हापुड़ के धौलाना क्षेत्र में महाराणा प्रताप जयंती की बाइक रैली के दौरान कथित भड़काऊ भाषण के बाद दो पक्षों में हिंसक झड़प हो गई। दोनों ओर से पथराव और तोड़फोड़ हुई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात पर काबू पाया और इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर निकाली जा रही बाइक रैली उस समय हिंसा में बदल गई, जब कथित भड़काऊ भाषण के बाद दो पक्ष आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों ओर से जमकर पथराव शुरू हो गया। उपद्रवियों ने कई वाहनों में तोड़फोड़ की और लोगों के साथ मारपीट भी की, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
घटना धौलाना क्षेत्र की है, जहां शनिवार को महाराणा प्रताप जयंती के मौके पर बड़ी संख्या में युवाओं द्वारा बाइक रैली निकाली जा रही थी। हिंसा के बाद इलाके में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
भड़काऊ भाषण के बाद बिगड़े हालात
जानकारी के अनुसार सिरोधन गांव से देहरा गांव तक महाराणा प्रताप जयंती के उपलक्ष्य में बाइक रैली निकाली जा रही थी। रैली में बड़ी संख्या में बाइक और चार पहिया वाहन शामिल थे। युवक जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे और माहौल उत्साहपूर्ण था।
रैली जब देहरा गांव पहुंची, तब वहां महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर माल्यार्पण कार्यक्रम चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक इसी दौरान एक व्यक्ति ने कथित रूप से भड़काऊ भाषण दिया। भाषण का कुछ लोगों ने विरोध किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच पहले तीखी बहस हुई और फिर मामला हिंसक टकराव में बदल गया।
कुछ ही मिनटों में दोनों ओर से पथराव शुरू हो गया। अचानक हुए इस हमले से रैली में शामिल लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
सड़क पर मचा हड़कंप, लोग जान बचाकर भागे
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि पत्थरबाजी शुरू होते ही लोग इधर-उधर भागने लगे। कई लोग अपनी बाइक और वाहन छोड़कर जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागे।
घटना के दौरान उपद्रवियों ने रास्ते में खड़े कई वाहनों को निशाना बनाया। वाहनों के शीशे तोड़े गए और कई गाड़ियों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया।
कुछ लोगों के साथ मारपीट की भी सूचना सामने आई है। हालांकि पुलिस प्रशासन की ओर से किसी गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
पुलिस प्रशासन की तैयारियों पर उठे सवाल
इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
महाराणा प्रताप जयंती को लेकर पहले से ही संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाने का दावा किया गया था। प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने और रैली की निगरानी रखने की बात कही थी।
लेकिन इसके बावजूद खुलेआम पथराव और हिंसा होना प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी निगरानी और सतर्कता बरती जाती तो हालात इतने नहीं बिगड़ते।

कई थानों की पुलिस ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने लाठी फटकारते हुए दोनों पक्षों को खदेड़ा और हालात को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो सकी।
इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने इलाके में फ्लैग मार्च किया और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।
वीडियो फुटेज खंगाल रही पुलिस
हापुड़ के एसपी कुंवर ज्ञानंजय सिंह ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है।
उन्होंने कहा कि:
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मौके पर मौजूद वीडियो फुटेज,
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सोशल मीडिया क्लिप,
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और अन्य साक्ष्यों के आधार पर उपद्रवियों की पहचान की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
इलाके में भारी पुलिस बल तैनात
फिलहाल धौलाना और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
पुलिस लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि दोबारा किसी तरह का तनाव न फैल सके।
अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है।
त्योहार और जुलूसों के दौरान बढ़ती संवेदनशीलता
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि धार्मिक और ऐतिहासिक आयोजनों के दौरान प्रशासनिक सतर्कता कितनी जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
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संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान,
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रैली की लाइव मॉनिटरिंग,
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और भड़काऊ भाषणों पर तत्काल कार्रवाई
ऐसी घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
फिलहाल हापुड़ पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और स्थिति को नियंत्रण में बताया जा रहा है।
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