-UP के जरिए उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, पहुंच और प्रभावशीलता में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

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