भारत और न्यूजीलैंड के बीच शहद उत्पादन और निर्यात क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। न्यूजीलैंड प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश में शहद उत्पादन और प्रसंस्करण इकाइयों का दौरा कर तकनीकी सहयोग, गुणवत्ता सुधार और निर्यात बढ़ाने पर चर्चा की।
उत्तर प्रदेश में शहद उत्पादन और निर्यात को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ी पहल शुरू हो गई है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच शहद क्षेत्र में तकनीकी सहयोग और निर्यात क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से “हनी एक्शन प्लान” पर तेजी से काम किया जा रहा है। इस योजना के तहत न्यूजीलैंड सरकार और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) संयुक्त रूप से रणनीति तैयार कर रहे हैं।
इसी क्रम में न्यूजीलैंड उच्चायोग के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश का दौरा कर यहां की शहद उत्पादन, प्रसंस्करण और निर्यात व्यवस्थाओं का विस्तृत अध्ययन किया। इस पहल को प्रदेश में मधुमक्खी पालन और कृषि आधारित स्वरोजगार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
न्यूजीलैंड की टीम ने किया यूपी का दौरा
प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख सदस्यों में:
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श्री ईशान जयवर्धन, प्रमुख सलाहकार-व्यापार योजना कार्यान्वयन एवं एमपीआई टीम प्रमुख,
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श्री बायरन पीटर टेलर, मधुमक्खी पालन तकनीकी प्रबंधक,
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सुश्री मेलानी फिलिप्स, कृषि सलाहकार एनजेडएचसी,
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सुश्री प्रियम अरोरा,
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और सुश्री सुदेशना रे शामिल रहीं।
प्रतिनिधिमंडल ने 07 मई 2026 को रायबरेली जिले के शिवगढ़ में निर्माणाधीन “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर हनी” का निरीक्षण किया। यहां आधुनिक तकनीक आधारित शहद उत्पादन और अनुसंधान सुविधाओं को विकसित किया जा रहा है।
इसके बाद टीम ने बाराबंकी में प्रगतिशील मधुमक्खी पालक श्री निमित्त सिंह ‘मधुमक्खीवाला’ की यूनिट का दौरा किया। प्रतिनिधियों ने वहां शहद उत्पादन, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया और स्थानीय स्तर पर अपनाई जा रही तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
मंत्री दिनेश प्रताप सिंह से हुई अहम बैठक
दौरे के बाद शुक्रवार को प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह से प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात हुई।
बैठक के दौरान मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार भारत और न्यूजीलैंड के बीच शहद क्षेत्र में तकनीकी सहयोग और ज्ञान साझा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रायबरेली में निर्माणाधीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर हनी का कार्य जल्द से जल्द पूरा कर इसे शीघ्र संचालित किया जाए ताकि प्रदेश के मधुमक्खी पालकों को आधुनिक सुविधाएं और प्रशिक्षण मिल सके।
यूपी का मधुमक्खी पालक जाएगा न्यूजीलैंड
बैठक में एक बड़ा फैसला लेते हुए मंत्री ने बाराबंकी के प्रगतिशील मधुमक्खी पालक श्री निमित्त सिंह ‘मधुमक्खीवाला’ को 02 जून से 14 जून 2026 तक न्यूजीलैंड भेजने के निर्देश दिए।
इस दौरान उन्हें:
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आधुनिक मधुमक्खी पालन तकनीक,
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वैज्ञानिक शहद उत्पादन,
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गुणवत्ता नियंत्रण,
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और अंतरराष्ट्रीय निर्यात मानकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इससे प्रदेश के अन्य मधुमक्खी पालकों को भी नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरणा मिलेगी।

तकनीकी उन्नयन और निर्यात बढ़ाने पर जोर
इसके बाद उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अपर मुख्य सचिव बीएल मीणा की अध्यक्षता में उद्यान भवन स्थित डास्प सभागार में बैठक आयोजित की गई।
इस दौरान न्यूजीलैंड प्रतिनिधिमंडल ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिए अपने अनुभव साझा किए।
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी:
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उद्यान विभाग के निदेशक,
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यूपीएसएचईबी के नोडल अधिकारी,
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संयुक्त निदेशक उद्यान बीपी राम,
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एपीडा के अधिकारी,
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विभागीय अधिकारी,
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और प्रदेश के प्रमुख शहद निर्यातक मौजूद रहे।
बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई:
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शहद उत्पादन की गुणवत्ता सुधार,
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निर्यात क्षमता बढ़ाना,
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तकनीकी उन्नयन,
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और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्पादन को बढ़ावा देना।
किसानों और युवाओं की आय बढ़ाने की तैयारी
अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश में मधुमक्खी पालन को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
सरकार का लक्ष्य है कि:
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किसान अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें,
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ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार मिले,
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और प्रदेश का शहद अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत पहचान बना सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि “हनी एक्शन प्लान” सफलतापूर्वक लागू होता है तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश शहद उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।
वैश्विक बाजार में यूपी के शहद की एंट्री की तैयारी
न्यूजीलैंड जैसे देश के साथ तकनीकी साझेदारी को प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे न केवल उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर होगी बल्कि किसानों को वैश्विक बाजार तक पहुंचने का अवसर भी मिलेगा।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि यह साझेदारी प्रदेश के शहद उद्योग को कितनी नई ऊंचाइयों तक पहुंचा पाती है।
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